नेटो अभियान पर करज़ई ने उठाए सवाल

ओबामा के साथ हामिद करज़ई

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने नेटो सेना पर आरोप लगाया है कि वो देश में स्थिरता लाने में नाकाम रही है.

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति करज़ई ने कहा है कि बड़ी संख्या में गठबंधन सैनिकों के मारे जाने और सैनिक अभियान में अरबों डॉलर ख़र्च किए जाने के बावजूद नेटो के अभियान के कारण अफ़ग़ानिस्तान ने काफ़ी पीड़ा झेली है.

नेटो के अभियान में आम नागरिकों के मारे जाने को लेकर अफ़ग़ानिस्तान और अमरीका की अगुआई वाली अंतरराष्ट्रीय सेना में दरार पैदा हुई है.

हामिद करज़ई ने कहा, "सुरक्षा के मोर्चे पर पूरा का पूरा नेटो अभियान अफ़ग़ानिस्तान की पीड़ा की वजह रहा है. इसके कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और कोई फ़ायदा नहीं हुआ, क्योंकि देश सुरक्षित नहीं है."

उन्होंने आरोप लगाया कि नेटो का ध्यान पाकिस्तान में तालिबान के सुरक्षित ठिकानों की जगह अफ़ग़ानिस्तान के गाँवों पर है, जो ग़लत है.

नेटो के अभियान पर कड़ी टिप्पणी करते हुए करज़ई ने कहा, "मैं ये कहकर ख़ुश नहीं हूँ कि देश में आंशिक रूप से सुरक्षा है. हम ऐसा नहीं चाहते. हम ये चाहते थे कि देश पूरी तरह सुरक्षित हो."

राष्ट्रपति के रूप में हामिद करज़ई का कार्यकाल अगले छह महीने में ख़त्म हो रहा है.

तालिबान से बातचीत

करज़ई का कहना है कि अब उनकी प्राथमिकता अफ़ग़ानिस्तान में शांति और सुरक्षा क़ायम करना है, जिसमें तालिबान के साथ सत्ता में भागीदारी को लेकर समझौता भी शामिल है.

उन्होंन कहा कि वे निजी रूप से तालिबान से बात कर रहे हैं और उनसे अपील कर रहे हैं कि वो आने वाले चुनाव में हिस्सा लें.

करज़ई ने कहा, "वे अफ़ग़ान हैं. जहाँ अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति और अफ़ग़ानिस्तान की सरकार तालिबान को सरकारी नौकरी दे सकती है, उनका स्वागत है. लेकिन जहाँ लोग चुनाव के माध्यम से लोगों का चयन करते हैं, वहाँ तो तालिबान को आगे आना होगा और चुनाव में हिस्सा लेना होगा."

उन्होंने उन चिंताओं को भी ख़ारिज किया कि तालिबान को सत्ता में वापस लाने के कारण देश में महिलाओं की स्थिति में जो सुधार हुआ है, वो नष्ट हो जाएगा.

राष्ट्रपति करज़ई ने कहा कि तालिबान की वापसी का देश की प्रगति पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि उनका देश शांति चाहता है और वे देश में शांति के लिए कुछ भी करना चाहते हैं.

11 सितंबर 2001 को अमरीका में हुए हमलों के बाद अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका के नेतृत्व वाली सेना ने हमला किया था. अगले साल के अंत तक अफ़ग़ानिस्तान से ज़्यादातर विदेशी सेना को हट जाना है.

अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमरीका एक द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते को अंतिम रूप देना चाहता है, जो 2014 में नेटो सेना की वापसी के बाद अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान के रिश्तों को औपचारिक रूप देगा.

अमरीका ये भी चाहता है कि राष्ट्रपति करज़ई इस समझौते पर हस्ताक्षर करें ताकि ये चुनावी मुद्दा न बनें. लेकिन हामिद करज़ई का कहना है कि वे इसे लेकर जल्दबाज़ी में नहीं हैं.

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