ऐसे अमरीका ने जकड़ा फ़्रांस को जाल में: ली मोंद

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अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) ने वॉशिंगटन और संयुक्त राष्ट्र में फ़्रांसीसी राजनयिकों की जासूसी की थी. यह खुलासा ली मोंद अख़बार ने किया है. ली मोंद ने एनएसए के आंतरिक मैमो के हवाले से कहा है कि जीनी नाम के एक बेहद शातिराना प्रोग्राम का इस्तेमाल किया गया.

आरोप हैं कि अमरीकी जासूसों ने विदेशी नेटवर्कों को हैक किया, लाखों मशीनों में लगे सॉफ़्टवेयर, राउटर्स और फ़ायरवॉल्स में स्पायवेयर भेजे.

ली मोंद ने यह खुलासा तब किया है जब एक दिन पहले ही दावा किया गया था कि एनएसए ने फ़्रांस में लाखों फ़ोनों को टैप किया था.

स्नोडेन से मिली जानकारी

पेरिस में बीबीसी संवाददाता क्रिश्चियन फ़्रेज़र के मुताबिक ली मोंद का ताज़ा लेख गार्जियन के पूर्व पत्रकार ग्लेन ग्रीनवाल्ड को मिली सीआईए के पूर्व अधिकारी एडवर्ड स्नोडेन की जानकारी पर आधारित है, जो ब्राज़ील से यह जानकारी मुहैया करा रहे हैं.

यह लेख तब आया है जब अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी सीरिया मुद्दे पर विदेशी पक्ष से बातचीत के सिलसिले में लंदन में हैं.

ली मोंद की रिपोर्ट में जीनी के बारे में जानकारी दी गई है, जिसमें दूरदराज से बैठकर दुनियाभर में फैले कंप्यूटरों में सर्वेलांस प्रोग्राम लगाए गए. इनमें विदेशी दूतावास के कंप्यूटर भी शामिल थे.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वॉशिंगटन में फ़्रांसीसी दूतावास में (वाबाश के कोड नाम से) और संयुक्त राष्ट्र में फ़्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल के कंप्यूटरों में (ब्लैकफ़ुट के कोड नाम से) बग लगाए गए.

लेख में कहा गया है कि 2011 में अमरीका ने 652 मिलियन डॉलर की राशि इस प्रोग्राम को चलाने के लिए रखी थी, जिसे ‘जासूसी उपकरणों’ को लगाने में ख़र्चा गया. कहा जाता है कि दसियों लाख कंप्यूटर को उस साल हैक किया गया.

अगस्त 2010 के एक दस्तावेज़ के मुताबिक़ विदेशी दूतावासों के कंप्यूटरों से अर्जित ख़ुफ़िया जानकारी के ज़रिए अमरीका ईरान पर नए प्रतिबंधों के बारे में प्रस्ताव को लेकर हो रहे संयुक्त राष्ट्र मतदान के बारे में सुरक्षा परिषद सदस्यों की स्थिति को पहले ही जान गया था.

हमारे संवाददाता के मुताबिक़ अमरीका की चिंता यह थी कि फ़्रांस ब्राज़ील की तरफ़ जा रहा था जो ईरान पर प्रतिबंध लगाने के ख़िलाफ़ था जबकि असल में वे हमेशा से अमकीकी रुख़ की तरफ़ थे.

ख़ुफ़िया एजेंसी ने संयुक्त राष्ट्र में तब अमरीका की राजदूत सुज़ान राइस के हवाले से कहा है कि उन्होंने एनएसए के काम की प्रशंसा की थी. सुज़ान राइस ने कहा था, ‘इससे मुझे सच्चाई जानने में मदद मिली और प्रतिबंधों को लेकर दूसरे देशों की स्थिति का पता चला और हम बातचीत के दौरान एक क़दम आगे रह पाए.’

करोड़ों फ़ोन कॉल्स पर नज़र

सोमवार को ली मोंद ने आरोप लगाया था कि एनएसए ने 10 दिसंबर 2012 से आठ जनवरी 2013 के बीच फ़्रांस में 7 करोड़ तीन लाख फ़ोन कॉल की निगरानी की.

अमरीकी विदेश मंत्री के साथ बैठक में मंगलवार को फ़्रांस के विदेश मंत्री लॉरें फ़ेबियस ने इस पर सफ़ाई मांगी.

फ़्रांस और अमरीकी राष्ट्रपतियों के बीच एक टेलीफ़ोन कॉल का हवाला लेते हुए फ़ेबियस ने पत्रकारों को बताया, ‘मैंने जॉन कैरी से फिर वही कहा जो फ़्रांसुआं ओलांद ने बराक ओबामा को बताया था कि इस तरह अपने सहयोगियों की बड़े पैमाने पर जासूसी कतई मंज़ूर नहीं है.’

एनएसए के पूर्व कर्मचारी स्नोडेन ने अमरीका के ख़ुफ़िया कार्यक्रम के बारे में जून में खुलासा किया था. इस जानकारी में कहा गया था कि एनएसए और सीआईए दुनियाभर में बड़े पैमाने पर जासूसी में संलग्न है. इनमें चीन और रूस जैसे विरोधियों के अलावा सहयोगी यूरोपियन यूनियन और ब्राज़ील भी शामिल हैं. इसके बाद एनएसए ने कुबूल किया था कि उसने लाखों अमरीकियों के ईमेल और फ़ोन डेटा को हासिल किया था.

स्नोडेन फिलहाल रूस में हैं जहां उन्हें शरण मांगने के एवज़ में एक साल का वीज़ा दिया गया है. अमरीका उनके ख़िलाफ़ आपराधिक आरोपों में मुक़दमा चलाना चाहता है.

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