किसके हाथ होगी पाकिस्तानी तालिबान की कमान?

  • 4 नवंबर 2013
असमतुल्लाह शाहीन बिट्टानी
Image caption असमतुल्लाह शाहीन बिट्टानी तहरीके तालिबान के कार्यवाहक नेता चुने गए.

तहरीके तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने कहा है कि ड्रोन हमले में मारे गए हकीमुल्लाह महसूद की जगह नए नेता का चुनाव अगले कुछ दिन में हो जाएगा.

टीटीपी के प्रवक्ता शहीदुल्लाह शाहिद ने 'द न्यूज़' से कहा कि नए नेता के बारे में अभी विचार विमर्श हो रहा है और अगले कुछ दिन में फ़ैसला हो जाएगा.

उन्होंने साफ किया कि असमातुल्लाह शाहीन बिटानी टीटीपी के कार्यवाहक नेता नहीं हैं बल्कि शूरा के कार्यवाहक प्रमुख हैं.

इससे पहले ऐसी ख़बरें आ रही थीं कि असमातुल्लाह को कार्यवाहक अमीर चुना है.

पेशावर से वरिष्ठ पत्रकार रहीमुल्लाह युसुफ़ज़ई ने बीबीसी से कहा कि हालांकि तालिबान की शीर्ष परिषद में चर्चा जारी है लेकिन लगता नहीं है कि इस मामले पर कोई फ़ैसला जल्द हो पाएगा.

रहीमुल्लाह युसुफ़ज़ई का कहना है, "तालिबान नेता ड्रोन हमलों और दूसरे अमरीकी हमलों के डर से अलग-अलग इलाक़ों में छुपे हुए हैं और उनके बीच सैटलाइट फ़ोन वगै़रह के ज़रिये बातचीत हो रही है लेकिन दूरी की वजह से मामले में फ़ैसला लेने में देरी हो रही है."

'अंदरूनी मामला'

इस बीच अमरीका ने साफ़ कर दिया है कि पाकिस्तान और तालिबान के बीच शांति वार्ता दोनों के बीच का आपसी मामला है.

अमरीकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता का कहना है कि तालिबान से बातचीत करना पाकिस्तान का अपना अंदरूनी मामला है. प्रवक्ता के मतुाबिक़ वो अभी हकीमुल्लाह महसूद की मौत की पुष्टि करने की स्थिति में नहीं है.

प्रवक्ता ने कहा कि हकीमुल्लाह टीटीपी के नेता थे और उन्होंने साल 2010 में न्यूयॉर्क में हुए एक नाकाम बम हमले की ज़िम्मेदारी ली थी. उन्होंने और उनके साथी तालिबान नेताओं ने अमरीका और अमरीकी नागरिकों के हितों को निशाना बनाने का खुला ऐलान कर रखा था.

पाकिस्तान ने हकीमुल्लाह की अमरीकी ड्रोन हमले में मौत पर पाकिस्तान में अमरीकी राजदूत को बुलाकर भारी नाराज़गी का इज़हार किया था.

शनिवार को पाकिस्तान के गृहमंत्री ने चौधरी निसार अली ख़ान ने कहा था कि हकीमुल्लाह पर ड्रोन हमला करके अमरीका ने पाकिस्तान और तालिबान के बीच होने वाली शांति वार्ता को नुकसान पहुँचाने की साज़िश की है.

उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान अमरीका से सभी संबंधों पर नए सिरे से विचार विर्मश करेगा.

Image caption पाकिस्तान के मुल्तान शहर में हकीमुल्ला की मौत पर अमरीका के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए हैं.

चरमपंथी कैसे करते हैं आपस में बातचीत?

तालिबान के नए नेता

हकीमुल्लाह महसूद की मौत के बाद ये ख़बर आई थी कि तहरीके तालिबान ने ख़ान सईद सजना को अपना नेता चुन लिया है. लेकिन बाद में संगठन ने इसे ग़लत बताया.

कहा जा रहा था कि सजना शांतिवार्ता के पक्ष में हैं.

जानकारों का मानना है कि हकीमुल्लाह महसूद की मौत से संगठन सदमे में है और मातम के इस माहौल में नेता के चुनाव में वक़्त लग सकता है.

कार्यवाहक नेता असमतुल्लाह एफ़ाटांग के रहने वाले हैं और यहाँ के पठानों के क़बीले बिटानी से ताल्लुक रखते हैं.

