रोज़गार से दूर नहीं होगी ग़रीबी !

  • 20 अक्तूबर 2013
Image caption एक सरकारी रिपोर्ट में इस बात के रखे जाने की उम्मीद है कि साल 2003 से क़ीमते बढ़ रही हैं जबकि आय स्थिर है

ब्रिटेन में एक सरकारी रिपोर्ट इस बात के संकेत देती है कि लाखों परिवारों के लिए ग़रीबी से निकलने का रास्ता सिर्फ़ रोज़गार की मदद से नहीं ढूंढा नहीं जा सकता.

श्रम मंत्री रह चुके ऐलन मिलबर्न की अगुआई में तैयार की गई यह रिपोर्ट बढ़ती क़ीमतों और स्थिर आय के सच को उजागर करेगी.

माना जा रहा है कि मिलबर्न नियोजकों से अपील करेंगे कि वह जीवन के लिए ज़रूरी आय से कम पा रहे परिवारों की मदद करें.

इस बीच उप प्रधानमंत्री निक क्लेग ने समस्या के हल के लिए पेंशनधारियों से ज़्यादा टैक्स वसूलने का विरोध किया.

ऐसा माना जा रहा है कि सरकार के 'सोशल मोबिलिटी ऐंड चाइल्ड पॉवर्टी कमीशन' की पहली रिपोर्ट में इस बात की चेतावनी दी जाएगी कि एक शताब्दी में पहली बार ऐसा होगा कि मध्य वर्गीय बच्चों का जीवनस्तर अपने माता-पिता के मुक़ाबले निचले स्तर का होगा.

उम्मीद है कि मिलबर्न ऐसी सिफ़ारिश करेंगे कि ग़रीब बच्चों के लिए रखे गए फंड का उपयोग मध्य वर्गीय बच्चों के जीवन की परिस्थितियों को सुधारने के लिए किया जाए.

प्रगति में कमी

Image caption रिपोर्ट में इस चेतावनी की आशंका है कि मध्यवर्गीय बच्चों के जीवनस्तर में गिरावट आ सकती है

कमीशन यह बात रखेगा कि 2003 के बाद से आय स्थिर है जबकि क़ीमतें लगातार बढ़ रही हैं.

इसका मतलब ये है कि महज़ रोज़गार कम आय वाले परिवारों को ग़रीबी के चंगुल से बचाने में सहायक नही है.

कमीशन की रिपोर्ट से आशा है कि वह नियोजकों से यह कहे कि वे ज़्यादा तनख़्वाह और काम के प्रशिक्षण और विकास के मौक़े पैदा करें.

ब्रितानी अख़बार 'डेली टेलीग्राफ़' में लिखे अपने लेख में उप प्रधानमंत्री निक क्लेग ने रिपोर्ट की तारीफ़ करते हुए कहा है कि ‘‘ऐसा रोज़ नहीं होता कि सरकार किसी ऐसी रिपोर्ट की तारीफ़ करे जो यह कहती हो कि जो कुछ हो रहा है वह सही नहीं है औऱ जितनी प्रगति हुई है वह कम है.’’

हालांकि क्लेग ने यह भी कहा कि अलग अलग पीढ़ियों पर कटौती के असर पर सवाल उठाना एक विवाद का विषय है.

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