ट्यूनीशिया में सेक्स जिहाद, कितना सच-कितना झूठ

  • 27 अक्तूबर 2013
ट्यूनीशिया

जब ट्यूनीशिया के अधिकारियों ने कहा था कि बहुत सी ट्यूनिशियाई युवा लड़कियाँ अपना घर छोड़कर सीरिया में लड़ाई में हिस्सा ले रहे विद्रोहियों के सेक्स सेवाएं देने पहुँच रही हैं तब बहुत से लोग इस बयान से चौंक गए थे और इसे अविश्वास से देखा गया था.

बीबीसी के अहमद महर ट्यूनीशिया गए और पूरे मामले की पड़ताल की

कई महीनों से विश्व मीडिया द्वारा 'सेक्स जिहाद' बताए गए इस मामले के बारे में कई तरह की अफ़वाहें आती रहीं लेकिन यह किस स्तर पर हो रहा है और सीरिया में जारी विद्रोह से इसके क्या संबंध हैं, ये रहस्यमयी ही रहा.

इस कहानी की जड़ अलजीरिया की सीमा से सटे ट्यूनीशिया के पश्चिमी केंद्रीय क्षेत्र जबल अल चांबी (चांबी पर्वत श्रंखला) में हैं.

दिसंबर 2012 के बाद से इस पहाड़ी क्षेत्र में ट्यूनीशिया की सेना और अल कायदा के चरमपंथियों के बीच कई बार भीषण मुठभेड़ें हुई हैं.

यहाँ के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने इस क्षेत्र से कई ऐसी महिलाओं और लड़कियों को गिरफ़्तार किया है जो लड़ाई में हिस्सा ले रहे जिहादियों को सेक्स सेवाएं देकर उनका उत्साह बढ़ाने के अभियान में जुटी थी.

अधिकारियों के इस बयान को ट्यूनीशिया में अविश्वास से देखा गया और इससे हिरासत में ली गई लड़कियों के परिवार को झटका भी लगा.

Image caption सेक्स जेहाद के आरोप में गिरफ़्तार की गई एक लड़की का परिवार उसे बेगुनाह मानता हैं.

राजधानी ट्यूनिस से करीब चार घंटे की दूरी पर चांबी के नज़दीक स्थिद कसरीन शहर में मैं हिरासत में ली गई ऐसी ही एक लड़की के परिवार से मिला.

उनकी माँ का कहना है कि उनकी 17 वर्षीय बेटी उन 19 महिलाओं में शामिल है जिन्हें इस छोटे से शहर में ही पिछले दो महीनें के भीतर गिरफ़्तार गिया गया है.

वे मानती हैं कि उनकी बेटी बेगुनाह है. वे इसलिए भी चिंतित हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी बेटी को मानसिक रोग भी हैं और उसे व्यस्कों के साथ रखा गया है जबकि वे नाबालिग है.

वे कहती हैं, 'वो कभी भी चांबी पर्वतों पर नहीं गई. वो बेहद धार्मिक थी और सिर्फ़ मस्जिद में जाती थी.' अपनी पहचान ज़ाहिर न करने का आग्रह करते हुए उसकी माँ ने कहा, 'यह हमारे रूढ़िवादी समाज में एक बेहद संवेदनशील मसला है.'

बेगुनाह

वे कहती हैं, 'वो अपने पूरे बदन को बुर्के में ढक कर रखती थी. मेरी नज़र में यह पवित्रता है, कट्टरता नहीं.'

उन्होंने बताया कि उनकी बेटी अल-तवा मस्जिद जाती थी और उसे वहीं से गिरफ़्तार किया गया था.

वे कहती हैं, 'हो सकता है कट्टरपंथियों ने उसके विचार बदल दिए हों, मैं नहीं जानती. मैं गृह मंत्रालय से आग्रह करती हूँ कि उसे रिहा कर दें, उसे बेहोशी के दौरे पड़ते हैं.'

कई महीनों तक सेक्स जिहाद के बारे में अफ़वाहें थी लेकिन यह किस स्तर पर चल रहा है और सीरिया में जारी विद्रोह से इसके क्या संबंध हैं, यह साफ़ नहीं हो पाया था.

यह विवाद सितंबर में उस वक़्त फिर से ताज़ा हो गया था जब ग़ह मंत्री लोफ़्ती बिन जिदो ने कहा था कि महिलाएँ और लड़कियाँ ट्यूनीशिया के दूरस्थ इलाक़ों और सीरिया में जाकर जिहादियों को सेवाएं दे रही हैं.