वो तालिबान के पुराने कमांडरों में से एक हैं. उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान दोनों देशों में युद्ध में हिस्सा लिया है.

क़बीलाई इलाक़े में पुलिस और पाकिस्तानी फ़ौज़ के ख़िलाफ़ बिटानी ने कई हमले किए हैं. हकीमुल्लाह की तरह ही असमतुल्लाह बिटानी भी कट्टरपंथी विचारधारा के हैं. हालाँकि असमतुल्लाह के तहरीक-ए-तालिबान के नए नेता बनने की संभावना बहुत कम है.

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शांति वार्ता पर असर

Image caption पाकिस्तान के गृहमंत्री चौधरी निसार ने अमरीका से रिश्तों की नए सिरे से समीक्षा की बात कही है.

लेकिन क्या नए नेता के चुनाव के बाद तालिबान और पाकिस्तानी सरकार के बीच शांति वार्ता शुरू हो पाएगी?

रहीमुल्लाह यूसुफ़ज़ई मानते हैं कि फिलहाल वार्ता शुरू होने के कोई संकेत नहीं हैं. पाकिस्तान में नई सरकार आने के बाद से ही तालिबान से वार्ता के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अभी तक वार्ता शुरू नहीं हो सकी थी. तालिबान के कुछ समूहों ने हकीमुल्लाह की मौत का बदला लेने की चेतावनी दी है. इससे हालात और मुश्किल हो गए हैं.

तालिबान का आरोप है कि ड्रोन हमले पाकिस्तान सरकार की मर्ज़ी से होते हैं. शांतिवार्ता के लिए तालिबान ने पहले भी ड्रोन हमले रोकने की शर्त रखी थी लेकिन अमरीका ड्रोन हमले रोकने के लिए तैयार नहीं है.

पाकिस्तान प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने हाल ही में अमरीका यात्रा के दौरान भी ड्रोन हमलों का मामला उठाया था. नवाज़ शरीफ़ के दौरे से पाकिस्तान को बड़ी उम्मीदें थी लेकिन अमरीका ने पाकिस्तान की बात नहीं मानी.

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पाकिस्तान की मुश्किलें

नवाज़ शरीफ़ की अमरीका यात्रा के बाद से पाकिस्तान के क़बाइली इलाक़े उत्तरी वज़ीरिस्तान में दो बड़े ड्रोन हमले हुए हैं जिससे साफ़ है कि अमरीका पाकिस्तान की बात मानने के बजाए उन लोगों की को निशाना बना रहा है जो पाकिस्तान सरकार से वार्ता में शामिल होने जा रहे थे.

हाल के हमलों के बाद पाकिस्तान और अमरीका के संबंधों में तनाव और भी बढ़ गया है.

पाकिस्तान के गृहमंत्री चौधरी निसार अली ख़ान ने शनिवार को कहा कि अमरीकी ड्रोन हमले में सिर्फ़ तालिबानी नेता की ही नहीं बल्कि शांति वार्ता की भी हत्या हुई है. चौधरी निसार ने अमरीका पर शांति वार्ता के ख़िलाफ़ साजिश करने का आरोप लगाया था.

चौधरी निसार ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान अमरीका के साथ अपने रिश्तों की समीक्षा करेगा.

इधर तालिबान ने अपने नेता के मौत का बदला लेने की बात कही है. तो दूसरी तरफ विपक्षी राजनीतिक दल तहरीक-ए-इंसाफ़ पाकिस्तान के अध्यक्ष इमरान ख़ान ने कहा है कि वे ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह से नेटो सेना की सप्लाई नहीं गुज़रने देंगे. इमरान की पार्टी ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह की सरकार में शामिल है.

पाकिस्तान ने अमरीका के साथ अपने रिश्तों की समीक्षा करने की बात कही है लेकिन क्या पाकिस्तान ऐसा कर पाएगा?

रहीमुल्ला युसुफ़ज़ई मानते हैं कि पाकिस्तान चाहता है कि अमरीका से बराबरी की हैसियत से बात करे लेकिन पाकिस्तान की अपनी इतनी ज़रूरतें हैं जो शायद अमरीका के बिना पूरी न हो. पाकिस्तान की सरकार ने अमरीका से रिश्ते बेहतर करने की बात कही थी.

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