'राहुल के क़द का अंदाज़ा हुआ'

  • 6 अक्तूबर 2013
उर्दू मीडिया, नरेंद्र मोदी, तालिबान, पाकिस्तान, कराची, हिंसा

दाग़ी नेताओं को बचाने वाला अध्यादेश वापस लेना और उसके पीछे करवट लेती राजनीति जहां भारतीय ऊर्दू मीडिया में छाई रही, वहीं पाकिस्तान में हिंसा और खून-खराबा और उसके बीच तालिबान के साथ बातचीत पर मंडराते गतिरोधों के साए चर्चा का विषय बने.

दिल्ली समेत कई शहरों से निकलने वाले 'राष्ट्रीय सहारा' ने लिखा है- 'ताकत की नई धुरी.' अख़बार लिखता है कि जिस तरह मंत्रिमंडल ने दाग़ियों को बचाने वाला अध्यादेश वापस लिया है, उससे कांग्रेस में राहुल गांधी के क़द का अंदाज़ा होता है. ऐसा नहीं है कि राहुल ने इसका अचानक विरोध किया है. कांग्रेस के अंदर अध्यादेश को लेकर आवाज़ें उठ रही थीं.

अख़बार के अनुसार कांग्रेस के कई नेताओं को आशंका थी कि भ्रष्टाचार के मामले में पहले से घिरी यूपीए सरकार को इस अध्यादेश से और नुकसान उठाना पड़ सकता है.

'हिंदोस्तान एक्सप्रेस' ने लिखा है कि राहुल गांधी शहरी और युवा मतदाताओं के बीच कांग्रेस की कमज़ोर हालत सुधारने के लिए सामने आए हैं.

अख़बार के अनुसार सरकार के रणनीतिकारों का ख़्याल है कि खाद्य सुरक्षा बिल और कई अन्य योजनाओं की बदौलत गरीबों और पिछड़ों को रिझाने के लिए उनके तरकश में कई तीर हैं. लेकिन शहरी और मध्यवर्ग के लिए अभी बहुत करना बाक़ी है.

चुनावों से पहले सातवें वेतन आयोग के गठन को अख़बार इन्हीं कोशिशों का नतीजा मानता है.

तेलंगाना पर तनाव

'हमारा समाज' ने तेलंगाना पर अपने संपादकीय में लिखा है कि अलग तेलंगाना के गठन को मंज़ूरी देकर सरकार ने मंत्रिमंडल में दरार में पैदा कर दी है. पर्यटन मंत्री चिरंजीवी ने तेलंगाना के विरोध में इस्तीफ़ा दे दिया, तो मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू इस्तीफ़े की पेशकश कर चुके हैं.

उनका कहना है कि सारे विकसित और खुशहाल शहर तेलंगाना का हिस्सा बन जाएंगे और आंध्र प्रदेश के हाथों में कटोरा आ जाएगा जबकि जयपाल रेड्डी और जयराम रमेश जैसे मंत्रियों ने तेलंगाना का समर्थन करते हुए कहा है कि अलग राज्य बनने से दोनों राज्यों में विकास के अवसर पैदा होंगे.

दैनिक 'सहाफ़त' ने मोदी के 'देवालय से पहले शौचालय' वाले बयान पर लिखा है कि वो खुद को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद फूले नहीं समा रहे हैं और ऐसे बयान दे रहे हैं जिनसे लगे कि वो एक तरक्क़ीपसंद नेता हैं.

वैसे मोदी के इस बयान की चर्चा पाकिस्तानी दैनिक 'पाकिस्तान' ने भी की है. अख़बार के अनुसार दिल्ली में युवाओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि वो हिंदुत्ववादी हैं, लेकिन मंदिर यानी देवालय बनाने से ज़्यादा प्राथमिकता वो शौचालय बनाने को देंगे.

अख़बार के मुताबिक़ मोदी ने कहा कि गांवों में लाखों रुपए मंदिर पर तो ख़र्च कर दिए जाते हैं लेकिन शौचालय के लिए कोई सुविधा नहीं होती है. हालांकि मोदी को इस बयान के लिए हिंदू संगठनों की आलोचना झेलनी पड़ रही है.

