मलाला की किताब पर 'इस्लाम विरोधी' होने का आरोप

  • 11 नवंबर 2013

पाकिस्तान के निजी स्कूलों पर मलाला यूसुफ़ज़ई की किताब खरीदने पर रोक लगा दी गई है. इसकी वजह किताब का पाकिस्तान और इस्लाम विरोधी होना बताया गया है.

ऑल पाकिस्तान प्राइवेट स्कूल्स फ़ेडरेशन के प्रमुख काशिफ़ मिर्ज़ा ने एएफ़पी को बताया, "जी हां, हमने मलाला की किताब "आई एम मलाला" पर रोक लगा दी है, क्योंकि इसमें जो सामग्री है, वह हमारे देश की विचारधारा और इस्लामी मूल्यों के विरुद्ध है."

मिर्ज़ा ने कहा, "हम मलाला के खिलाफ़ नहीं हैं. वह हमारी बेटी है. वह खुद अपनी किताब को लेकर भ्रमित है. उसके पिता ने किताब के प्रकाशक को सलमान रुश्दी के अनुच्छेद हटाने और पैग़ंबर मोहम्मद के नाम के बाद पीस बी अपॉन हिम लिखने को कहा है."

काशिफ़ मिर्ज़ा का कहना है कि पिछले वर्ष स्वात घाटी में तालिबान के मलाला को गोली मारने के बाद पाकिस्तान के करीब डेढ़ लाख निजी स्कूल उसके समर्थन में खड़े हुए थे, लेकिन मलाला ने अपनी आत्मकथा में जो विचार व्यक्त किए हैं, वे स्वीकार्य नहीं हैं.

पाकिस्तान प्राइवेट स्कूल्स फ़ेडरेशन के प्रमुख ने कहा, "कोई भी स्कूल अपनी लाइब्रेरी या परिसर में अन्य किसी तरह की गतिविधि के लिए "आई एम मलाला" नहीं खरीदेगा. मलाला बच्चों की आदर्श थी, लेकिन इस किताब ने उसे विवादास्पद बना दिया है. इस किताब के जरिए वह पश्चिमी देशों के हाथ की कठपुतली बनकर रह गई है."

रुश्दी के ज़िक्र से नाराज़गी

किताब के विवादित होने पर काशिफ़ मिर्ज़ा का कहना था, "किताब में इस्लाम को लेकर सम्मान नहीं दिखाया गया है, क्योंकि इसमें पैग़ंबर मोहम्मद के नाम को सम्मानजनक शब्दों के साथ नहीं लिया गया है, जैसा कि इस्लामी जगत में होता है. किताब में सलमान रुश्दी के पक्ष में बात की गई है."

हालांकि उन्होंने फ़ेडरेशन पर किताब पर रोक को लेकर तालिबान की धमकी या दबाव से इनकार किया है.

ऑल पाकिस्तान प्राइवेट स्कूल्स मैंनेजमेंट एसोसिएशन के प्रमुख अदीब जावेदानी ने कहा कि है कि एसोसिएशन के चालीस हज़ार स्कूलों की लाइब्रेरी में मलाला की किताब पर रोक लगा दी है और सरकार से भी कहा गया है कि इसे स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल न होने दें.

उन्होंने कहा कि मलाला के बारे में अब सारी बातें साफ़ हैं और वो पश्चिमी देशों का प्रतिनिधित्व करती हैं पाकिस्तान का नहीं.

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