सीरिया: बच्चे भी थे 'रासायनिक हमले के शिकार'

Image caption रासायनिक हमले में 40 प्रतिशत तक जला 13 वर्षीय अहमद दरवेश.

सीरिया के उत्तरी प्रांत एलेप्पो में बीबीसी की टीम द्वारा ली गई कुछ तस्वीरों में एक स्कूल पर रासायनिक हमले जैसा दिखने वाले दर्दनाक दृश्य ने दुनिया को फिर झकझोर दिया है. बीबीसी ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि आख़िर उन बच्चों के साथ क्या घटित हुआ था, जो हमले में बुरी तरह जल गए थे.

इंग्लैंड की समाजसेवी संस्था 'हैंड इन हैंड' की ओर से ब्रितानी चिकित्सकों द्वारा दूर-दराज़ के इलाक़ों में किए जा रहे कार्यों को फ़िल्माने के लिए हम सीरिया गए थे.

चिकित्सकों का दल एलेप्पो प्रांत के एक अस्पताल में पहुंचा. संस्था द्वारा ही यह अस्पताल आम उपचार के लिए स्थापित किया गया था लेकिन युद्ध के माहौल में यह घायलों से भरा पड़ा था.

एक घंटे के अंदर ही हमें कुछ अनहोनी के घटित होने का संकेत मिल गया.

एक सात साल का बच्चा वहां लाया गया जिसका गुलाबी गाल फफोलों से भरा हुआ था. उसके पिता भी जले हुए थे और वह निराश अपने बच्चे को कस कर पकड़े हुए थे.

Image caption अलेप्पो का फील्ड अस्पताल.

ब्रितानी चिकित्सकों के दल को उड़ती हुई ख़बर मिली कि और भी घायल आ रहे हैं.

जल्द ही, दर्जन भर लोग, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे, स्ट्रेचर पर लाते दिखाई दिए जिनके शरीर पर रासायनिक हथियार 'नापाम' के हमले जैसे घाव थे.

उनके कपड़े और शरीर जले हुए थे और कुछ मामलों में उनके बाल गल गए थे.

उन सभी का शरीर फफोलों से भरा था और चेहरा विकृत हो गया था. लगभग मूर्तिवत वे अंदर आए, उनके चेहरे पर सदमा और दर्द था. जले हुए मांस की गंध चारों ओर फैली हुई थी.

कुछ ही मिनटों में पूरा अस्पताल विशाद से भर गया. डॉ. रोला हलाम और डॉ. सालेहा अहसाम हताहतों का उपचार कर रहे थे.

आम तौर पर हवाई बमबारी के दौरान होने वाले घाव व रक्तस्राव जैसा यहां कुछ नहीं था.

'नापाम का इस्तेमाल'

हम यह निश्चित तौर पर नहीं कह सकते कि बम में क्या था लेकिन जिस तरह के डरावने जलने के घाव थे उससे लगता है कि नापाम या थर्माइट जैसे घातक रासायनिक तत्वों का इस्तेमाल किया गया था.

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने सीरिया में अन्य जगहों पर भी इसी तरह के बमों के इस्तेमाल के सबूत इकट्ठा किए हैं.

यह हमला सीरिया की राजधानी दमिश्क़ के पूर्वी हिस्से में हुए हमले के एक दिन बाद हुआ था, जहां सैकड़ों लोग मारे गए थे और लोगों को भय था कि वैसा ही हमला यहां भी हुआ है.

चिकित्सक घायलों का उपचार करने में लगे थे और शरीर पर मरहम लगा रहे थे. इमरजेंसी वार्ड में मौजूद सीमित बिस्तर जल्द ही भर गए थे.

Image caption घायलों को विशेष इलाज के लिए तुर्की ले जाया गया.

अस्पताल के बाहर पानी का एक टैंकर लोगों पर पानी छिड़क रहा था. लोग डरे हुए थे और उन्हें लग रहा था कि यह रासायनिक हमला था.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने लक्ष्य की तलाश में आसमान में चक्कर लगाते लड़ाकू विमान देखे थे. उस स्कूल के पास बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे जहां बम गिरा था.

लोग राष्ट्रपति बशर अल-असद को कोस रहे थे.

13 वर्ष का अहमद दरवेश जब अस्पताल पहुंचा तो वह बुरी तरह कांप रहा था लेकिन इमरजेंसी वार्ड पूरी तरह भरा था इसलिए उसे बाहर ही रोक दिया गया.

उस दिन अस्पताल में 30 घायलों को भर्ती किया गया.

ज़्यादातर मामले 50 प्रतिशत जल जाने के थे, जिसका मतलब उनके जीवित रहने की आधी संभावना थी.

घायलों को बेहतर उपचार की ज़रूरत थी लेकिन एलेप्पो के इस अस्पताल में विशेष व्यवस्था न होने के चलते परिजन घायलों को सरहद पार तुर्की में भर्ती कराने के लिए ले जाने लगे.

हमले के दो दिन बाद हम दोबारा स्कूल गए. वहां सन्नाटा पसरा था. परिसर में फैली गंध और मलबे से लगता था कि यह रासायनिक हमला था.

रासायनिक हमले पर प्रतिबंध की संधि में दुनिया के 100 से ज्यादा देश शामिल हैं लेकिन सीरिया इससे ख़ुद को अलग रखे हुए था.

Image caption स्कूल परिसर के मलबे को देखने से लगता है कि यहां रासायनिक हमला हुआ था.

घटनास्थल की वायु में अभी भी उस चीज़ की गंध मौजूद थी, जो हमले के दौरान इस्तेमाल की गई थी. यह कल्पना करना मुश्किल है कि आख़िर वह क्या था.

हमले में 10 बच्चे मारे गए थे और बाक़ी बुरी तरह घायल हो गए थे.

कुछ सप्ताह बाद हम तुर्की के अस्पताल में अहमद दरवेश को देखने गए. वह 45 प्रतिशत जल गया था.

अब जबकि रासायनिक हथियार के विवाद की धुंध छंट रही है दुनिया का ध्यान एक बार फिर सीरिया की ओर है.

लेकिन जो लोग इस युद्ध में बच गए, उनकी ज़िंदगी और संघर्षपूर्ण हो गई है और यह सिलसिला जारी है.

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