फ़िनलैंड को क्यों पसंद है सॉना?

सॉना, फिनलैंड

हल्की रोशनी वाले एक कमरे में, कुछ निर्वस्त्र पुरुष खामोश बैठे हैं, पसीना बहाते हुए. उनमें से एक ख़ुद को भोजवृक्ष की टहनियों से पीट सा रहा है. एक दूसरा व्यक्ति एक कोने में रखे स्टोव के गर्म पत्थरों के ऊपर बड़े ही ध्यानपूर्वक पानी डालता है.

गर्म पत्थर पर पानी डालने से हल्की सी हिस्स की आवाज़ आती है.

और कुछ ही सेकेंड में भाप को झोंका उसके टखनों, पैरों और फिर पूरे शरीर को ढक लेता है.

नहाने के इस खास अंदाज का चलन फ़िनलैंड में हज़ारों साल से रहा है. तब से जब लोग यहां बसने आए, एक गड्ढा खोदा और पत्थरों को गर्म किया. भाप के लिए इन पत्थरों पर पानी डाला. फ़िनलैंड में इस भाप को 'लोयली' कहा जाता है.

खेतों में कठिन परिस्थितियों में काम करने वालों को सॉना से राहत मिलती थी. उनकी थकी हुई मांसपेशियों को इससे बहुत ही आराम मिलता था.

इन ग़र्म कमरों को कम तापमान पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. ये कमरे फ़िनलैंड के लोगों के जीवन के केंद्र में रहे हैं.

महिलाएं इन कमरों में बच्चों को जन्म देती थी क्योंकि पारंपरिक धुएं वाले सॉना की दीवारें जीवाणुरोधी कालिख से रंगी होती थीं.

ज़िंदगी से जुड़ा है सॉना

Image caption फिनलैंड में सॉना को ग़रीबों के लिए दवा माना जाता है.

शादी से पहले शुद्ध होने की रस्में भी सॉना में होती थीं और मृतकों के शवों को भी सॉना की हुई लकड़ी की बेंचों पर साफ़ और तैयार किया जाता था.

फ़िनलैंड की राजधानी हेलसिंकी के पेक्का निएमी कहते हैं, "लोग मानते हैं कि सॉना एक ग़रीब आदमी के लिए दवा है."

पेक्का निएमी 54 साल के हैं. वो दिन में तीन घंटे और हफ़्ते में छह दिन सॉना में बिताते हैं.

आज फ़िनलैंड की आबादी 53 लाख है और देश में 33 लाख सॉना हैं. यानी ये सॉना घर में हैं, दफ़्तरों, होटलों, जहाज़ों, फ़ैक्ट्रियों और ज़मीन के नीचे खदानों में हैं.

फ़िनलैंड में 99 प्रतिशत लोग हफ़्ते में एक बार सॉना का इस्तेमाल करते हैं और गांवों में जाने पर और ज़्यादा जहां ज़िंदगी सॉना के आसपास घूमती है.

इन सॉना के नज़दीक स्थित झील का इस्तेमाल शांत होने के लिए किया जाता है.

लेहटोला फ़िनिश सॉना सोसायटी के सदस्य हैं. ये संगठन पारंपरिक सॉना संस्कृति को बचाने के लिए काम कर रहा है.

जैर्मो लेहटोला कहते हैं, "बच्चों को ये सिखाया जाता था कि वे सॉना में वैसा ही बर्ताव करें जैसे वे चर्च में करते हैं."

लेहटोला का मानना है , "सॉना आपके दिमाग़ के लिए है. ये आधुनिक समाज में आपको शांत होने में मदद करता है."

'सेक्स से नाता नहीं'

सॉना के कुछ बुनियादी नियम हैं. सॉना में कुछ भी ख़ाने या पीने की इजाज़त नहीं है और अगर आप बोलें तो अपनी नौकरी, पद या धर्म का ज़िक्र न करें.

ज़्यादातर लोग मानते हैं कि पारंपरिक सॉना सबसे बढ़िया है क्योंकि उनमें बहुत नर्म भाप पैदा होती है.

सॉना में कपड़े या स्विमसूट पहनने की भी इजाज़त नहीं होती. शरीर का हर अंग अच्छी तरह से साफ़ होना चाहिए.

