एयरलाइन के साथ भरी विश्वास की उड़ान

Image caption बीरेन्द्र बहादुर बासनेत, मालिक, बुद्धा एयरलाइन

कोई व्यक्ति उद्योगपति कैसे बनता है?

यह बात बीबीसी संवाददाता सुरेन्द्र फुयाल को बीरेन्द्र बहादुर बासनेत से पता चली, जो नेपाल में एक निजी एयरलाइन के मालिक हैं.

बीरेन्द्र ने बताया की उन्होंने अपना बिज़नेस शुरू करने के लिए क्या-क्या जोखिम उठाए और उन्हें क्यों इस बात पर विश्वास है कि सफलता हासिल की जा सकती है.

बीरेन्द्र बिजनेस परिवार से कोई ताल्लुक नहीं रखते हैं. उनके पिता सेवानिवृत्त जज हैं और दादा-पड़दादा पूर्वी नेपाल में किसान हुआ करते थे. जबकि 49 वर्षीय बीरेन्द्र आज नेपाल के सबसे सफल उद्यमियों में से एक हैं.

यह उनका नजरिया ही था जिसकी वजह से कुछ सालों में ही उन्होंने देश के खस्ताहाल उड्डयन क्षेत्र में कदम रखा. काठमांडू यूनिवर्सिटी से बिजनेस ग्रेजुएट बीरेन्द्र ने जब 1996 में अपनी एयरलाइन "बुद्धा" रजिस्टर करवाई, तब उनके पास केवल एक ही अमरीका निर्मित विमान बीचक्राफ्ट 1900डी हुआ करता था, जो उन्होंने ऋण पर लिया था.

जबकि आज करीब दो दशक बाद बीरेन्द्र नौ विमानों के मालिक हैं. इनमें तीन बीचक्राफ्ट, तीन एटीआर 42-320 और तीन एटीआर 72-500 विमान शामिल हैं. इसके चलते बुद्धा एयरलाइन के विमानों का बेड़ा नेपाल की घरेलू एयरलाइनों में सबसे बड़ा है.

अपने अऩुभवों का जिक्र करते बीरेन्द्र मुस्कुराते हुए बताते हैं, " वर्ष 1996 में जब हमने अपना बिज़नेस शुरू करने और विमान खरीदने के लिए सात करोड़ नेपाली रुपयों (7,08,000 डॉलर) का ऋण लिया तो हमारे मित्रों, रिश्तेदाारों और दूसरे लोगों ने कहा कि हम पागल हो गए हैं लेकिन हमने उड्डयन क्षेत्र में अच्छा काम करना शुरू किया और छह वर्ष के बाद ही अपना ऋण चुकता कर दिया."

बीरेन्द्र बताते हैं कि उसके बाद से उनका एयरलाइन का बिजनेस दस गुना बढ़ा है. उन्होंने बताया, "जब हमने शुरूआत की उस समय नेपाल की सरकारी एयरलाइन रॉयल नेपाल एयरलाइन कोई खास सफल एयरलाइनों में नहीं थी. देश का नया उदार घरेलू उड्डयन क्षेत्र भी निजी क्षेत्र की कंपनियों की ओर उम्मीद की नजर से देख रहा था."

बीरेन्द्र ने कहा, "हमने मौका देखा और उसका फायदा उठाया. बाजार में प्रतियोगिता काफी अधिक थी लेकिन सुरक्षा, विश्वास और आराम हमारा मंत्र था, इसके चलते हम अपने उपभोक्ताओं का विश्वास जीतने में कामयाब रहे. इसके बाद हम अपने विमानों के बेड़े में एक के बाद एक विमान जोड़ते गए."

दुखद अनुभव

हालांकि, बीरेन्द्र की सफलता का रास्ता उतना भी आसान नहीं रहा. उनके बिजनेस को सितंबर 2011 को धक्का लगा जब, उनकी एयरलाइन का एक बीचक्राफ्ट काठमांडू के पास पहाड़ी पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इसमें 19 लोग मारे गए.

इस बारे में बीरेन्द्र बताते हैं "हमें लगा की हम अजेय हैं, लेकिन इस दुर्घटना ने साबित कर दिया कि ऐसा नहीं था. भरी आंखों से उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना में हमने अपने तीन साथी, कई अन्य लोग और अपना विमान खो दिया." अब तक का यह सबसे दुखद अनुभव था, लेकिन इसने हमें आगे बढ़ने में मदद की.

उन्होंने बताया, "इस दुर्घटना के बाद हमारी एयरलाइन ने इसकी उड़ान सुरक्षा तंत्र प्रणाली की समीक्षा की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बुद्धा एयर के सुरक्षा पैमाने खामी रहित हैं."

आगे ही आगे

हर सुबह बुद्धा एयर की दर्जनों उड़ानें विदेशी पर्यटकों को माउंट एवरेस्ट की झलक दिखाने ले जाती हैं. संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव भी उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने 2001 में नेपाल के अपने दौरे के समय बुद्धा एयर से माउंट एवरेस्ट के नजारे लिए थे. आज यह एयरलाइन नेपाल के प्रमुख शहरों के साथ भारत के वाराणसी को काठमांडू से जोड़ती है.

बीरेन्द्र कहते हैं, "नेपाल के बाहर उड़ान भरने वाली हमारी पहली एयरलाइन है." भविष्य में उनकी योजना बुद्धा एयर को एशिया प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख शहरों में ले जाने की है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार