अमरीका में इंटरनेट इतना महंगा क्यों है?

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दुनिया के किसी और देश की तुलना में अमरीकी लोगों को ब्रॉडबैंड के लिए ज़्यादा रकम चुकानी पड़ती है. अमरीका में हाई स्पीड ब्रॉडबैंड ब्रिटेन की तुलना में तीन गुना और दक्षिण कोरिया की तुलना में पांच गुना महंगा है. आखिर ऐसा क्यों है?

'न्यू अमरीका फ़ाउंडेशन' के मुताबिक अमरीकी शहरों में ब्रॉडबैंड, टीवी और फ़ोन पैकेज किसी और जगह के मुकाबले ज़्यादा महंगे हैं. न्यू अमरीका फ़ाउंडेशन ने दुनिया भर में उपलब्ध सैकड़ों ब्रॉडबैंड बंडल की तुलना की.

थोड़ी अच्छी डाउनलोड स्पीड की बात करें तो इसकी कीमत सैन फ़्रांसिस्को में 99 डॉलर यानी करीब 6,000 रुपए है, न्यूयॉर्क में 70 डॉलर यानी करीब 4,300 रुपए और वॉशिंगटन में 68 डॉलर यानी करीब 4,200 रुपए है.

वहीं लंदन में इसके लिए 38 डॉलर यानी 2350 रुपए, पेरिस में 35 डॉलर यानी करीब 2150 रुपए और सोल में 15 डॉलर यानी 930 रुपए ही चुकाने पड़ते हैं.

इस तरह की कुछ बातें आर्थिक सहयोग संगठन (ओईसीडी) के एक शोध में भी सामने आई थी. ओईसीडी ने अलग-अलग देशों की तुलना ब्रॉडबैंड की कीमत को लेकर की थी. डाउनलोड स्पीड और क्षमता में अमरीका को सबसे नीचे जगह मिली.

'विकल्प की कमी'

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पूर्व सलाहकार सुज़ैन क्राफ़र्ड कहती हैं कि अमरीकियों को इतनी ज़्यादा रकम चुकानी होती है क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं है.

हालांकि अमरीका में कई बड़ी कंपनियां हैं लेकिन स्थानीय बाज़ारों पर सिर्फ़ एक-दो प्रमुख कंपनियों का ही कब्ज़ा है.

सुज़ैन कहती हैं कि दो तिहाई लोगों को ब्रॉडबैंड उनके टेलीविज़न केबल के ज़रिए मिलता है क्योंकि फ़ोन कंपनियां जिन डिजिटल सब्स्क्राइबर लाइन के ज़रिए ब्रॉडबैंड सेवा देती हैं वो केबल की रफ़्तार से होड़ नहीं कर सकती. वहीं वायरलेस और सेटेलाइट सेवाओं में डाटा डाउनलोड की सीमा तय है.

सैन फ़्रांसिस्को में ब्रॉडबैंड का ख़र्च थोड़ा ज़्यादा लगता है.

मिच इवांस इंटरनेट, टीवी और फ़ोन कॉल के लिए हर महीने 200 डॉलर यानी करीब 12,000 रुपए देते हैं.

वो कहते हैं, "मुझे लगता है कि मैं 23 साल तक इस इलाके में रहने के बाद इसका आदी हो गया हूं."

प्रतियोगिता अच्छी या बुरी?

Image caption ब्रिटेन में अलग-अलग जगहों पर ब्रॉडबैंड की स्पीड अलग-अलग है.

अमरीका के दूसरे शहरों में कुछ विकल्प उपलब्ध हैं.

कैंसस में गूगल हर महीने 70 डॉलर चुकाने के बदले एक जीबी डेटा देती है. वहीं 300 डॉलर शुरुआत में ही देने पर सात साल तक पांच एमबीपीएस डाउनलोड स्पीड मुफ़्त मिलती है.

सुज़ैन क्राफ़र्ड के मुताबिक ब्रॉडबैंड की ऊंची कीमतों की वजह से एक तरह का डिजिटल विभाजन हो गया है, ग़रीब अमरीकियों को अच्छी गुणवत्ता का इंटरनेट संपर्क नहीं मिल पाता और इसका आर्थिक असर भी होता है.

वो कहती हैं, "2008 के बैंकिंग संकट से ये साफ़ दिखता है कि जब बैंकों को मनमर्ज़ी से काम करने की इजाज़त हो तो क्या होता है. ये संचार संकट दिखाई नहीं दे रहा लेकिन इससे वैश्विक स्तर पर अमरीका की क्षमता पर असर पड़ता है."

ब्रॉडबैंड की कीमतों को लेकर डॉक्यूमेंट्री बनाने वाले रिक कैर कहते हैं कि ब्रिटेन में कीमतें सस्ती हैं क्योंकि वहां टेलीकॉम नियामक संस्था ऑफ़कॉम ने ब्रिटिश टेलीकॉम को मजबूर किया कि वो दूसरी कंपनियों को अपने बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करने दे.

लेकिन अमरीका में बड़ी कंपनियों को अपने-अपने ढांचे बनाने और प्रतियोगिता करने के लिए प्रोत्साहित किया गया.

'तुलना करना मुश्किल'

लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि ब्रिटेन की तरह का नियंत्रण ग़लत है. और अमरीका ब्रॉडबैंड के क्षेत्र में अगुवा है.

अमरीकी केबल कंपनियों की संस्था एनसीटीए के ब्रायन डाइट्ज़ कहते हैं कि अमरीका में ब्रॉडबैंड की रफ़्तार दूसरे देशों जितनी ही अच्छी है. वो कहते हैं कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों की तुलना करना भी बहुत मुश्किल है.

केबल कंपनियों में प्रतियोगिता की समर्थक संस्था नेटकॉम्पिटीशन के चेयरमैन स्कॉट क्लीलैंड कहते हैं, “यूरोप में लोग अलग-अलग क्षमताओं को अलग-अलग कीमतों पर बेच रहे हैं लेकिन अमरीका अलग तकनीकों और विकल्पों, जैसे फ़ोन, केबल, वायरलेस को बढ़ावा देता है.”

उनका मानना है कि इस बारे में शिकायत करना कुछ ऐसा ही है कि आपके पास फ़ोर्ड, कैडिलैक्स तो है लेकिन रॉल्स-रॉयस नहीं है.

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