ग्रीनपीस के कार्यकर्ता रूस में गिरफ़्तार

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रूसी अधिकारियों ने पर्यावरण के लिए काम करने वाली संस्था ग्रीनपीस के 30 कार्यकर्ताओं पर चोरी का आरोप लगाते हुए उन्हें हिरासत में लिया है.

रूस का कहना है कि उन पर आर्कटिक तेल प्लेटफ़ॉर्म में घुसने के आरोप में मुक़दमा चलाया जाएगा.

एफ़बीआई की तर्ज़ पर काम करने वाली रूसी जांच समिति इन कार्यकर्ताओं से पूछताछ करेगी. इनमें से छह ब्रितानी नागरिक हैं.

उनके जहाज़ आर्कटिक सनराइज़ को मरमांस्क बंदरगाह ले जाया गया है.

कमेटी के प्रवक्ता व्लादीमिर मार्किन ने कहा, "जिन्होंने भी प्लेटफ़ॉर्म पर हमला किया है, उन पर कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे किसी भी देश के क्यों न हों."

ग्रीनपीस के इन कार्यकर्ताओं को गुरुवार को उनके जहाज़ के साथ पकड़ा गया था. इनमें से दो कार्यकर्ताओं ने गाज़प्रॉम प्लेटफ़ॉर्म पर चढ़ने की कोशिश की थी. ये लोग आर्कटिक में तेल खनन का विरोध कर रहे थे.

बालक्लाव पहने हथियारबंद रूसी लोग पहले हेलीकॉप्टरों के ज़रिए दोहरी रस्सी लगाकर जहाज़ पर उतरे और फिर छापेमारी की कार्रवाई शुरू कर दी. जहाज़ को पेचोरा के समुद्री इलाक़े में पकड़ा गया.

ग्रीनपीस का कहना है कि रूसी अधिकारियों ने ‘हमारे 30 कार्यकर्ताओं को पकड़ रखा है’, हालांकि इस संख्या की तस्दीक रूसी अधिकारियों ने नहीं की है.

क़ानूनी विवाद

Image caption ग्रीनपीस ने कहा है कि ‘ख़तरनाक आर्कटिक तेल खनन’ के ख़िलाफ़ उनका विरोध शांतिपूर्ण था.

मंगलवार को अपने एक बयान में ग्रीनपीस ने कहा कि उनके जहाज़ को एक छोटी नाव और रूसी कोस्टगार्ड का जहाज़ लादोगा मरमांस्क के पास तट पर लेकर आया.

उनका कहना है, "ग्रीनपीस इंटरनेशनल के वकीलों ने तुरंत प्रभाव से अपने तीस कार्यकर्ताओं से बात कराने को कहा है जिन्हें चार दिन से कोई भी क़ानूनी या दूतावास का सहयोग हासिल नहीं है. अभी भी यह साफ़ नहीं है कि रूस इन कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ आरोप तय करना चाहता है या नहीं. दूसरे ग्रीनपीस को अभी तक किसी रूसी अधिकारी ने संपर्क नहीं किया है."

पर्यावरण संस्था का कहना है कि ‘ख़तरनाक आर्कटिक तेल खनन’ के ख़िलाफ़ उनका विरोध शांतिपूर्ण था और उनके ‘मज़बूत सिद्धांतों’ के दायरे में था.

उनका कहना है, "हमारे कार्यकर्ताओं ने ऐसा कुछ नहीं किया है जिस तरह की प्रतिक्रिया रूसी अधिकारियों ने दी है."

रूसी कमेटी के प्रवक्ता मार्किन ने विरोध प्रदर्शन को ‘खनन प्लेटफ़ॉर्म पर अचानक हमलाकर उसे क़ब्ज़ा करने की कोशिश’ बताया है और कहा कि इससे ‘उनकी मंशा के बारे में वैध संदेह पैदा हुए हैं.’

उनका कहना था कि जहाज़ ‘इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान से भरा था जिसका मक़सद साफ़ नहीं है.’

मार्किन के मुताबिक़ "यह यक़ीन करना मुश्किल है कि तथाकथित कार्यकर्ता यह नहीं जानते थे कि प्लेटफ़ॉर्म पर ऊंचे दर्जे के जोख़िम का स्तर है, और कोई भी अनधिकारिक कार्रवाई का नतीजा दुर्घटना हो सकती है, जो न केवल वहां मौजूद लोगों का जीवन ख़तरे में डालेगी बल्कि इसका असर पारिस्थितिकी पर भी होगा जिसे बड़ी मुश्किल से बचाया गया है."

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