उन्होंने विशेषतौर पर सीरिया का ज़िक्र किया था. ट्यूनीशिया की राष्ट्रीय संविधान सभा में उन्होंने कहा था, 'ट्यूनीशिया की लड़कियाँ सेक्स जिहाद के नाम पर 20, 30 यहाँ तक कि सौ-सौ विद्रोहियों के साथ हमबिस्तर हो रही हैं और सेक्स संबंधों के फल लेकर वापस लौट रही हैं और हम खामोश हैं और कुछ भी नहीं कर रहे हैं.'

राजनीतिक प्रोपागेंडा

आलोचकों ने इन बयानों को ग़लत बयानी और राजनीतिक प्रोपागेंडा बताकर खारिज कर दिया था.

रेडियो प्रसारणकर्ता ज़ुहीर एलिजिस मानते हैं कि इसका उद्देश्य यह दर्शाना है कि सत्ताधारी इस्लामी अनहदा पार्टी कट्टरपंथ को नज़रअंदाज़ कर रही है.

वे कहते हैं, 'गृहमंत्री ने ही कोई आंकड़े दिए और न ही अपने दावों का कोई सबूत पेश किया.'

'उन्होंने एक विवाद को जन्म दे दिया है, ऐसा लग रहा है कि ये एक बड़ा मुद्दा है. वे अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए जाने जाते रहे हैं लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि वे दो विरोधी पार्टियों के बीच चल रहे खेल में फँस गए हैं.'

हमने गृहमंत्रालय से हिरासत में ली गईं लड़कियों से मुलाक़ात करने की इजाज़त माँगी जो हमें नहीं मिली. लेकिन मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद अली अल अरावी ने कहा कि उनके पास सबूत और क़बूलनामें हैं जिन्हें अदालत में पेश किया जाएगा.

वे कहते हैं, 'सबूत फ़ेसबुक पन्नों, इंटरसेप्ट की गईं फ़ोन कॉल और ख़ुफ़िया जानकारियों के आधार पर हैं. हमारे पास क़बूलनामें भी हैं, लेकिन हम लड़कियों की पहचान ज़ाहिर नहीं कर सकते क्योंकि यह हमारे समाज में एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है.'

अप्रैल में ट्यूनीशिया के सबसे बड़े धर्मगुरु मुफ़्ती ओमान बतीख़ ने यह कहकर विवाद पैदा कर दिया था कि ट्यूनीशिया की लड़कियाँ सीरिया जाकर सेक्स जिहाद में हिस्सा ले रही हैं.

तीन महीने बाद उन्हें राष्ट्रपति मुनसिफ़ मरज़ोक ने निलंबित कर दिया था. वे कहते हैं कि यह मुँह खोलने की सजा थी.

Image caption शेख़ फ़रीद ऐसे परिवारों को जानते हैं जिनकी लड़कियों ने सेक्स जेहाद में हिस्सा लिया.

ट्यूनीशिया के अन्य प्रमुख धार्मिक विद्वान शेख़ फ़रीद अलबाजी ने बीबीसी को बताया कि वे व्यक्तिगत तौर पर ऐसे परिवारों को जानते हैं जिन्हें यह पता चला था कि उनकी लड़कियों ने चांबी पर्वतों और सीरिया जाकर सेक्स जिहाद में हिस्सा लिया. जाहिरा तौर पर सीरिया विद्रोह पर जारी किए गए फ़तवे के बाद लड़कियों ने ऐसा किया.

स्वैच्छिक वेश्यावृत्ति

'ये चरमपंथी अपने दुर्भावनापूर्ण फ़तवे का आधार यह बताते हैं कि ज़रूरत हराम चीज़ों की भी अनुमति देती है. इस मामले में विद्रोहियों की शारीरिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अस्थायी विवाहों की अनुमति दी गई. इस्लाम स्वैच्छिक वेश्यावृत्ति के बराबर की इस तरह के अमल की मनाही है.'

ट्यूनीशिया के धर्मनिरपेक्ष और उदार समाज के लिए सेक्स जिहाद का विचार एक झटके की तरह है. ज़्यादातर लोग इसे राजनीति से प्रेरित झूठ बताकर खारिज करते हैं.

लेकिन वे लोग जो देश में बड़ रहे कट्टरपंथ से चिंतित हैं मानते हैं कि इसकी संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता.

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