देखी है ड्रोन की ये रहस्यमय दुनिया?

  • 31 अक्तूबर 2013
ग्लोबल हॉक

ग्लोबल हॉक अमरीकी सेना के सबसे आधुनिक जासूसी विमानों में से एक है. बीबीसी को नॉर्थ डकोटा स्थित ग्रैंड फ़ोर्क्स एयरबेस में इस विमान की दुर्लभ झलक देखने को मिली.

यह विमान एक बार ईंधन भरने पर आधी दुनिया का चक्कर लगा सकता है और 18000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए बादल छाए होने के बावजूद ज़मीन में एक-एक व्यक्ति पर निगरानी रख सकता है.

ग्लोबल हॉक अंतरराष्ट्रीय वायु सीमा में रहकर सीरिया के रासायनिक हथियारों का पता लगा सकता है और प्रशांत महासागर में स्थित गुआम के ऊपर उड़ते हुए उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर नज़र रख सकता है.

ग्रैंड फ़ोर्क्स एयरबेस की कमान कर्नल लॉरेंस स्पिनैटा के हाथों में है. उनका कहना है कि हॉक हर दिन चौबीसों घंटे दुनियाभर में हर गतिविधि पर नज़र रखता है और नीति निर्माताओं को अहम जानकारी मुहैया कराता है. हालांकि उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया.

अमरीकी सेना ड्रोन विमानों को रिमोट पायलटेड एयरक्राफ्ट कहना पसंद करती है. इन विमानों का उपयोग बेहद विवादास्पद रहा है क्योंकि सीआईए अपने दुश्मनों को ठिकाने लगाने के लिए गुपचुप तरीक़े से सशस्त्र ड्रोन विमानों का इस्तेमाल कर रही है.

इस्तेमाल

देश में जिस तरह से निगरानी के लिए इन विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है उससे भी कई अमरीकी चिंतित है. 17 राज्यों ने क़ानून बनाकर ऐसे विमानों के उपयोग को सीमित कर दिया है.

लेकिन नॉर्थ डकोटा को इन विमानों से कोई दिक्क़त नहीं है क्योंकि राज्य में बस्तियां दूर-दूर बसी हैं और ख़ाली जगह बहुत ज्यादा है.

नॉर्थ डकोटा विश्वविद्यालय ड्रोन विमानों के संचालन के लिए पाठ्यक्रम शुरू करने वाला पहला अमरीकी विश्वविद्यालय है.

हालांकि ग्लोबल हॉक सशस्त्र विमान नहीं है लेकिन फिर भी इसके इस्तेमाल को लेकर रहस्य बरक़रार है. ग्रैंड फ़ोर्क्स एयरबेस में भी इस बात के कोई संकेत नहीं दिखते हैं कि अमरीकी सेना इस पर से पर्दा उठाने जा रही हैं.

जब हमें ग्लोबल हॉक के एक ठिकाने पर ले जाया गया तो हमें रिकॉर्डिंग उपकरण, कैमरे और फ़ोन ले जाने की अनुमति नहीं मिली.

वहां मौजूद अमरीकी वायु सेना के अधिकारियों ने अपनी पहचान गुप्त रखने के लिए नाम पट्टी भी हटा दी. यह जगह बाहर से शिपिंग कंटेनर लगती है. अंदर कई स्क्रीनें लगी हैं जो हमारे दौरे के समय बंद रखी गई थीं.

ऑपरेशंस रूम

ग्लोबल हॉक के मिशनों पर ऑपरेशंस रूम से नज़र रखी जाती है. इस कमरे पर एक भारी दरवाज़ा है और सुरक्षा कोड के बाद ही इसमें प्रवेश मिल सकता है.

एक पायलट डेस्क से सिमुलेटेड मिशन को अंजाम दे रहा है. हमें इसे देखने की अनुमति दी गई. हालांकि एक पायलट ने माना कि इसमें वो मज़ा नहीं है जो विमान उड़ाने में है.

चालकदल ने कहा कि वे घर और परिवार से साथ रहते हुए भी दुनियाभर में मिशनों को अंजाम दे सकते हैं. शायद यही कारण है कि पूरी तरह मिशन में तल्लीन होने के बावजूद पायलट वैसा जुड़ाव महसूस नहीं कर पाता जैसा कि उसे विमान में महसूस होता है.

लेकिन भविष्य इन चालकरहित विमानों का ही है. उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नेटो) गठबंधन सामान्यतः सैन्य साज़ोसामान नहीं ख़रीदता है लेकिन इसके सदस्यों ने मिलकर 1.7 अरब डॉलर की लागत में पांच ग्लोबल हॉक ख़रीदे हैं.

साल 2017 में ये विमान सिसिली के सिगोनेला से उड़ान भरेंगे और समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ ज़मीनी सेनाओं को भी मदद करेंगे.

इन विमानों के निर्माताओं का कहना है कि ड्रोन का मक़सद केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है.

मददगार

ग्लोबल हॉक कार्यक्रम में मदद करने वाले बॉब जीसर ने कहा कि यह विमान प्राकृतिक आपदाओं के बाद की स्थिति से निपटने में मददगार है.

2010 में हैती में आए भूकंप के बाद ऐसे एक विमान ने वहां उड़ान भरी थी और विनाश की व्यापकता की जानकारी दी थी. इससे राहत अभियान में भी मदद मिली थी. इस विमान ने कैलीफ़ॉर्निया से अपने मिशन को अंजाम दिया था और तीन बार हैती का सर्वेक्षण करने के बाद अपने अड्डे पर लौटा था.

हाल ही में एक ग्लोबल हॉक ने जापान में फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को हुए नुक़सान का जायज़ा लिया.

जीसर ने इस बात को स्वीकार किया कि जनता का दिल जीतना ड्रोन के लिए अब भी एक चुनौती है लेकिन इसके अच्छे पहलुओं को उजागर करके इसकी नकारात्मक छवि को दूर किया जा सकता है.

हालांकि नागरिक क्षेत्रों में ड्रोन की सुरक्षित उड़ान संचालित करने के बारे में अब भी कई सवाल हैं. सवाल यह भी है कि आसमान से झांकती आंखों की निगरानी में हम कैसा महसूस करते हैं.

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