सरकारी बोर्डिंग स्कूलों का अस्तित्व ख़तरे में

सरकारी बोर्डिंग स्कूल इंग्लैंड

इंग्लैंड के सरकारी बोर्डिंग स्कूलों का अस्तित्व ख़तरे में है क्योंकि रिहाइशी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए उनके पास पैसा नहीं है. एक स्कूल के प्रमुख ने यह जानकारी दी है.

स्टेट बोर्डिंग स्कूल एसोसिएशन के रॉय पेज का कहना है कि इंग्लैंड के सरकारी बोर्डिंग स्कूलों को पूंजी निवेश की 'तुरंत ज़रूरत' है.

पेज एसोसिएशन की सालाना बैठक में यह बताने वाले हैं कि बगैर निवेश के ज़्यादातर स्कूलों से बोर्डिंग हाउस ख़त्म हो सकते हैं.

सरकार ने स्कूलों को सुझाव दिया था कि वे दान से पैसा जुटा सकते हैं.

इंग्लैंड के 38 स्कूलों में बोर्डिंग की सुविधा दी जाती है जिनमें कुल क़रीब पांच हज़ार छात्र रहते हैं.

एसोसिएशन के चेयरमैन और रॉयल ग्रामर स्कूल हाई वायकॉम्ब के प्रमुख पेज तीन सरकारी स्कूलों का ज़िक्र करने वाले हैं जिन्होंने हाल के वर्षों में अपने बोर्डिंग हाउस बंद कर दिए हैं.

'कोई पैसा नहीं मिला'

उनके मुताबिक़ अगर सरकार बोर्डिंग में रिहाइश के लिए पूंजी का इंतज़ाम नहीं करती तो आगे और भी स्कूल ऐसा कर सकते हैं.

पेज ने बीबीसी को बताया कि सरकारी बोर्डिंग स्कूलों को अपने बोर्डिंग हाउसों की देखभाल के लिए इस सरकार के तहत अभी तक कोई पैसा नहीं मिला है.

उन्होंने बताया कि उनका स्कूल, अकादमी एकेडमीज़ कैपिटल मेंटेनेंस फंड में अकादमी की इमारत के लिए पैसा मांग सकता है पर इसमें बोर्डिंग की रिहाइश शामिल नहीं है.

पेज बैठक में कहेंगे कि सरकार के एक ताज़ा प्रस्ताव में बोर्डिंग स्टाफ़ की ट्रेनिंग के लिए अनुदान स्वागतयोग्य है पर ''बोर्डिंग स्कूलों के बेडरूम्स और डायनिंग रूम्स में गिरती ईंटों और सीमेंट’’ का मतलब है कि ''बेहतरीन प्रशिक्षित स्टाफ़ गिरती इमारतों के बीच मौजूद होगा.''

पेज के मुताबिक़ दो साल से एसोसिएशन ''सरकारी बोर्डिंग स्कूलों को बचाने के लिए पूंजी निवेश को लेकर सरकार से सफ़ाई की मांग कर रही है.''

''हमारे अनुभवी लोगों द्वारा संचालित कुछ स्थापित स्कूल अपने बोर्डिंग हाउसों के अस्तित्व को लेकर बेहद चिंतित हैं.''

'18 बिलियन पाउंड ख़र्च'

पेज ने बीबीसी को बताया, ''यह इसलिए नहीं है कि स्कूलों को ठीक से नहीं चलाया जा रहा है, यह इसलिए है क्योंकि उनके पास सुविधाएं देने और इमारतों के रखरखाव के लिए पैसा ही नहीं है.''

उन्होंने बताया कि ऑफ़स्टेड बोर्डिंग के लिए कुछ मानक बनाता है जिसके तहत एक कमरे में छात्रों की संख्या, उनके स्नान के लिए शॉवर समेत कई सुविधाएं आती हैं.

उनके मुताबिक़ सरकारी बोर्डिंग स्कूलों में एक छात्र पर ख़र्च निजी बोर्डिंग स्कूलों के मुक़ाबले सालाना फ़ीस के आधे के बराबर आता है जो क़रीब साढ़े 32 लाख रुपए के आसपास होता है.

शिक्षा विभाग के एक प्रवक्ता का कहना है, ''किसी स्कूल को लोककल्याण के लिए दान हासिल करने से रोक नहीं है. हमें पता है कि सरकारी बोर्डिंग स्कूल शिक्षा व्यवस्था में एक अहम योगदान देते हैं और नौजवानों की ज़िंदगी बदल सकते हैं.''

प्रवक्ता ने आगे कहा कि 'मौजूदा सरकार के तहत' इंग्लैंड स्कूल इमारतों पर 18 बिलियन पाउंड ख़र्च कर रहा है.

प्रवक्ता का कहना था, ''अगली गर्मियों तक हमारे पास सभी स्कूलों के बारे में सही जानकारी होगी, जिसके बाद हम सरकारी बोर्डिंग स्कूलों समेत सभी ज़रूरतमंद स्कूलों के बारे में फ़ैसला ले सकेंगे.''

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