ट्विटर ने कैसे बदल दी दुनिया

ट्विटर

साल 2006 में माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर की शुरुआत हुई थी. शुरुआती कुछ साल ढीले रहे, लेकिन आज लाइव चैटिंग की अपनी खूबी की वजह से ट्विटर ने पूरी दुनिया में लोगों की ज़िंदगी में बहुत अहम जगह बना ली है.

यहां हम आपको बताएंगे कि ट्विटर आज जहां पहुंचा है उसका सफ़र कैसा रहा और हैशटैग (#) ने किस तरह आपसी संवाद की दुनिया बदल दी है.

हैशटैग क्रांति

कुछ लोगों को ये बात बेवकूफ़ी लग सकती है कि ट्विटर पर ये बताया जाए कि आपने लंच में क्या खाया, लेकिन ये भी सच है कि ट्विटर ने हमारी ज़िदगी को एक नया आयाम दिया है.

हालांकि फेसबुक के मुकाबले इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या काफी कम है लेकिन इसका जितना प्रभाव है उतना और किसी सोशल नेटवर्किंग साइट का नहीं.

ट्विटर के पहले हैशटैग बटन का इस्तेमाल टेलिफोन में नंबर बताने के लिए किया जाता था.

लेकिन आज हैशटैग # किसी निश्चित विषय पर ग्रुप ट्विट करने का प्रमुख ज़रिया बन गया है.

आइए देखते हैं कि ट्विटर ने हमारी ज़िंदगी के किन-किन क्षेत्रों को किस हद तक प्रभावित किया है.

कारोबार

एक समय था कि किसी प्रोडक्ट की शिकायती चिट्ठी भेजने के बाद कई दिन इंतज़ार करना पड़ता था कि जवाब आएगा या कोई कार्रवाई होगी और आखिर में यही लगता था कि आप कितने अकेले पड़ गए हैं.

लेकिन ट्विटर का प्रभाव ऐसा है कि आपने किसी प्रोडक्ट की शिकायत का ट्विट किया नहीं कि ऐसे तमाम लोग ट्विट के ज़रिए आपकी हां में हां मिलाते नज़र आ जाएंगे. आज कंपनियां ऐसी शिकायतों के वाइरल होने यानि व्यापक रूप से फैलने से डरती हैं.

आज किसी कंपनी को अपनी नीतियां बदलने के लिए ट्विटर के ज़रिए प्रभावित किया जा सकता है.

वित्तीय बाज़ारों में आज कई लोग कारोबार के भविष्य को लेकर सोशल मीडिया प्रतिक्रियाएं देने लगे हैं.

राजनीति

Image caption ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने एक समय ट्विटर का इस्तेमाल बंद कर दिया था.

ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने चार साल पहले ट्विटर को खारिज कर दिया था. लेकिन अब वो दूसरे बड़े राजनेताओं की तरह दोबारा इसका इस्तेमाल करने लगे हैं.

राजनेताओं के लिए ट्विटर बहुत मददगार साबित हुआ है. इसके ज़रिए वो सीधे आम लोगों से बात कर सकते हैं. कहीं से भी बड़ी-बड़ी नीतिगत घोषणाओं की सूचना दे सकते हैं.

आज राजनीतिक जीवन के लिए सोशल मीडिया इतना ज़रूरी हो गया है कि अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव से पहले बराक ओबामा ने ट्विट्स का विश्लेषण करने के लिए विशेषज्ञों की टीम बुलाई थी.

और जब रिपब्लिकन उम्मीदवार मिट रोमनी पर उनकी जीत हुई तो अपनी पत्नी को गले लगाने वाला ट्विट इतना लोकप्रिय हुआ कि इसने सबसे ज्यादा ट्विट का रिकॉर्ड तोड़ दिया.

ट्विटर खुद अपने दम पर चुनाव नहीं जीत सकता लेकिन चुनाव अभियान को प्रभावित करने में इसकी भूमिका अब निर्विवाद रूप से स्वीकार कर ली गई है.

ब्रेकिंग न्यूज़

इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि बड़ी खबरें अब प्राय: ट्विटर पर ही ब्रेक हो रही हैं.

चाहे वो ओसामा बिन लादेन को ढूंढ निकालने वाले छापे की खबर हो या फिर हडसन नदी पर विमान के उतरने की खबर – ट्विट के ज़रिए ही अब खबरें सबसे पहले ब्रेक हो रही हैं.

