अमरीका ने जासूसी का बचाव किया

अमरीका के एक वरिष्ठ खुफ़िया अधिकारी ने एक संसदीय समिति से कहा है कि विदेशी नेताओं की नीयत को भाँपना अमरीका की जासूसी कार्यप्रणाली का प्रमुख लक्ष्य है.

राष्ट्रीय खुफ़िया विभाग के निदेशक जेम्स क्लैपर ने इन कोशिशों को अमरीकी खुफ़िया नीति के प्रमुख सिद्धांत के तौर पर उल्लेख किया है.

लेकिन उन्होंने संसद के खुफ़िया पैनल के सामने कहा कि अमरीका ने दूसरे देशों की अँधाधुंध तरीके से जासूसी नहीं की थी.

विदेशी साथियों की जासूसी संबंधी खबरों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुए विवादों पर क्लैपर प्रतिक्रिया दे रहे थे.

उनका कहना था, "हम लोग जो भी जानकारी इकट्ठा करते हैं और जिनका विश्लेषण करते हैं उनमें नेताओं की नीयत जानना एक प्रमुख हिस्सा होता है."

क्लैपर का ये भी कहना था कि विदेशी जासूस भी अमरीकी अधिकारियों और खुफ़िया एजेंसियों पर नियमित रूप से नज़र रखते हैं.

वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के निदेशक जनरल कीथ अलेक्जेंडर ने फ्रांस, स्पेन और इटली की मीडिया में आईं उन रिपोर्ट्स को पूरी तरह से गलत बताया है कि एनएसए ने करोड़ों टेलीफ़ोन कॉल्स के आँकड़े जुटाए हैं.

जनरल अलेक्जेंडर बोले, "फ्रांस के ले मोंदे, स्पेन के एल मुंडो और एल एस्प्रेसो कुछ स्क्रीन शॉट दिखाते हैं लेकिन इन स्क्रीन शॉट में दिखाई गई जानकारी डाटा मैनेजमेंट के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक वेब टूल है, यह ना इन पत्रकारों की समझ में आया न उसकी समझ में जिसने इन्हें चुराया."

गवाही

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अमरीकी जासूसी से संबंधित बड़े पैमाने पर छपने वाली खबरों के बाद संसद के सामने इन अधिकारियों की गवाही हुई.

जासूसी के बारे में तमाम जानकारियां पूर्व अमरीकी खुफ़िया अधिकारी एडवर्ड स्नोडेन के जरिए मिलीं.

जासूसी संबंधी रिपोर्टों की वजह से अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

एक टेलीविजन चैनल को दिए इंटरव्यू में बराक ओबामा ने कहा कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा गतिविधियों की एक बार फिर से समीक्षा किए जाने की जरूरत है.

जासूसी के मुद्दे को तब हवा मिली जब जर्मनी की चांसलर अंगेला मर्केल ने ये कहा कि उनके फ़ोन कॉल्स पर करीब एक दशक से निगरानी रखी जा रही है.

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