ब्रिटेन: 'अर्थव्यवस्था सुधार रहे हैं आप्रवासी'

  • 7 नवंबर 2013
अप्रवासन

ब्रिटेन में साल 2000 से आए आप्रवासियों ने अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. यह बात यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के एक शोधपत्र में कही गई है.

इस शोध में कहा गया है कि हाल ही में ब्रिटेन आए आप्रवासियों के सामाजिक सुरक्षा गृहों में रहने और फ़ायदे उठाने की संभावना ब्रिटेन में जन्मे लोगों के मुक़ाबले कम है.

शोध लेखकों का कहना है कि "निकासी" की बजाय उनका योगदान "उल्लेखनीय रूप से अधिक" है.

ब्रितानी सरकार का कहना है कि लाभ प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए सख़्त नियम बनाना सही था.

यूसीएल के आप्रवासन पर शोध और विश्लेषण केंद्र के डॉक्टर टोमासो फ्रेटिनी और प्रोफ़ेसर क्रिस्टीन डस्टमैन की रिपोर्ट के अनुसार 1999 के बाद आने वाले आप्रवासियों को 2000-2001 में ब्रितानी नागरिकों के मुक़ाबले सरकारी सुविधाएं और टैक्स क्रेडिट्स 45% कम मिलने की गुंजाइश है.

उनके सामाजिक सुरक्षा गृहों में रहने की संभावना भी 3% कम है.

'नकारात्मक योगदान'

शोध लेखकों का कहना है, "आप्रवासियों और स्थानीय निवासियों की उम्र, लिंग और शिक्षा की तुलना के आधर पर नए आप्रवासियों को सुविधाएं मिलने की संभावना 21% कम है. "

यूरोपियन इकोनॉमिक एरिया (ईईए- जिसमें यूरोपीय यूनियन के अलावा नॉर्वे, आइसलैंड और लेचेंसटीन हैं) के आप्रवासियों ने जो सुविधाएं हासिल कीं उसके मुक़ाबले 34% अधिक कर दिए.

Image caption प्रोफ़ेसर क्रिस्टीन डस्टमैन का कहना है कि अप्रवासियों का योगदान अधिक है

ईईए के बाहर के अंशदाताओं ने सुविधाओं के मुक़ाबले 2% अधिक करों का योगदान दिया.

इसके मुक़ाबले इसी समय ब्रितानी लोगों ने जो सुविधाएं उठाईं उनके मुक़ाबले 11% कम कर दिए.

शोध के अनुसार गैर-ईईए देशों के आप्रवासियों ने 1995 से 2001 के बीच टैक्स कम दिया और सुविधाओं का लाभ अधिक उठाया. मुख्यतः इसलिए कि उन्होंने ब्रितानी लोगों के मुक़ा

बले ज़्यादा बच्चे पैदा किए.

शोध के लिए आंकड़े ब्रिटिश लेबर फ़ोर्स सर्वे और सरकारी रिपोर्टों से जुटाई गई. प्रोफ़ेसर डस्टमैन कहते हैं, "ज़्यादातर यूरोपीय देशों के बरअक्स ब्रिटेन में ईईए और अन्य जगहों से सबसे ज़्यादा कुशल और उच्च शिक्षित आप्रवासी आते हैं."

वह कहते हैं, "हमारे शोध के अनुसार पिछले करीब एक दशक में ब्रिटेन को ईईए के आप्रवासियों से आर्थिक रूप से फ़ायदा हुआ है."

"इन तथ्यों को ध्यान में रखें तो ईईए आप्रवासियों के 'लाभ पर्यटन' के दावे हकीकत से कटे हुए नज़र आते हैं."

दबाव समूह माइग्रेशन वॉच के सर एंड्र्यू ग्रीन कहते हैं रिपोर्ट "घुमा दी गई है."

बीबीसी रेडियो 4 के टुडे कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "पिछली सरकार के समय हमारे यहां करीब 40 लाख आप्रवासी थे- इनमें से दो-तिहाई यूरोपीय यूनियन के बाहर के थे."

"1995 से उन्होंने कुल मिलाकर नकारात्मक योगदान दिया है. इसलिए गैर-ईयू का योगदान या तो बेहद कम है या नकारात्मक है."

हालांकि वह मानते हैं कि "अगर आप पूरी यूरोपियन यूनियन को लें" तो फ़ायदा "स्पष्टतः सकारात्मक" था.

लेकिन एंड्र्यू कहते है कि यह अपेक्षित है क्योंकि आप "जर्मन इंजीनियरों, फ्रेंच फ़ैशन डिज़ाइनरों और ईईए से स्विस बैंकरों को भी शामिल कर रहे हैं."

"भविष्य का मुख्य मुद्दा तो पूर्वी यूरोप से आने वाले कम आय वाले आप्रवासी हैं. "

वह कहते हैं, "रिपोर्ट पीछे की ओर देखती है, आगे की ओर नहीं. प्रोफ़ेसर की रिपोर्ट में भविष्य में स्वास्थ्य पर खर्च को शामिल नहीं किया गया है- बेशक इसकी वजह अच्छी ही होगी- जो आप्रवासियों की उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता जाएगा और न ही पेंशन को शामिल किया गया है, जो अच्छी ख़ासी रकम होगी."

सरकारी कदम सही

प्रोफ़ेसर डस्टमैन ने टुडे कार्यक्रम में कहा, "यह सही है कि नए आप्रवासी युवा हैं लेकि इसके साथ ही बेहतर शिक्षा प्राप्त भी हैं."

"तो वह लाभ प्रणाली से जितना लेंगे उतना ही अधिक वह भविष्य में योगदान करेंगे क्योंकि वह अपने करियर की ऊंचाई और पैसा कमाने की अपनी क्षमताओं के चरम पर नहीं पहुंचे हैं."

"स्वाभाविक है आप जितना ज़्यादा कमाएंगे उतना ज़्यादा आप कर चुकाएंगे."

एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा, "हम उन लोगों का स्वागत करते हैं जो अर्थव्यवस्था में योगदान करने के लिए आते हैं, लेकिन यह भी बिल्कुल सही है कि हम ब्रितानी लाभ प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए सख़्त प्रावधान करें ताकि इसका ग़लत इस्तेमाल न हो सके."

उन्होंने कहा कि सरकार इसलिए प्रावधानों को कड़ा कर रही है ताकि इसके लाभ उन्हीं को मिल सकें जिन्हें "कानूनन ब्रिटेन में रहने की इजाज़त है."

इस दौरान मंगलवार को जारी एक अलग यूसीएल शोध में चेतावनी दी गई है कि सरकार के आप्रवासियों की संख्या में लाखों की कमी करने का लक्ष्य "न तो उपयोगी है और न ही नीतिगत रूप से कारगर."

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि काम संबंधी, छात्रों और पारिवारिक अप्रवासन को रोकने वाले कदमों के चलते ब्रिटेन की काम करने और पढ़ने की बेहतर जगह वाली छवि को नुकसान पहुंचा है.

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इंग्लैंड और वेल्स की 13% आबादी ब्रिटेन से बाहर जन्मी थी.

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