यही वजह है कि दुनियाभर के समाचार कार्यालयों में ट्विटर को खबरों के स्रोत के साथ-साथ ब्राडकास्ट प्लैटफॉर्म के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

हालांकि इसके कुछ खतरे भी हैं. एक्टर जेफ़ गोल्डब्लम की मौत की अफवाह ट्विटर पर इस कदर फैल गई कि उन्हें अमरीकी टीवी पर आकर बताना पड़ा कि वो जीवित हैं.

उन्होंने बड़े ही कॉमिक अंदाज़ में कहा था, “जेफ़ गोल्डब्लम को सबसे ज्यादा मैं मिस करूंगा. वो मेरे दोस्त और मेंटर ही नहीं थे, बल्कि वो मुझमें ही तो थे.”

खेल

Image caption ब्रितानी टेनिस खिलाड़ी एंडी मरे विंबलडन ट्रॉफी के साथ.

ये कहना ग़लत नहीं होगा कि बड़ी संख्या में फुटबॉल खिलाड़ी देखे जाते रहे हैं, उन्हें सुना नहीं जाता. यानी उनकी बात लोगों तक नहीं पहुंच पाती.

अब इंग्लिश प्रीमियर लीग (#ईपीएल) के सभी 20 क्लबों के ट्विटर हैंडल और ज्यादातर खिलाड़ियों के अकाउंट हैं.

इसका मतलब ये है कि खेल के प्रशंसक आज ट्विटर के ज़रिए अपनी हीरो खिलाड़ियों के ज्यादा क़रीब हैं.

खेल के आयोजन आज लोगों को ट्विटर के ज़रिए बेहद क़रीब ला रहे हैं. एंडी मरे ने जब विंबलडन जीता तो 12 घंटे के भीतर 34 लाख ट्विट हुए.

मशहूर शख्सियत

ऐश्टन कुचर ऐसे पहले ट्विटर यूज़र अमरीकी अभिनेता थे जिन्हें अप्रैल 2009 तक ट्विटर पर फॉलो करने वाले प्रशंसकों की संख्या 10 लाख तक पहुंच गई थी.

यह लेख लिखे जाने के समय सिंगर केटी पेरी को ट्विटर पर फॉलो करनेवाले लोगों की संख्या 46,700,000 है.

यानी ट्विटर पर सिलेब्रिटीज़ बहुत हैं और इसके ज़रिए प्रशंसकों के बीच उनका दायरा और संवाद बढ़ता ही जा रही है.

आंदोलन

Image caption मिस्र के पूर्व शासक होस्ने मुबारक की तस्वीर के सामने प्रदर्शन करते सरकार विरोधी लोग.

लंदन में रहनेवाली महिलावादी लेखिका लौरा बेट्स वर्ष 2012 से एवरीडे सेक्सिज़्म नाम का एक प्रोजेक्ट चला रही हैं जिसका मक़सद रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सेक्सिस्ट आचरण को दर्ज करना है.

उनके सफल आंदोलन की वजह से फेसबुक को यौन हिंसा को लेकर मज़ाक बनानेवाले पन्नों को हटाना पड़ा था.

सोशल मीडिया के ज़रिए होने वाले आंदोलनों की सबसे बड़ी बात ये है कि उस पर बातचीत हो सकती है. लोग पक्ष-विपक्ष में अपनी राय रख सकते हैं.

मिस्र में हुई क्रांति के दौरान प्रदर्शनकारी ट्विटर के ज़रिए ही मीटिंग बुला रहे थे, अपनी बात रख रहे थे और सामग्री पहुंचा रहे थे.

कला

जब रॉयल शेक्सपीयर कंपनी ने घोषणा की कि वो ‘रोमियो जुलियट’ के मंचन को ट्विटर के ज़रिए बढ़ावा दे रही है तो एक संस्कृति लेखक ने उसके प्रति अपनी सहानुभूति जताई थी और कहा था कि शेक्सपीयर की रचनाओं के दम पर बनी संस्था अब 140 कैरेक्टर वाले मंच पर अपना नाटक खेल रही है.

लेकिन आज ट्विटर और कला एक दूसरे के पर्याय जैसे बनते जा रहे हैं चाहे वो कलात्मक जानकारियों की सूचना देने की बात हो या उनके प्रकाशन या फिर उसके बारे में विचार-विमर्श करने की, ट्विटर ने कला चर्चा को साझा करने का भी एक अच्छा प्लेटफॉर्म प्रदान किया है.

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