ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर जेनेवा में बैठक शुरू

ईरान पर बैठक
Image caption ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से विवाद का कारण रहा है

विवादास्पद ईरानी परमाणु कार्यक्रम पर विश्व की छह बड़ी शक्तियों और ईरान की बैठक जेनेवा में शुरू हो गई है. दोनों पक्षों ने भरोसा जताया है कि इस बैठक में उनके बीच अहम समझौता हो सकता है.

ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है जबकि पश्चिमी देशों को संदेह है कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार बना रहा है.

उधर जेनेवा में बैठक के शुरू होने से ठीक पहले ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली ख़मैनी ने साफ़ कर दिया है कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेगा.

'लाल रेखाएं'

इस बातचीत में ईरान को छह महीने का अंतरिम समझौता होने की उम्मीद है, जिससे लंबी अवधि के क़रार के लिए उसे वक़्त मिल जाएगा.

ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़ारिफ़ ने कहा कि वह जेनेवा में समझौते पर दस्तख़त के इरादे से जा रहे हैं.

ये बैठक दो दिन तक चल सकती है जिसमें ईरान के अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांचों स्थाई सदस्य और जर्मनी के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं.

पिछले दिनों हुई इसी तरह की बैठक में दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका था.

बुधवार को जेनेवा में बैठक शुरू होने से पहले ख़मैनी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से पीछे न हटने के अटल इरादों का इज़हार किया और कहा कि समझौते में शामिल देशों को ईरान की संप्रभुता का ख्याल रखना चाहिए.

ख़मैनी ने कहा, ''कुछ लाल रेखाएं हैं, कुछ सीमाएं है. इन सीमाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए. मैंने अधिकारियों को कहा है कि वे इन सीमाओं का ध्यान रखें और दुश्मन की तरफ़ से उठाए जा रहे कदमों से बिल्कुल ख़ौफ़ज़दा न हों.''

'बातचीत में खलल'

फ्रांस ने अली ख़मैनी के बयान को अस्वीकार्य बताया और कहा कि इससे समझौते को लेकर हो रही बातचीत में खलल पड़ेगा.

इस बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि अभी भी ऐसे समझौते तक पहुंचा जा सकता है जिसके बाद ईरान अपना विवादित परमाणु कार्यक्रम छोड़ देगा.

सर्गेई लावरोव ने कहा, ''हमें आशा है कि इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं और जेनेवा में बैठक के बाद हमें कामयाबी मिलेगी.''

इससे पहले मंगलवार को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमरीकी सीनेटरों से कहा था कि वो ईरान के खिलाफ़ प्रतिबंधों को लेकर कड़ा रुख न अपनाएं ताकि कूटनीतिक पहल की जा सके.

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