'लोकल कमांडर करेंगे हॉटलाइन से बात'

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चीन के प्रीमियर ली कचियांग और भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कुल नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. इनमें एक समझौता सीमा पर सैनिकों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाने का है. हालांकि यात्रा में स्टेपल्ड वीज़ा को लेकर कोई समझौता नहीं हो पाया.

बीबीसी ने बीजिंग में हुई पत्रकार वार्ता के दौरान मौजूद रहे टाइम्स ऑफ इंडिया के संवाददाता सैबल दास गुप्ता से बात की. सैबल दास गुप्ता ने बताया कि ज़्यादा प्रगति सीमा पर चल रहे विवादों के निपटारे को लेकर हुई है. इस पत्रकार वार्ता को विदेश सचिव सुजाता सिंह ने संबोधित किया था.

सैबल दास गुप्ता के मुताबिक़, ‘सीमा पर जो विवाद है उसके बारे में कहा गया है कि दोनों देशों के सैनिक पेट्रोलिंग के दौरान एक-दूसरे का पीछा नहीं करेंगे क्योंकि पीछा करने पर ही विवाद होता है.’

सीमा पर हॉटलाइन

उन्होंने कहा, ‘दूसरी बात यह कही गई है कि स्थानीय कमांडर एक-दूसरे से हॉटलाइन पर बात करेंगे. इसके लिए हॉटलाइन स्थापित की जाएगी. यह ज़रूरी नहीं है कि हर छोटे मामले के लिए दोनों तरफ़ के रक्षा विभागों और मंत्रालयों में बात की जाए क्योंकि इसमें वक़्त लगता है.’

सीमा मामलों के अलावा बड़ा मुद्दा ब्रह्मपुत्र के पानी को लेकर था. सैबल दास गुप्ता के मुताबिक़, ‘ब्रह्मपुत्र पर बांध की भारत की आशंका को देखते हुए समझौता हुआ कि भारत की चिंता के बारे में चीन अध्ययन करेगा और दोनों देशों के बीच उस पर बात होगी. इसके साथ ही ब्रह्मपुत्र में बाढ़ आएगी या नहीं, इसके आंकड़े चीन भारत के साथ साझा करेगा.’

मॉडर्न स्टेशन

बीजिंग से सैबल दास गुप्ता ने बताया, ‘दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार को लेकर बहुत सी बातें कही गईं मगर इस पर कोई समझौता नहीं हुआ है. भारत की चिंता रही है कि चीनी सामान का भारत में आयात ज़्यादा है और निर्यात कम होता है. इस पर चीन का कहना था कि वे भी चिंतित हैं कि इसे बढ़ाया जाए. भारत में चीन कुछ और बेचने की कोशिश कर रहा है, ख़ासकर रेलवे का सामान . भारत चाहता है कि चीन को वह अपने दो रेलवे स्टेशन मॉडल के रूप में दे जिनका वो आधुनिकीकरण करेगा. यह एक अनोखा प्रयोग होगा.’

राजनीतिक तौर पर दोनों देशों के संबंध एक नए चरण की तरफ़ जा रहे हैं. दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने कहा कि जब दुनिया की एक तिहाई आबादी वाले भारत और चीन हाथ मिलाएंगे हैं, तो दुनिया दिल थामकर देखेगी और सारी दुनिया में परिवर्तन आएगा.

अनोखा निमंत्रण

सैबल दास गुप्ता के मुताबिक़, ‘पहली बार ऐसा हो रहा है कि चीन के पूर्व प्रीमियर वेन जियाबाओ ने भारत के प्रधानमंत्री को खाने पर बुलाया है. यह अनोखी बात है क्योंकि ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया. चीन में जो सेवानिवृत्त प्रीमियर होते हैं, वे कभी पब्लिक लाइफ़ में सामने नहीं आते और किसी विदेशी से नहीं मिलते क्योंकि कम्युनिस्ट पार्टी में इसे विवादित माना जाता है. ये सेवानिवृत्त नेता एकदम लुप्त हो जाते हैं. मगर पहली बार दोनों के बीच पुरानी दोस्ती के कारण ऐसा हो रहा है कि मनमोहन सिंह को वेन ज़ियाबाओ ने आज खाने पर आमंत्रित किया है. मनमोहन सिंह ने भी कहा था कि वे उनसे मिलना चाहते हैं.’

सैबल के मुताबिक़, ‘गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के एक स्कूल का दौरा भी करेंगे. ख़ास बात यह है कि यह कम्युनिस्ट पार्टी का स्कूल है, जो सिर्फ़ नाम का ही स्कूल है. असल में यह यूनिवर्सिटी से भी बड़ा है और देशभर में इसके दो हजार कैंपस हैं. इसमें कम्युनिस्ट पार्टी के 80 करोड़ कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाता है. इस स्कूल में जाना बहुत बड़ा सम्मान माना जाता है. इस स्कूल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सीधे कम्युनिस्ट पार्टी के काडर के लोगों से बात करेंगे.’

'मनमोहन के लिए अहम'

उधर, विदेश मामलों के जानकार हर्ष पंत इस यात्रा को समझौतों के लिहाज़ से महत्वपूर्ण नहीं मानते.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री के इस दौरे में ऐसा कुछ सामने नहीं आया कि उसे अहम माना जाए. हां, मनमोहन सिंह के लिए यह अहम हो सकता है क्योंकि उनकी विरासत का मुद्दा है और यह उनका आख़िरी दौरा होगा. उसके मद्देनज़र यह ख़ास है.’

सवाल यह है कि जब कोई ठोस प्रगति नहीं होनी थी तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यात्रा क्यों आयोजित की गई.

इस पर हर्ष पंत कहते हैं, ‘अहम मुद्दा यह था कि सीमा पर हालात काफ़ी जटिल हो गए थे और पिछले कुछ महीनों में ख़ासकर अप्रैल में सीमा पर जो समस्या पैदा हुई थी. उससे दोनों देशों के संबंध खराब हो गए थे. उसे देखते हुए आशा थी कि किसी तरह सीमा पर कोई व्यवस्था हो. इसलिए सीमा सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर जो क़रार किया गया है, वो अहम है, पर इसमें ऐसा कुछ नहीं है कि यह हालात को बदल देगा. ऐसा कुछ नहीं किया गया है जो सीमा को शांतिपूर्ण बनाए. इसलिए जो समस्या है, वह चलती रहेगी.’

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