'दहशतगर्दी की इंतहा'

लाहौर से छपने वाले ‘नवाए वक़्त’ की ख़बर है सिंध में सोशल मीडिया पर पाबंदी का फ़ैसला. अख़बार लिखता है कि सिंध की सरकार ने तीन महीनों के लिए स्काइप, वाइबर, टैंगों और वाट्स ऐप जैसे इंटरनेट के जरिए संपर्क में रहने वाले तरीकों पर पाबंदी लगा दी है. प्रांतीय सरकार के अनुसार चरमपंथी पहले अपने कामों को अंजाम देने के लिए मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब सोशल मीडिया के जरिए वह दुनिया में हिंसा फैला रहे हैं.

Image caption स्काइप भी हुआ बैन

ख़ासतौर से कराची में टारगेट किलिंग करने के लोगों के ख़िलाफ़ जारी ऑपरेशन को 'एक्सप्रेस' ने अपने संपादकीय का विषय बनाया और शीर्षक दिया है-सिर्फ आपराधिक तत्व बने निशाना.

अख़बार लिखता है कि आपराधिक गतिविधियां चलाने वाले कई गुट और भाड़े के क़ातिल कराची को मैदान-ए-जंग बनाए हुए हैं. ज़रा सोचिए, जारी ऑपरेशन के बावजूद कराची में दो दिन के भीतर 27 लोगों की हत्या क्या 'दहशतगर्दी की इंतहा नहीं है'.

'औसाफ़' ने पाकिस्तान में चरमपंथ से निपटने के कानून में सख्ती की ख़बर पर कार्टून बनाया है, जिनमें प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ एमक्यूएम पार्टी के नेता अल्ताफ़ हुसैन को फ़ोन करके कह रहे हैं 'अल्ताफ़ भाई आप फ़िक्र मत करो, आप पर कोई कानून लागू नहीं होता.' असल में एमक्यूएम ही टारगेट किलिंग के लिए सबसे ज़्यादा बदनाम है.

'लहूलुहान पेशावर'

दैनिक 'इंसाफ़' ने लिखा है-लहूलुहान होता पेशावर. अख़बार के अनुसार पहले ईसाइयों को निशाना बनाया गया, फिर सरकारी कर्मचारियों की एक बस को बम से उड़ाया गया और फिर पेशावर के सबसे पुराने बाज़ारों में से एक क़िस्साख़्वानी बाज़ार में एक गाड़ी को रिमोट कंट्रोल से उड़ाया गया. अख़बार कहता है कि इन तीनों घटनाओं में 137 लोग अपनी जिंदगी की बाज़ी हार गए, लेकिन घायलों और बाकी बच गए लोगों में पैदा होने वाले ख़ौफ़ का कोई हिसाब-किताब मौजूद नहीं है.

Image caption तालिबान ने ड्रोन हमले रुकवाने की शर्त रखी है

उधर, तालिबान और सरकार की बातचीत को लेकर दोनों पक्ष अब भी मोलतोल में लगे हैं. दैनिक 'जंग' ने 'तालिबान की नई शर्त' शीर्षक से अपने संपादकीय में लिखा है कि तालिबान की ओर से सरकार के सामने रखी गई ड्रोन हमले बंद कराने की शर्त ने बातचीत की संभावनाओं को बड़ा झटका दिया है.

अख़बार के अनुसार तालिबान ने यह शर्त यह सोचकर रखी है कि ड्रोन हमले सरकार की मर्ज़ी से हो रहे हैं, जबकि सरकार बार-बार अमरीका से ये हमले बंद करने की मांग करती है. अब एक ही विकल्प रह गया है कि पाकिस्तान इन ड्रोन विमानों को मार गिराए.

लेकिन अख़बार कहता है कि ये क़दम दुनिया की सुपरपावर के खिलाफ खुले एलान-ए-जंग के समान होगा और यह पाकिस्तान सरकार के इख़्तियार में नहीं है और तालिबान इस बात को समझे और बातचीत की तरफ कदम बढ़ाए.

भारत की ही एक ख़बर जिसे तक़रीबन भारत और पाकिस्तान के सब अख़बारों ने अपने पहले पन्ने पर जगह दी है, वो है आरजेडी लालू यादव को चारा घोटाले में पांच साल की सज़ा होना.

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