क्या आप रहना चाहेंगे झोंपड़ी में?

हॉबिट, घर, इटली

दक्षिण इटली में इन दिनों लोगों की दिलचस्पी फार्महाउस या विला ख़रीदने में नहीं है. बल्कि लोगों की दिलचस्पी है पूर्व किसानों की पुरानी झोंपड़ी ख़रीदने में.

इसमें कोई शक नहीं कि ये झोंपड़ी बिलकुल लॉर्ड ऑफ़ द रिंग्स फ़िल्म के सेट पर पूरी तरह फिट होंगी.

इस तरह के तिकोनी छत वाले घर, जिन्हें ट्रुली कहते हैं, इटली के पुगलिया प्रांत की ख़ासियत हैं. दक्षिण इटली के वैली ऑफ़ इट्रिया को छोड़कर ऐसे घर कहीं और नहीं बनाए जाते. चूने के पत्थर वाले ये घर जितने जादुई लगते हैं उतने ही ऐतिहासिक भी हैं.

शुरुआत में इनमें सिर्फ़ जानवरों या औज़ारों को रखा जाता था. इनमें सीमेंट का इस्तेमाल नहीं होता, सिर्फ़ बड़े-बड़े चूने के पत्थर होते हैं जिन्हें शिएनकैरल कहा जाता है.

इन पत्थरों को इस तरह रखा जाता है कि अंदर पानी न टपके.

कहा जाता है कि 17वीं सदी में इटली के इस इलाके में नई इमारतें बनाने पर टैक्स लगता था. इसलिए स्थानीय लोग ट्रुली बना लेते थे ताकि जब जांच करने वाले कर्मचारी आएं तो इन्हें गिरा दिया जाए और जब वो चले जाएं तो इन्हें फिर बनाए जा सके.

'बढ़ रही है मांग'

संपत्ति के कारोबार में बिचौलिए का काम करने वाले एलेज़ैंड्रो मल्पिनानो बड़े उत्साह से ट्रुली की मांग फिर बढ़ने के बारे में बताते हैं.

ट्रुली की मांग सप्ताहांत गुज़ारने के लिए तब बढ़ी जब यूनेस्को ने साल 1996 में अल्बेरोबेलो के ट्रुली को विश्व धरोहर घोषित कर दिया.

मल्पिनानो बताते हैं, "इसके बाद बाज़ार में ज़बरदस्त उछाल आया", सबसे पहले जर्मन लोगों ने इन्हें ख़रीदना शुरू किया लेकिन वो सेंधमारी से तंग हो गए, फिर ब्रितानी लोगों ने इन्हें ख़रीदना शुरू किया.

मल्पिनानो कहते हैं, "लेकिन वो अब तक रुके हुए हैं और अब भी संपत्ति खरीद रहे हैं. बारी और ब्रिंडलिसी तक आने वाली सस्ती उड़ानों की वजह से वे आते रहते हैं."

ट्रुली को हर 100 से 150 साल में नए सिरे से बनाने की ज़रूरत पड़ती है. एक छतरी को बनाने में एक महीना लगता है और करीब 12,700 पाउंड यानी करीब 13 लाख रुपए की लागत आती है.

मल्पिनानो बताते हैं, "ट्रुली को दोबारा बनाने वाले ट्रुलारो कहलाते हैं."

Image caption डे'रिको कहते हैं कि पहले ट्रुली को ग़रीबों के घरों के तौर पर देखा जाता था.

अगली सुबह मैं जियोवानी डे'रिको की तलाश में निकलता हूं और मुझे वो एक ट्रुलो बनाते हुए मिलते हैं.

'अवैध निर्माण भी समस्या'

ख़ास बात ये है कि डे'रिको बहुत हद तक किसी हॉबिट के जैसे दिखते हैं.

वो कहते हैं, "जब मैं छोटा था तब ये खंडहर होते थे. लोग इन्हें ग़रीबों के घर के तौर पर देखते थे."

डे'रिको बताते हैं, "मंदी और भारी करों की वजह से भले ही इस कारोबार पर असर पड़ा हो लेकिन हमारा काम बढ़ रहा है. मुझे बहुत पैसे नहीं मिलते लेकिन ये काम मुझे पसंद है."

एक और ट्रुलारो, ग्यूसेप मिकोलिस, कहते हैं, "समस्या ये है कि बगैर किसी प्रशिक्षण या योग्यता के कोई भी ख़ुद को ट्रुलारो बता देता है."

मिकोलिस कहते हैं, "सिर्फ़ अप्रशिक्षित ट्रुलारी से ही समस्या नहीं है बल्कि लोग भी इलाके का सम्मान किए बगैर अवैध रूप से ट्रुली बना देते हैं."

कुछ भी हो, ग्यूसेप अपनी इस पारंपरिक कला को बचाने की ठान चुके हैं. वो स्कूलों के छात्रों को अपने साथ ले जाकर ऐतिहासिक ट्रुली दिखाते हैं और बताते हैं कि उन्हें कैसे बनाया गया.

वो कहते हैं, "मैं स्थानीय बच्चों में वो जुनून जगाना चाहता हूं जो मेरे परिवार ने मुझे दिया है. मैं सैलानियों को भी इस तरह की सैर पर ले जाऊंगा."

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