कम होगा भारत का आर्थिक विकास: आईएमएफ़

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष

भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट आगे भी जारी रह सकती है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत के आर्थिक विकास के अनुमानों में कटौती की है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि भारत में इस साल आर्थिक विकास 3.8 फ़ीसदी की दर से होगा जबकि 2014 में 5.1 फ़ीसदी की दर से होगा.

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का कहना है कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में कमज़ोर गतिविधि और ऊंची ब्याज दरों की वजह से ऐसा होगा.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने जुलाई में भारत की आर्थिक विकास दर 5.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया था.

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने ये भी कहा है कि इस साल महंगाई दर करीब 11 फ़ीसदी रहेगी और साल 2014 में करीब 9 फ़ीसदी रहेगी.

बीते साल भारत की आर्थिक विकास दर 5 फ़ीसदी रही थी, जो एक दशक में सबसे कम है.

'विदेशी पूंजी जाने का ख़तरा'

Image caption अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का मानना है कि भारत में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में गतिविधि कमज़ोर रहेगी.

भारत में महंगाई और बहुत बड़ा चालू खाते का घाटा बड़ी समस्या बना हुआ है जिसकी वजह से रुपया लुढ़क गया है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चेतावनी दी है कि भारत समेत सभी उभरती अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक विकास में गिरावट और विदेशी पूंजी के बाहर जाने के खतरे से जूझती रहेंगी.

मई में अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व बैंक के ये संकेत देने के बाद कि वो आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम में कटौती कर सकता है, उभरती अर्थव्यवस्थाओं से विदेशी मुद्रा का पलायन बढ़ा है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने ये भी कहा है कि विश्व की आर्थिक विकास दर इस साल अनुमान से 0.30 फ़ीसदी कम रहेगी जबकि अगले साल 0.20 फ़ीसदी कम रहेगी.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का मानना है कि अमरीकी सरकार को प्रभावित कर रही कामबंदी अगर लंबे समय तक जारी रही तो इसका काफ़ी नुकसान हो सकता है.

अगर अमरीकी सरकार की कर्ज़ उगाहने की सीमा को बढ़ाने के मुद्दे को नहीं सुलझाया गया तो इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने का है.

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