पेशावर चर्च धमाके में मरने वाले 'शहीद'

पेशावर का चर्च
Image caption 2009 में पंजाब के गोजरा कस्बे में भीड़ ने एक चर्च में आग लगा दी थी.

दुनिया में एंग्लिकन चर्च के सबसे बड़े धर्मगुरु कैंटरबरी के आर्कबिशप ने कहा है कि पेशावर चर्च पर हुए आत्मघाती बम धमाके में मारे गए लोगों को 'शहीद' का दर्जा मिलना चाहिए.

जस्टिन वेल्बी ने कहा कि रविवार को मारे गए लगभग 80 ईसाइयों को उनके मज़हब की वजह निशाना बनाया गया.

बीबीसी को दिए गए एक साक्षात्कार में आर्कबिशप ने पकिस्तान के ईशनिंदा क़ानून को अन्यायपूर्ण बताया.

उन्होंने पाकिस्तानी सरकार से ईसाई अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने की अपील की.

तालिबान से जुड़े एक चरमपंथी गुट ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

'भयावह हमला'

जस्टिन वेल्बी ने कहा, "यह एक भयावह हमला है. यह पाकिस्तान में ईसाई समुदाय पर हुआ सबसे बुरा हमला है. हम जिस एक चीज़ की माँग कर रहे हैं और हम कहते रहे हैं, ख़ास तौर पर पाकिस्तान का ईसाई समुदाय कहता रहा है, वो ये है कि यह पकिस्तान सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने सभी नागरिकों, अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक दोनों की सुरक्षा करे."

उन्होंने कहा, "हम उनसे यह सुनिश्चित करने की अपील करते हैं कि अल्पसंख्यकों को पूरी सुरक्षा दी जाए."

उन्होंने यह भी कहा, "कुछ समय पहले क़ानून लाए गए थे और उनका प्रयोग समय के अनुसार बदलता रहता है लेकिन लेकिन कई बार उनका प्रयोग कभी कभी इस तरह से किया जाता है जो अन्यायपूर्ण और अल्पसंख्यकों को निशान बना कर किया हुआ लगता है."

उनका कहना था कि इस तरह के मामलों में पकिस्तान सरकार और सुरक्षाबलों सभी लोगों के साथ क़ानून के अंतर्गत एक जैसा व्यवहार करें.

Image caption पकिस्तान में ड्रोन हमलों का विरोध होता रहता है.

'ड्रोन हमलों का बदला'

पाकिस्तान तालिबान से जुड़े एक चरमपंथी संगठन ने कहा था कि ये क़बायली इलाक़ों में हो रहे अमरीकी ड्रोन हमलों का बदला है.

ईसाइयों का कहना है कि हमले के बाद प्रांतीय सरकार का कोई मंत्री न तो घटनास्थल पर पहुंचा और न ही अस्पताल में घायलों का हालचाल लिया गया.

मुस्लिम बहुल आबादी वाले पाकिस्तान में 1.6 प्रतिशत ईसाई रहते हैं.

(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें. आप ख़बरें पढ़ने के लिए हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर आ सकते हैं और ट्विटर पर फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार