शांति वार्ता के ख़िलाफ़ 'षडयंत्र': पाक मीडिया

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पाकिस्तानी मीडिया को लगता है कि तालिबान प्रमुख हकीमुल्लाह महसूद की मौत का सरकार की चरमपंथियों से शांतिवार्ता की कोशिशों पर नकारात्मक असर पड़ेगा और अमरीका पर शांति वार्ता के ख़िलाफ़ "षड्यंत्र" बताया है.

तहरीक-ए-तालिबान-ए-पाकिस्तान (टीटीपी) के मुखिया हकीमुल्लाह महसूद शुक्रवार(एक नवंबर) को उत्तरी वज़ीरिस्तान में एक ड्रोन हमले में मारे गए थे. पाकिस्तान के गृहमंत्री निसार अली ख़ान ने कहा कि यह हमला तालिबान के साथ शांति वार्ता को "पटरी से उतारने" के लिए किया गया था.

कई अख़बारों और टीवी विश्लेषकों ने ड्रोन हमले के समय पर सवाल उठाते हुए अमरीका पर उन चरमपंथियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है जो सरकार के साथ बातचीत को तैयार हैं.

ख़बरों में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के ज़रिए ये मामला वाशिंगटन में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सामने उठाने के बाद भी यह ड्रोन हमले किए गए हैं.

उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र के अंग्रेजी अख़बार फ्रंटियर पोस्ट ने लिखा है, "पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सबसे ख़ूनी जंग लड़ने वाले संगठन के नेता की मौत से नवाज़ शरीफ़ सरकार को ताज़ा धक्का लगा है."

नेतृत्व के लिए जंग

जियो न्यूज़ समाचार चैनल के संपादक हामिद मीर कहते हैं, "अगर यह ख़बर सही है और हकीमुल्लाह महसूद मारे गए हैं तो शांति प्रक्रिया, जो आधिकारिक रूप से शुरू नहीं हुई है, पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा."

वह हकीमुल्लाह की मौत को पूर्व तालिबान कमांडर वली-उर-रहमान से जोड़ते हैं जिनकी इसी साल मई में एक ड्रोन हमले में मौत हो गई थी.

वह पूछते हैं, "सवाल यह उठता है कि वे तालिबान समूह या कमांडर जो वार्ता के पक्ष में नहीं हैं, उन्हें निशाना क्यों नहीं बनाया गया."

उर्दू अख़बार डेली एक्सप्रेस कहता है कि यह दूसरी बार है जब अमरीका ने ड्रोन हमले कर सरकार की शांति की कोशिशों को "पटरी से उतारने" की कोशिश की है.

नवा-ए-वक़्त की हेडलाइन भी कुछ इसी तरह की है, वह लिखते हैं, "वार्ता समर्थकों पर हमला; वार्ता के प्रति अमरीकी विद्वेष साबित"

रक्षा विश्लेषक लेफ़्टिनेंट अब्दुल क़यूम ने वक्त न्यूज़ से बात करते हुए कहा, "आप देखें कि ड्रोन तालिबान में सबका पीछा कर रहा है- जैसे नेक मुहम्मद (वज़ीर) या दूसरे मौलवी नज़ीर. यह तभी होता है जब वह पाकिस्तान सरकार से बात करने के लिए सहमति दर्शाते हैं, वरना ड्रोन उनका पीछा बिल्कुल नहीं करता."

पश्तो टीवी चैनल एवीटी ख़ैबर न्यूज़ के मुबारक अली कहते हैं कि हमले ने "अमरीका का असली चेहरा दिखा दिया है." और यह बातचीत की प्रक्रिया को "पटरी से उतारने की साज़िश है."

अंग्रेज़ी अख़बार पाकिस्तान आब्ज़र्वर कहता है, "दरअसल हर बार पाकिस्तान जब भी चरमपंथ के मामले पर एक समझौता करने के क़रीब आता है और तालिबान को साधने के क़रीब आता है वाशिंगटन के नीति निर्धारक इसे पटरी से उतार देते हैं."

मीडिया हकीमुल्लाह की मौत के बाद तालिबान के विभिन्न गुटों में संघर्ष का भी अंदाज़ा लगा रहा है.

अख़बार कहता है, "हकीमुल्लाह ही मौत का एक परिणाम यह होगा कि इससे टीटीपी के अंदर नेतृत्व के लिए जंग शुरू हो जाएगी."

डेली टाइम्स अख़बार से बातचीत करते हुए सेना के जनसंपर्क विभाग के इंटर-सर्विस पब्लिक रिलेशन्स के पूर्व महानिदेशक अथर अब्बास कहते हैं, "माना जा सकता है कि अमरीका ने एक ऐसे व्यक्ति को मारकर पाकिस्तान की मदद की है जो सरकार की सत्ता को चुनौती दे रहा था और पाकिस्तान को बर्बाद कर रहा था."

नियंत्रण नहीं

विश्लेषक रहीमुल्ला यूसुफ़ज़ई, महसूद की मौत के दो बड़े असर देखते हैं. जिओ न्यूज़ टीवी से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अपने "सबसे बड़े" नुक़सान के बाद टीटीपी कुछ कमज़ोर हो जाएगी और नए मुखिया को ताक़त जुटाने में कुछ समय लगेगा. हालांकि वह कहते हैं कि अब बातचीत करना थोड़ा मुश्किल हो जाएगा क्योंकि मुख्य वार्ताकार ही नहीं है.

मीडिया ने महसूद की मौत के बाद चरमपंथी हमलों में वृद्धि को लेकर भी चेतावनी दी है.

एक्सप्रेस न्यूज़ टीवी से बातचीत करते हुए विश्लेषक असद मुनीर कहते हैं कि हमलों का समय "सही नहीं" था.

डॉन अख़बार के एक लेख में लिखा है, "देश में कहीं भी बदले की कार्रवाई के रूप में हिंसा हो सकती है, ख़ासतौर पर पेशावर में. हालांकि संभव है कि टीटीपी बहुत बड़े हमले न कर पाए लेकिन अगर बड़े पैमाने पर हमले करता है तो यह उसकी वर्तमान ताक़त को दिखाएगा."

समा टीवी से बात करते हुए विश्लेषक महमूद शाह कहते हैं कि हत्या के बाद स्थिति "बिगड़" सकती है और सरकार को तुरंत सुरक्षा इंतज़ाम मज़बूत करने के लिए काम करना चाहिए.

रक्षा विश्लेषक अतहर हुसैन शाह कहते हैं कि तालिबान अब या तो पहले से "ज़्यादा हिंसक" हो सकता है या फिर नया नेतृत्व यह महसूस कर सकता है कि स्थिति को सुलझाने के लिए बातचीत करना "बेहतर" हो सकता है.

विश्लेषक इम्तियाज़ आलम ने जियो न्यूज़ टीवी से कहा कि पाकिस्तानी सरकार का ड्रोन हमलों पर "नियंत्रण नहीं" है और तालिबान को इस घटना के बाद समझौता वार्ता नहीं रोकनी चाहिए.

एक्सप्रेस न्यूज़ और दुनिया न्यूज़ ने अपने समाचार बुलेटिनों में देश में सुरक्षा इंतज़ाम मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित किया. चैनल ने पंजाब प्रांत के क़ानून मंत्री राना सनाउल्लाह के हवाले से कहा है कि सरकार का इन हत्याओं में कोई हाथ नहीं है और तालिबान को इनके आधार पर मुहर्रम के दौरान हमले नहीं करने चाहिए.

ख़ैबर न्यूज़ संवाददाता अनवर अली बंगेश ने भी सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि तालिबान की प्रतिक्रिया हमलों के रूप में सामने आ सकती है.

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