भारत-चीन रिश्ते से अमरीकी प्रभाव कम होगा?

चीन में मनमोहन सिंह

चीन के अख़बारों ने भारत और चीन के बीच हुए रक्षा सौदे को मील का पत्थर करार दिया है. साथ ही कहा है कि इससे क्षेत्रीय अखंडता को भी बढ़ावा मिलेगा.

चायना डेली ने कहा, "चीन और भारत ने बुधवार को सीमा सुरक्षा सहयोग पर समझौता करके और क्षेत्रीय अखंडता को बढ़ावा देने के लिए उपाय करके अपने संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम बढ़ाया."

ग्लोबल टाइम्स ने कहा, "इस युग में एशिया वैश्विक मामलों का केंद्रबिंदु बन रहा है और भारत और चीन दोनों ही अधिक शक्तिशाली हैसियत बनाने की इच्छा से आगे बढ़ रहे हैं. ऐसे में दोनों में से कोई भी पक्ष अपने दरवाज़े पर एक ताक़तवर दुश्मन को बर्दाश्त नहीं कर सकता है."

चीनी विश्लेषकों का भी मानना है कि दोनों देशों के संबंधों में हुई इस नई प्रगति से इस क्षेत्र में अमरीका का प्रभाव सीमित हो जाएगा.

अमरीकी प्रभाव में कमी

चायना फॉरेन अफेयर्स यूनिवर्सिटी के एशिया-पैसिफिक रिसर्च सेंटर (एशिया-प्रशांत शोध केंद्र) के निदेशक सू हाओ ने ग्लोबल टाइम्स से कहा, "एशिया में अमरीका की रणनीतिक धुरी ने चीन पर दवाब बना दिया था और उसके पड़ोसी क्षेत्र में समस्याएं पैदा की थी. चीन को अपने पड़ोस का माहौल स्थिर करना है और पड़ोसी देशों, ख़ासकर ताक़तवर पड़ोसियों से रिश्ते बेहतर करने हैं."

वे कहते हैं, "जहाँ तक भारत का सवाल है, अमरीका उसे अपने पक्ष में करना चाहता है और वो प्रशांत महासागर से हिंद महासागर तक एक रणनीतिक अंचल बनाने की कोशिश कर रहा है. भारत एक स्वतंत्र शक्तिशाली देश है और चीन और भारत के बीच मजबूत होते रिश्ते अमरीका के दवाब को कम करेंगे और अमरीकी पकड़ को भी सीमित करेंगे."

हालाँकि हांगकांग का 'साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट' लिखता है कि यह समझौता लंबे वक्त तक नहीं चल पाएगा.

अख़बार लिखता है, 'हालाँकि ली कचियांग और डॉ. मनमोहन सिंह की बीजिंग में हुई मुलाक़ात के बाद हुआ समझौता दशकों पुराने गतिरोध को समाप्त करने का कोई दीर्घकालिक उपाय नहीं है, ये एशिया की दो शक्तियों के बीच युद्ध की संभावनाओं को रोकने के लिए एक व्यावहारिक प्रोटोकॉल का काम ज़रूर करेगा.'

बीजिंग समर्थिक हांगकांग का अख़बार 'ता कुंग पाओ' लिखता है, "भारतीय राजनेता के चीन में हुए जोरदार स्वागत के तीन कूटनीतिक अर्थ निकलते हैं. सबसे पहले यह दर्शाता है कि चीन भारत के साथ अपने रिश्तों को बहुत ज़्यादा तवज्ज़ो देता है, दूसरी ओर यह चीन की अपने शीर्ष अधिकारियों की भारत के बारे में जानकारी बढ़ाने की मजबूत इच्छा को दर्शाता है. साथ ही मनमोहन सिंह का भाषण और हाल ही में केंद्रीय पार्टी स्कूल की गतिविधियों की श्रृंखला में भी पार्टी के तहत इस उच्च शिक्षा संस्थान के प्रति अधिक खुले रवैए को दर्शाता है."

गिरफ़्तारी

अगर बात चीन के स्थानीय अख़ाबरों की हो, तो कुछ अख़बार ग्वाँगज़ो के एक पत्रकार की गिरफ़्तारी की आलोचना कर रहे हैं. हन्नान प्रांत में पुलिस ने पुष्टि की है कि न्यू एक्सप्रेस अख़बार के पत्रकार चेन यांगझाऊ को व्यापार को नुकसान पहुँचाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है.

न्यू एक्सप्रेस ने गुरुवार को भी दूसरी बार अपने फ्रंट पेज पत्रकार की गिरफ़्तारी पर सवाल उठाए हैं.

द बीजिंग न्यूज़ की टिप्पणी है, 'यह तथ्य कि पुलिस ने पत्रकार को सिर्फ़ उसकी रिपोर्टिंग के आधार पर गिरफ़्तार कर लिया, देश के आपराधनिक क़ानून के सिद्धांतों का उल्लंघन है.'

सदर्न मेट्रोपॉलिस डेली ने लिखा है, 'आपराधिक हिरासत और गिरफ़्तारी का दुरुपयोग हुआ है और धीरे धीरे यह षडयंत्र में फँसाने का ज़रिया बनता जा रहा है. आपराधिक हिरासत को मानसिक दवाब बनाकर जाँच के लिए अधिक समय पाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है. '

चुटकुला

वहीं एक अमरीकी कॉमेडियन जिमी किमेल के टॉक शो पर एक बच्चे की टिप्पणी की चीन में इंटरनेट पर तीखी आलोचना की जा रही है. ग्लोबल टाइम्स कहता है, "इस शो में एक बच्चे ने राय दी थी कि, 'सभी चीनी नागरिकों को मारकर' अमरीकी कर्ज़ संकट ख़त्म किया जा सकता है."

अखबार आगे लिखता है, 'वीडियो क्लिप में किमेल पूछते हैं कि चीन के अमरीका पर 1.3 ट्रिलियन डॉलर कर्ज़ का क्या किया जाए, इस पर एक बच्चा कहता है कि चीन के सभी नागरिकों के मार दिया जाए ताकि अमरीका को यह कर्ज़ न चुकाना पड़े. बच्चे के इस जवाब पर किमेल कहते हैं यह एक मजेदार विचार है और दूसरे बच्चों से जवाब पूछने लगते हैं.'

इस क्लिप को चीनी ऑनलाइन जगत में खूब शेयर किया जा रहा है. आलोचक इसे जातीय भेदभाव की संज्ञा दे रहे हैं. अख़बार कहता है कि एक ऑनलाइन अपील याचिका शुरू कर दी गई है ताकि ओबामा प्रशासन इसका संज्ञान ले और जाँच कराए.

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