'ड्रोन हमलों को पाकिस्तान की सहमति थी'

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ख़ुफ़िया अमरीकी दस्तावेज़ों से पता चला है कि पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को वर्षों से सीआईए के ड्रोन हमलों के बारे में पता था और उन्होंने इसकी हिमायत भी की थी.

अमरीकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट को अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए और पाकिस्तान के राजनयिक मेमो हाथ लगे हैं जिनसे पता चलता है कि अधिकारियों को इस बारे में नियमित तौर पर गोपनीय जानकारी दी जाती थी.

विश्लेषक पहले भी इस बात का ज़िक्र करते रहे हैं कि पाकिस्तान ने भले ही सार्वजनिक तौर पर इन हमलों की आलोचना की हो मगर गुपचुप ढंग से उसने इन हमलों की इजाज़त दी थी.

अपनी वॉशिंगटन यात्रा में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाक़ात के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा, “मैंने बातचीत के दौरान ड्रोन हमलों की बात उठाई और इस बात पर ज़ोर दिया कि ये हमले बंद होने चाहिए.”

पाकिस्तान में जारी अमरीकी ड्रोन हमले को लेकर जनता के बीच भारी नाराज़गी रही जो इसे मुल्क की संप्रभुता में दखलअंदाज़ी के तौर पर देखती है.

दो दिनों पहले ही एमनेस्टी इंटनेशनल ने भी अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि हमलों में कई दफा वे लोग मारे गए जिनका चरमपंथ से कोई ताल्लुक़ नहीं था, न ही हुकूमत को उनसे किसी तरह का ख़तरा था.

गुप्त समझौता

पाकिस्तान की सरकार ने अमरीकी अख़बार में छपी रिपोर्ट पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी है.

संवाददाताओं का कहना है कि ये दस्तावेज़ दोनों मुल्कों के बीच एक गुप्त समझौते की तरफ़ इशारा करते हैं. ये शायद तबसे जारी थे जब ड्रोन हमलों के बारे में स्वीकारा भी नहीं गया था.

ख़ुफ़िया दस्तावेज़ों को प्रकाशित करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स ने साल 2010 में कुछ ऐसे दस्तावेज़ छापे थे जिनमें कहा गया था कि पाकिस्तानी हुकूमत इस मामले में अमरीका के दबाव में आ गई थी हालांकि वो जनता के सामने इसकी निंदा करती रही.

हाल में आई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में हुए ड्रोन हमलों में कम से कम 400 शहरियों की मौत हुई है.

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