गूगल करेगा चाइल्ड पोर्न की सर्च (बहुत) मुश्किल

  • 18 नवंबर 2013
गूगल का लोगो

प्रमुख सर्च इंजन गूगल और माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट पर बच्चों की अश्लील तस्वीरों की खोज को और कठिन बनाने के उपाय करने पर सहमत हो गए हैं.

इंटरनेट पर अश्लील तस्वीरों की खोज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एक लाख से अधिक शब्दों पर अब कोई परिणाम नहीं आएगा. इसके साथ ही बच्चों की अश्लील तस्वीरों को ग़ैर क़ानूनी बताने वाला एक संदेश भी दिखाई देगा.

इन कंपनियों की इस पहल का ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने स्वागत किया है. कैमरन ने इस साल गर्मियों में इन कंपनियों से ऐसा करने की अपील की थी.

उन्होंने साथ चेतावनी भी दी थी कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो वो इसके ख़िलाफ़ नया विधेयक लेकर आएंगे.

जुलाई में कैमरन ने गूगल और माइक्रोसाफ्ट के सर्च इंजन बिंग से ऐसी अवैध तस्वीरों तक लोगों की पहुँच को कठिन बनाने के लिए और अधिक प्रयास करने के लिए कहा था. इंटरनेट पर सर्च करने वाले 95 फ़ीसदी लोग इन्ही दो इंजनों का सहारा लेते हैं.

मिलकर काम

कैमरन ने कहा था कि इन कंपनियों को ऐसे इंतज़ाम करने की ज़रूरत हैं, जिससे अवैध तस्वीरों की खोज करने पर कोई परिणाम नज़र न आए.

इसके बाद इन कंपनियों ने एक नया एल्गोरिद्म या सॉफ़्टवेयर को निर्देश देने वाली प्रणाली शुरू की है, जो कि बच्चों की अश्लील तस्वीरों की खोज को रोकता है.

गूगल ने कहा है कि सरकार ने खोज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले क़रीब 139 शब्दों पर 'नो रिजल्ट' दिखाने को कहा था. इसकी जगह अब ऐसे 13 हज़ार से अधिक शब्दों पर कोई परिणाम नज़र नहीं आता है.

बहुत ही कम अवसरों पर एकता दिखाने वाली माइक्रोसाफ़्ट और गूगल इस मुद्दे पर मिलकर काम कर रही हैं. माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि बिंग पर भी ऐसे शब्द खोजने पर कोई परिणाम नहीं आएगा.

कंपनी ने कहा है कि बच्चों के शोषण से संबंधित सामग्री को कंपनी पहले से ही बर्दाश्त नहीं करती. गर्मियों से ही इस तरह की सामग्री तक पहुँच को और कठिन बनाया गया था.

ये दोनों कंपनियां सोमवार को डाउनिंग स्ट्रीट पर इंटरनेट सुरक्षा पर होने वाले सम्मेलन में इस विषय पर अन्य कंपनियों को भी अपने साथ लेंगी.

अश्लील तस्वीरें

बाल सुरक्षा के विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की अधिकांश अश्लील तस्वीरों को इंटरनेट के ज़रिए नहीं खोजा जा सकता लेकिन वे अपने सहयोगी नेटवर्कों में छिपी होती हैं.

बाल शोषण और ऑनलाइन सुरक्षा केंद्र (सीईओपी) की इस साल जून में आई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह 'हिडन इंटरनेट' के ज़रिए बच्चों की अश्लील तस्वीरों को नकली नेटवर्कों और अन्य सुरक्षित तकनीकों का इस्तेमाल कर खोज से बचा लिया जाता है और उन्हें लोगों तक पहुँचाया जाता है.

बच्चों की अश्लील तस्वीरें रखने वाले नेटवर्क का पता लगाने के लिए गूगल और माइक्रोसॉफ़्ट नेशनल क्राइम एजेंसी और इंटरनेट वॉच फाउंडेशन के साथ मिलकर काम करने पर सहमत हो गए हैं.

ऐसी अश्लील तस्वीरों का पता लगाने के लिए ये दोनों कंपनियां अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का भी इस्तेमाल करेंगी.

माइक्रोसॉफ़्ट का फ़ोटो डीएनए पहले से ही किसी भी फ़ोटो को एक विशिष्ट पहचान दे रहा है. इसका परिणाम यह होता है कि वह फ़ोटो इंटरनेट पर जहाँ कही भी शेयर किया जाएगा, उसे खोज लिया जाएगा. वहीं गूगल ने वीडियो आईडी विकसित किया है, जो कि वीडियो के साथ ठीक इसी तरह का काम करता है.

सरकार की आलोचना

ये दोनों कंपनियां इस तकनीक को नेशनल क्राइम एजेंसी और अन्य संगठनों को उपलब्ध कराएंगी, जिससे यह पता लगाया जाएगा कि बच्चों की अश्लील तस्वीरें बनाने और उसे फैलाने के पीछे किन लोगों का हाथ है.

लेकिन आलोचक बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कम संसाधन उपलब्ध कराने के लिए सरकार की आलोचना कर रहे हैं.

अब नेशनल क्राइम एजेंसी का हिस्सा बनी सीईओपी ने अभी हाल ही में अवैध तस्वीरें डाउनलोड करने वाले सैकड़ों लोगों की पहचान करने का अवसर चूक जाने का आरोप लगाया है.

टोरंटो पुलिस ने 2012 में सीईओपी से सैकड़ों ऐसे ब्रितानी लोगों के नाम साझा किए थे जिनपर बच्चों की वीडियो बेचने वाली कनाडा की एक फर्म का ग्राहक होने का आरोप था.

इस धंधे को बंद करने के लिए कनाडा और दुनिया के अन्य हिस्सों में सैकड़ों गिरफ़्तारियां हुई थीं. लेकिन ब्रिटेन में किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार