कम्यूनिस्ट पार्टी की शब्दावली का कोर्स 93 हज़ार रुपए में

चीन कम्यूनिस्ट पार्टी कोर्स फ़ीस

चीन में कई विश्वविद्यालय कम्यूनिस्ट पार्टी की शब्दावली सिखाने के लिए छात्रों से मोटी फ़ीस वसूल रहे हैं. सरकारी मीडिया ने इसकी जानकारी दी है.

ख़बरों में कहा गया है कि सलाहकार कोर्स के एवज़ में 15 सौ डॉलर यानी क़रीब 93 हज़ार रुपए तक ले रहे हैं.

इन्हें सीखकर छात्र पार्टी की भाषा की बेहतर समझ बना सकते हैं.

पार्टी की पिछले हफ़्ते बीज़िंग में हुई बंद कमरों की बैठक के बाद इन कोर्सों की ख़बरें बाहर आईं.

इस प्लेनम में चीन में अगले एक दशक में होने वाले विकास का एजेंडा घोषित किया गया था.

बड़े पैमाने पर सुधार

शंघाई मॉर्निंग पोस्ट ने शुक्रवार को ख़बर दी कि विश्वविद्यालय, विचार मंच और दूसरे संगठन इन कोर्सों को प्लेनम यानी बैठक की ‘भावना समझाने’ के नाम पर प्रोत्साहित कर रहे हैं.

अख़बार के मुताबिक़ इनका प्रशिक्षण देने वाले ज़्यादातर पूर्व उच्च पदाधिकारी और वरिष्ठ सरकारी शोधकर्ता हैं जो निर्णय लेने वाली ताक़तवर संस्थाओं से संबंधित हैं.

इनमें से कुछ को नेशनल डेवेलपमेंट एंड रिसर्च कमीशन से जुड़ा माना जाता है, जो चीन की आर्थिक योजना बनाने वाला प्रमुख संगठन है.

कोर्स के आयोजकों की शर्त होती है कि ये कोर्स प्रमुख रूप से पार्टी, सरकारी अधिकारियों और सरकारी संगठनों के मैनेजरों के लिए हैं.

शंघाई मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक़ वैसे ये कोर्स उन सभी लोगों के लिए हैं जो इसकी क़ीमत अदा कर सकते हैं.

इस बार बीज़िंग में हुए प्लेनम में ज़ी जिनपिंग के पिछले साल कम्यूनिस्ट पार्टी महासचिव बनने के बाद तीसरी बार देश के सबसे अहम अधिकारी इकट्ठे हुए थे.

अहम तारीख़

तीसरे प्लेनम को ज़्यादातर लोग देश के कैलेंडर में एक अहम तारीख़ मानते हैं क्योंकि कम्यूनिस्ट पार्टी इस मौक़े पर बड़े पैमाने पर सुधारों की शुरुआत करती है.

इस बार इसमें चीन की एक बच्चे की नीति, मज़दूर शिविरों और बाज़ार अर्थव्यवस्था को लेकर अहम बदलाव हुए हैं.

मगर संवाददाताओं का कहना है कि एक चीज़ जो नहीं बदली है वह है- पेचीदा भाषा, जिसके ज़रिए बाहरी दुनिया को बैठक के नतीजों की सूचना दी जाती है.

इसकी वजह से कई बार अहम नीति क्षेत्रों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जैसे सरकार नियंत्रित एंटरप्राइज़ेज़ में. ऐसा तब होता है जब पार्टी की घोषणाओं में अक्सर पुराने तौर-तरीक़ों वाली कम्यूनिस्ट पार्टी की शब्दावली जैसे ‘’चीनी अभिलक्षणों वाला समाजवाद’’ वाक्यांश बोले जाते हैं.

यह अभी पता नहीं है कि इन कोर्सों को पार्टी का अनुमोदन हासिल है या नहीं.

शंघाई मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक ये कोर्स करने के लिए बहुत से लोगों ने बीज़िंग यूनिवर्सिटी में आवेदन दिए हैं.

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