कैथोलिक क्या सोचते हैं परिवार और शादी के बारे में?

  • 6 नवंबर 2013
पोप फ्रांसिस

वेटिकन दुनिया भर में एक सर्वेक्षण करवा रहा है जिसमें ये पता करने की कोशिश की जा रही है कि कैथोलिक ईसाई शादी और पारिवारिक जीवन के बारे में वेटिकन की मान्यताओं और विचारों के बारे में क्या सोचते हैं.

कैथोलिक ईसाइयों के सर्वोच्च धार्मिक गुरु पोप फ़्रांसिस अगले साल अक्तूबर में दुनिया भर के बिशप पादरियों को रोम बुला रहे हैं जहां वह उनके साथ उस संभावित सुधार पर चर्चा करेंगे जो आधुनिक सामाजिक हक़ीक़तों को भी महत्व देता हो.

सर्वेक्षण में शादी से पहले यौन संबंध, गर्भ निरोध और समलैंगिक संबंधों पर स्थानीय लोगों के बारे विचार पूछे जा रहे हैं.

संवाददाताओं का कहना है कि इससे वेटिकन की उन मुद्दों में गहरी दिलचस्पी झलकती है जो अतीत में निषेध या वर्जित समझे जाते थे.

प्रश्नावली में ''ऐसे कई नए हालात शामिल हैं जिन्हें चर्च की तवज्जो और ध्यान की ज़रूरत है''. इनमें वो परिवार जिनमें सिर्फ़ माता या पिता हैं, अंतर-धार्मिक विवाह और तलाक़ जैसे मुद्दे शामिल हैं.

पोप पर दबाव

रोम में मौजूद बीबीसी संवाददाता डेविड विली कहते हैं कि पोप फ्रांसिस पर दुनिया के कई देशों के कैथोलिक ईसाइयों की ओर से दबाव है कि वह वेटिकन का गर्भ निरोध के इस्तेमाल पर प्रतिबंध और तलाक़शुदा और फिर से शादी करने वाले कैथोलिक जोड़ों को कम्यून्यन रीति न करने देने की परंपरा पर पुनर्विचार करें.

डेविड विली के मुताबिक कि इस मुद्दे पर प्रगतिशील विचारों वाले पोप और उनके कुछ शीर्ष सलाहकारों के बीच मतभेद है.

ये सर्वेक्षण अगले साल होने वाली बिशपों की उस अनोखी बैठक की तैयारी में हो रहा है जिसका मुख्य मुद्दा परिवार होगा.

सर्वेक्षण की प्रश्नावली में कहा गया है, "बड़े पैमाने पर एक साथ रहने से लेकर समलैंगिक संबंधों जैसे आज के बदले हुए हालातों की वजह से ऐसे मुद्दे सामने आ रहे हैं जिनके बारे में कुछ साल पहले तक ज़्यादा सुना नहीं गया था."

पोप फ्रांसिस ने ज़्यादा खुलेपन के संकेत दिए हैं और कहा है कि कैथोलिक संप्रदाय बहुत ज़्यादा ''संकीर्ण नियमों'' में बंधा हुआ है.

सितंबर में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि चर्च बहुत ज़्यादा ध्यान गर्भपात, समलैंगिकों और गर्भ निरोध पर उपदेश देने में लगा रहा है और चर्च को ज़्यादा दयालु होने की ज़रूरत है.

इससे पहले पोप फ्रांसिस उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने कहा था कि जब तक पादरियों के लिए लोगों में सदभावना हो और वे प्रभु की खोज में अग्रसर रहें, तब तक वह (पोप) पादरियों के यौन रुझान पर राय कायम नहीं करना चाहते थे.

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