लंदन बंधक मामला: संदिग्ध 'पूर्व माओवादी'

  • 26 नवंबर 2013
लंदन
Image caption पेकफोर्ड प्लेस में पुलिस घर-घर जाकर पूछताछ कर रही है

बीबीसी को जानकारी मिली है कि लंदन में तीन महिलाओं को ग़ुलामों की तरह 30 साल से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखने वाले संदिग्ध दम्पति अरविंदन बालाकृष्णन और चंदा पूर्व माओवादी कार्यकर्ता हैं.

माओवादी आर्काइव्स के मुताबिक़, ये दोनों 1970 के दशक में दक्षिण लंदन में ब्रिक्सटन स्थित माओ जेडांग स्मारक केंद्र से जुड़े अहम लोगों में शामिल थे. पुलिस ने गुरुवार को यहां छापा मारकर दम्पति समेत पांच लोगों को पकड़ा था.

बालाकृष्णन की उम्र 73 वर्ष और उनकी पत्नी चंदा 67 साल की हैं. एक महीने पहले ब्रिक्सटन स्थित उनके घर से तीन महिलाओं को छुड़ाया गया था. पुलिस ने इस इलाक़े में एक-एक घर जाकर पूछताछ की है.

इस दम्पति के नाम से पूरे लंदन में कुल 13 पते मिले हैं. अधिकारियों का कहना है कि छुड़ाई गईं महिलाओं को कई वर्षों तक शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गईं.

इनमें से एक की उम्र 30 वर्ष, दूसरी की 57 वर्ष और तीसरी 69 वर्ष की है जो ब्रितानी, आयरिश और मलेशियाई मूल की हैं.

'मकड़ी के जाल में फंसी मक्खी'

पुलिस का कहना है कि 30 वर्षीय ब्रितानी महिला ने लगभग अपनी पूरी उम्र ग़ुलामी में गुज़ारी, जिसके पास अपने जन्म प्रमाणपत्र के सिवा कोई आधिकारिक दस्तावेज़ नहीं है.

डेली मेल में छपी ख़बर में कहा गया है कि महिला ने इस दौरान अपने पड़ोसियों के नाम 200 से अधिक पत्र और कुछ कविताएं भी लिखीं.

एक ख़त में महिला ने लिखा है कि वो ख़ुद को ऐसा महसूस करती हैं जैसे कोई मक्खी, मकड़ी के जाल में फंस गई हो.

ये पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब आयरिश महिला ने फ्रीडम चैरिटी नामक संस्था को फोन करके बताया कि उसे उसकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ बंधक बनाकर रखा गया है.

संदिग्ध दम्पति को गुरुवार को गिरफ़्तार कर लिया गया था, लेकिन ज़मानत पर अगले साल जनवरी तक के लिए उन्हें छोड़ दिया गया है.

'जटिल मामला'

पुलिस ने इस मामले को जटिल बताया है. भारतीय और तंजानिया मूल के पति-पत्नी 1960 के दशक में ब्रिटेन आए थे.

उन्हें 1970 के दशक में भी गिरफ्तार किया गया था लेकिन पुलिस ने ये नहीं बताया है कि उन्हें क्यों गिरफ़्तार किया गया था और ये भी नहीं पता कि तब उन्हें आरोपित भी किया गया था या नहीं.

मामले की जटिलता को ध्यान में रखते हुए 37 अधिकारियों का दल इसकी पड़ताल में जुटा है.

एक प्रवक्ता कहना है, ''ये बेहद जटिल मामला है जिसमें कई लोग शामिल हैं और इसकी जड़ें कई साल पुरानी हैं.''

प्रवक्ता ने जांच के इस स्तर ज़्यादा ब्योरा देने से इंक़ार कर दिया है.

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