जेल में बीत गई ज़िंदगी, 40 साल बाद अदालत ने कहा सज़ा ग़लत

अमरीका के लूइज़ियाना प्रांत के एक न्यायाधीश ने हत्या के आरोप में पिछले 40 साल से जेल में बंद एक क़ैदी की सज़ा को असंवैधानिक क़रार दिया है.

अमरीकी जज ब्रायन जैक्सन ने सज़ा भुगत रहे और गंभीर तौर पर बीमार हरमन वालेस को जेल से रिहा करने के आदेश दिए हैं.

वालेस को सन् 1974 में हत्या के आरोप में क़ैद की सज़ा सुनाई गई थी.

जज ने जैक्सन वालेस की सज़ा को जिस आधार पर असंवैधानिक क़रार दिया है, वह भी कम दिलचस्प नहीं.

जैक्सन के मुताबिक़ वालेस को सज़ा देने वाली ज्यूरी में कोई महिला नहीं थी, इसके चलते निष्पक्ष सुनवाई नहीं हुई.

जैक्सन ने अपने फ़ैसले में लिखा, "इस मामले से जुड़े दस्तावेज़ बताते हैं कि वालेस की ज्यूरी ठीक ढंग से नहीं चुनी गई थी और जब लुइज़ियाना की अदालत को इसे सुधारने का मौक़ा मिला तो वे इसमें नाकाम रहे."

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लाइलाज कैंसर से पीड़ित

एमनेस्टी इंटरनेशनल के टेस्सा मर्फ़ी ने इस मामले में कहा, "हरमन वालेस का मामला अमरीका में न्यायिक प्रक्रिया की ग़लती का दुखद उदाहरण है.

संघीय अदालत ने इस मामले की ग़लती को मान लिया है. लेकिन इसमें काफ़ी देरी हुई क्योंकि हरमन लाइलाज कैंसर के चलते मौत की कगार पर हैं."

71 साल के हो चुके वालेस को पिछले साल लीवर कैंसर की बीमारी हो गई थी. डॉक्टरों के मुताबिक़ वे लंबे समय तक जी नहीं पाएंगे.

हालांकि अभियोजन पक्ष के वकील हेलर मूर ने जज के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए एक अमरीकी अख़बार से कहा कि वे वालेस की रिहाई के ख़िलाफ़ अपील करेंगे.

वालेस उन तीन लोगों में शामिल थे जिन पर सन्1972 में एक जेल के गार्ड की हत्या करने का आरोप लगा था. इन तीनों को अमरीका में अंगोला थ्री का नाम दिया गया, हालांकि तीनों खुद को इस मामले में निर्दोष बताते रहे. बच्ची के हत्यारे को फांसी

लंबे समय से रिहाई की मांग

Image caption जेल में बंद हरमन वालेस और एल्बर्ट वुडफॉक्स अपने युवावस्था में.

तीनों अभियुक्तों में से एक रॉबर्ट किंग को 2001 में रिहा कर दिया गया था. जबकि वालेस और एलबर्ट वुडफॉक्स की सज़ा क़ायम रखी गई. इन दोनों को जेल की तंग निर्जन कोठरियों में अलग अलग में रखा गया था.

इन्हें हर रोज़ महज़ एक घंटे के लिए इन कोठरियों से बाहर निकाला जाता था.

वैसे इन तीनों पर जब जेल के गार्ड की हत्या का आरोप लगा तब ये लोग लूट के एक मामले में जेल ही में बंद थे.

हत्या के आरोप में सज़ा मिलने पर इन तीनों के समर्थन में काफ़ी लंबा अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया गया.

इस अभियान में कहा गया कि ये तीनो चरमपंथी ब्लैक पैंथर पार्टी से जुड़े हुए थे, इसलिए इन्हें फंसाकर सज़ा दी गई.

सज़ा सुनाए जाने के बाद तीनों को लूइज़ियाना राज्य सुधारगृह में रखा गया. हालांकि इस जेल का नाम अंगोला रखा गया, क्योंकि जिस जगह जेल बना वहां पहले अफ़्रीक़ा से लाए गए बंधुआ मज़दूरों से खेती का काम लिया जाता था.

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