गैंडों के सींग में माइक्रोचिप लगाने की योजना

  • 17 अक्तूबर 2013
गैंडा
Image caption विशेषज्ञों के अनुसार हर गैंडे की सींग में ये माइक्रोचिप लगाना काफ़ी ख़र्चीला होगा

कीनिया में गैंडों का अवैध शिकार रोकने के लिए एक महत्वाकाँक्षी योजना बनाई गई है. देश के वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार इसके तहत देश के हर गैंडे के सींग में एक माइक्रोचिप लगाने की योजना है.

देश में मौजूद लगभग 1000 गैंडों के सींगों में ये माइक्रोचिप लगाई जाएगी.

अधिकारियों को उम्मीद है कि इसके बाद ये जाना जा सकेगा कि जानवर कहाँ है. साथ ही अगर अवैध शिकार किया गया तो वो सींग कहाँ है इसका पता भी लगाया जा सकेगा. इस तरह अवैध शिकारियों को पकड़े जाने की संभावना भी बढ़ जाएगी.

अफ़्रीका के अधिकतर हिस्सों में हाथी दाँत या फिर गैंडे के सींग की बढ़ती क़ीमतों के चलते अवैध शिकार काफ़ी मुनाफ़े का सौदा हो गया है.

कीनिया के सबसे सुरक्षित पार्कों में से एक नैरोबी नेशनल पार्क में अगस्त में एक सफ़ेद गैंडे को गोली मार दी गई थी. पिछले छह वर्षों में वहाँ पहली बार ऐसी घटना हुई थी.

ख़र्चीली योजना

एशिया में भी गैंडों के सींगों की काफ़ी क़ीमत मिल जाती है. यहाँ पर पारंपरिक दवाओं में उसका ख़ासा इस्तेमाल होता है. गैंडे का सींग केरैटिन से बना होता हैं जिससे मानव की उंगलियों के नाख़ून बने हैं.

वर्ल्ड वाइल्डलाइफ़ फ़ंड यानी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ़ से इस माइक्रोचिप परियोजना को समर्थन मिला है. इस फ़ंड ने 15,300 डॉलर की क़ीमत वाले ये चिप और उन पर निगरानी रखने वाले पाँच यंत्र दिए हैं.

मगर हर गैंडे को ढूँढ़कर उसमें ये माइक्रोचिप लगाने का ख़र्च इससे कहीं ज़्यादा आएगा. इसके बाद उन पर नज़र रखने में भी काफ़ी ख़र्च आएगा.

कीनिया वाइल्डलाइफ़ सर्विस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "अवैध शिकार करने वाले अपने काम में काफ़ी आधुनिक तरीक़ों वाले हो गए हैं तो ये ज़रूरी है कि उन्हें रोकने के लिए उनसे भी आधुनिक तरीक़ों का इस्तेमाल किया जाए."

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