ब्रिटेन में रहा अप्रवासियों का ख़ासा योगदान

  • 5 नवंबर 2013

ब्रिटेन में वर्ष 2000 के बाद आने वाले अप्रवासियों का सरकारी कोष में ख़ासा योगदान रहा है.

यूनीवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) की ओर से किए गए एक अध्ययन के अनुसार हाल ही में लंदन आए अप्रवासियों का ब्रिटेन में जन्मे लोगों की तुलना में यहां मिलने वाली सुविधाओं पर कम दावा रहता है और यहाँ वे कई लोग साथ साथ रहते हैं.

इस अध्ययन के लेखकों का कहना है कि अप्रवासियों के देश से पलायन की तुलना में उनका योगदान काफ़ी पुख़्ता रहता है. सरकार का कहना है कि देश की सुविधा प्रणाली को बचाए रखने के लिए कड़े नियम कानून बनाना उचित है.

यूसीएल के सेंटर फॉर रिर्सच एंड एनालयसिस ऑफ़ माइग्रेशन के प्रोफ़ेसर क्रिस्टीन डस्टमैन और डॉ. टोमासो फ़्राटीनी के अनुसार वर्ष 1999 के बाद आने वाले अप्रवासियों को वर्ष 2000-2011 के दौरान ब्रिटेन के नागरिकों की तुलना में सरकार की ओर से 45 फ़ीसदी कम सुविधाएं मिली. साथ ही कई लोगों के एक साथ रहने वालों को मिलने वाली सुविधाएं पहले की तुलना में तीन फ़ीसदी कम थी.

उच्च शिक्षा प्राप्त अप्रवासी

रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (ईईए) से आने वाले अप्रवासियों ने वर्ष 2000 से 2011 तक के दशक में काफी सकारात्मक योगदान किया. उन्होंने मिलने वाली सुविधाओं की तुलना में 34 फ़ीसदी करों का योगदान दिया.

जबकि ईईए के बाहर से आने वाले अप्रवासियों ने इसी अवधि में उन्हें मिलने वाली सुविधाओं की तुलना में 2 फ़ीसदी अधिक योगदान दिया. दूसरी ओर, इस अवधि में ब्रितानी नागरिकों ने 11 फ़ीसदी कम करों का भुगतान किया.

इस दशक के दौरान प्राप्त सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद अध्ययन से पता चलता है कि वर्ष 1995 से 2011 तक के बीच ग़ैर ईईए देशों के अप्रवासियों ने उनके द्वारा दिए गए करों की तुलना में अधिक सुविधाएं प्राप्त की. इसकी वजह उनके बच्चों की संख्या ब्रितानी नागरिकों की तुलना में अधिक होना थी.

रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि वर्ष 2011 में 32 फ़ीसदी ईईए अप्रवासी और 43 फीसदी गैर ईईए अप्रवासियों के पास ब्रितानी नागरिकों की 21 फ़ीसदी की तुलना में युनीवर्सिटी डिग्री हैं.

इस अध्ययन में ब्रिटिश लेबर फ़ोर्स सर्वे और सरकारी आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है. प्रो. डस्टमैन ने कहा कि अध्ययन से पता चलता है कि अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में ब्रिटेन ईईए और ग़ैर ईईए देशों से उच्च शिक्षा प्राप्त और प्रशिक्षित अप्रवासियों को अपने यहां आकर्षित करता है.

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