सौर ऊर्जा पर कर में छूट देगा चीन

सौर ऊर्जा

चीन ने संकट से जूझ रहे सौर ऊर्जा सेक्टर को सहारा देने और प्रदूषण में कमी लाने के उद्देश्य से सौर ऊर्जा उपकरण बनाने वाली कंपनियों को कर में छूट देने की पेशकश की है.

सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक़ सौर ऊर्जा से जुड़े उपकरण बनाने वाली कंपनियों को एक अक्टूबर 2013 से 31 दिसंबर 2015 के दौरान उनके मूल्य संवर्द्धित कर का 50 प्रतिशत हिस्सा वापस किया जाएगा.

हाल के सालों में चीन की कंपनियां सौर ऊर्जा क्षेत्र में अहम ताक़त बनकर उभरी हैं, लेकिन कमज़ोर मांग और व्यापार संबंधी विवाद के चलते इन पर भारी कर्ज़ चढ़ा है.

शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक़ सोलर पैनल बनाने वाली देश की दस शीर्ष कंपनियों पर 100 अरब युआन यानी 16.3 अरब कर्ज़ है.

इस साल की शुरुआत में सोलर पैनल बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी सनटैक पावर होल्डिंग्स कर्ज़ चुकाने में नाकाम रही.

कर्ज़

इसके बाद सोलर वेफ़र्स बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी एलडीके सोलर कंपनी भी अपना कर्ज़ नहीं चुका सकी.

हाल के वर्षों में दुनियाभर के देशों, खासकर विकसित देशों में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का प्रचलन बढ़ा है.

चीन की कंपनियों ने इस बाज़ार के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा जमा रखा है और अग्रणी बनकर उभरी हैं.

मगर कीमतों में कमी के साथ-साथ मांग घटने से दुनियाभर में सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियां प्रभावित हुई हैं और चीन की कंपनियों को भी इसकी मार झेलनी पड़ रही है.

अमरीकी और यूरोपीय कंपनियों ने इसके लिए चीन की कंपनियों को ज़िम्मेदार ठहराया है. उनका आरोप है कि चीन की कंपनियों ने सस्ते दामों पर माल बेचकर यह हालात पैदा किए.

आरोप

ऐसे दावे भी किए जा रहे हैं कि चीन सरकार ने अपनी कंपनियों को सब्सिडी दी, ताकि वो अपने उत्पादों की क़ीमत कम रख सकें. परिणामस्वरूप अमरीका जैसे देशों ने उन पर टेरिफ़ लगा दिया.

हालांकि चीन ने इन आरोपों का खंडन किया है. लेकिन इन विवादों और गिरती क़ीमतों ने चीन की कंपनियों को प्रभावित किया है और कुछ कंपनियों का भविष्य भी संदेह के घेरे में आ गया है.

इन चिंताओं और देश में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनज़र चीन सोलर पैनल की आंतरिक मांग बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है.

शिन्हुआ की रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि सरकारी मदद के बावजूद देश में इस इंडस्ट्री की हालत चिंताजनक है.

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