महिलाएं और पुरुष सॉना में अलग-अलग जाते हैं, अगर वे एक ही परिवार के सदस्य न हों तो.

माता-पिता अपने बच्चों के साथ सॉना जाते हैं जब तक कि बच्चे बड़े न हो जाएं, तब वे अकेले या अपने दोस्तों के साथ सॉना जाते हैं.

सॉना के बारे में एक बड़ी ग़लतफ़हमी है जिसे लेहटोला दूर करना चाहते हैं, "फ़िनलैंड में इसका यौन संबंधों से कुछ लेना-देना नहीं है लेकिन 1970 और 1980 के दशक में जर्मनी जैसे देशों में सॉना सिर्फ़ सेक्स से जुड़ा हुआ था."

लेहटोला कहते हैं कि फ़िनलैंड के बाहर उन्हें किसी देश में सॉना में मज़ा नहीं आया. सच तो ये है कि वो हेलसिंकी के कुछ सार्वजनिक सॉना से भी ख़ुश नहीं हैं.

हेलसिंकी के कामकाजी इलाके कैलियो में दो सॉना हैं, कोतिहार्जु और अर्ला.

फ़ैक्ट्रियों में काम करने वाले लोग इन सॉना में आराम करने, मिलने-जुलने और नहाने आते थे. अब इस इलाके में रहने वाले छात्र, कलाकार और सैलानी पसीना बहाने और ठंडी बीयर पीने आते हैं.

कभी हेलसिंकी में 100 से ज़्यादा सॉना होते थे लेकिन 50 के दशक में जब लोगों ने निजी सॉना वाले घर ख़रीदना शुरू किए तो सार्वजनिक सॉना की संख्या में गिरावट आनी शुरू हो गई.

अब हेलसिंकी में सिर्फ़ चार सार्वजनिक सॉना हैं.

'डीएनए में है सॉना'

फ़िनलैंड की संसद में सांसदों के लिए अपना सॉना है और दुनिया भर में फ़िनलैंड के सभी दूतावास में भी सॉना हैं.

फ़िनलैंड के पूर्व राष्ट्रपति और नोबेल पुरस्कार विजेता मार्टी अहतिसारी सॉना डिप्लोमेसी करते थे.

वहीं शीतयुद्ध के दौरान राष्ट्रपति रहे उर्हो केकानन - जो 26 साल तक राष्ट्रपति रहे - दुनिया भर के नेताओं से अपने आधिकारिक निवास के सॉना में बात करना पसंद करते थे जहां नए विचार सामने आते थे.

केकानन का मानना था कि सॉना में सभी बराबर हैं, यहां आस्तीनों में राजनीति छिप नहीं सकती क्योंकि कोई कपड़े नहीं पहनता.

Image caption फिनलैंड के राष्ट्रपति उर्हो केकानन ने ख्रुश्चेव से अपने निवास के सॉना में बातचीत की थी.

फ़िनलैंड को शीतयुद्ध के दौरान काफ़ी संतुलन बनाकर रखना पड़ा. इसकी निष्पक्षता को लगातार इसके विशाल पड़ोसी सोवियत संघ से चुनौती मिलती थी.

साल 1960 में सोवियत संघ के नेता ख्रुश्चेव केकानन के 60वें जन्मदिन पर पहुंचे थे. कहानी कुछ यूं है कि केकानन ने पत्थरों पर पानी डाल-डालकर ख्रुश्चेव को सुबह 5 बजे तक सॉना में रखा.

इसके थोड़ी देर बाद सोवियत सरकार ने एक बयान जारी कर पश्चिम के साथ सहयोग के फ़िनलैंड के इरादों का समर्थन कर दिया. इसके बाद साल 1971 में फ़िनलैंड यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन में शामिल हुआ था.

ख्रुश्चेव की सोवियत रूस में आलोचना हुई. आलोचकों का कहना था कि एक कम्युनिस्ट को एक पूंजीवादी के साथ सॉना में बगैर कपड़ों के नहीं जाना चाहिए था.

सॉनास्यूरा में बाल्टिक सागर में आराम करने के बाद मैं जैर्मो लेहटोला से पूछता हूं कि सॉना के बगैर जीवन कैसा होता. वो कहते हैं, "सॉना के बगैर फ़िनलैंड ही नहीं होता. सॉना हमारे डीएनए में है.

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