विवादों के बीच कोलंबो में चोगम शुरू

श्रीलंका के मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शुक्रवार को राजधानी कोलंबो में राष्ट्रमंडल देशों के शासनाध्यक्षों की बैठक (चोगम) शुरू हो गई.

गुरुवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने साल 2009 में तमिल विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई में मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर की जा रही आलोचनाओं को खारिज़ कर दिया है. राजपक्षे अगले दो वर्षों तक बैठक की अध्यक्षता करेंगे.

भारत, मॉरिशस और कनाडा के शासनाध्यक्षों ने बैठक का बहिष्कार किया है.

राष्ट्रमंडल की अध्यक्ष महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का प्रतिनिधित्व कर रहे राजकुमार चार्ल्स ने सम्मेलन का उद्घाटन किया. सम्मेलन में ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन भी हिस्सा ले रहे हैं लेकिन उन्होंने कहा है कि वह मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा मजबूती से उठाएंगे.

Image caption भारत, मॉरिशस और कनाडा के शासनाध्यक्ष चोगम में हिस्सा नहीं ले रहे.

बीबीसी संवाददाता जॉर्ज एलागिया के मुताबिक सरकार इस तीन दिवसीय सम्मेलन को युद्ध के बाद श्रीलंका में हुए बदलाव को दिखाने के मौके के रूप में देख रही थी लेकिन इसमें उसको सफलता मिलती नहीं दिख रही है.

श्रीलंका का तर्क

उधर, आलोचनाओं से नाराज़ राजपक्षे ने कहा कि केवल 2009 में ही श्रीलंका में हत्याएं नहीं हुईं, बल्कि 30 सालों से ऐसा हो रहा था और इसका शिकार बच्चे सहित गर्भवती महिलाएं भी हो रही थीं.

उन्होंने कहा, ''हर रोज एक, दस या पंद्रह शव बरामद किए जाते थे, तब किसी ने इसे मुद्दे नहीं बनाया. वह अब रूक गया है, और अब बमबारी नहीं होती.''

उन्होंने कहा कि अधिकारों के हनन का दोषी पाए जाने पर किसी के खिलाफ भी सरकार कार्रवाई के लिए तैयार है, लेकिन वह देश को बँटने नहीं देगी.

मई 2009 में श्रीलंका की सेना ने विद्रोही तमिल टाइगर्स को हराकर करीब 30 साल से चल रहे गृह युद्ध को समाप्त किया था. इस लड़ाई के दौरान और बाद में श्रीलंकाई सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगे थे.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया कि युद्ध के अंतिम चरण में कम से कम 40 हजार आम नागरिक मारे गए. इनमें से अधिकतर श्रीलंकाई सेना की गोलीबारी के शिकार हुए.

श्रीलंका की सेना पर हिरासत में ली गई महिलाओं के साथ रेप, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गायब करने और पत्रकारों को धमकाने के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि सरकार इन आरोपों को खारिज़ करती रही है.

विरोध

बुधवार को कोलंबो में 53 देशों से आए प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत के बीच युद्ध के दौरान और बाद में लापता हुए सदस्यों के परिवारों के एक समूह को कोलंबो में प्रवेश नहीं करने दिया गया. दूसरी ओर सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों ने कुछ पत्रकारों को उत्तरी हिस्से में जाने से रोका.

गुरुवार को श्रीलंका के मुख्य विपक्ष ने अपने मुख्यालय में एक मानवाधिकार उत्सव का आयोजन किया, जहां पर सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों ने हमले किए.

मानवाधिकार कार्यकर्ता ब्रिटो फर्नांडो ने बीबीसी से कहा कि सरकार लोगों को उनके मानवाधिकार, असहमति के अधिकार और चर्चा व भाषण के अधिकार नहीं दे रही है.

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