सब कुछ वैसा ही जैसा माओ छोड़ गए थे

  • 28 नवंबर 2013
 नैनझिकुन, चीन

माओ त्से-तुंग पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के संस्थापक थे. उनका निधन साल 1976 में हुआ. चीन के एक छोटे से गांव नैंझिकुन में उनकी मौजूदगी अब भी पूरी शिद्दत से महसूस की जा सकती है. इस गांव में चीन का आखिरी माओवादी कम्यून पहले की तरह चल रहा है.

नैंझिकुन गांव में बारिश हो या साफ मौसम, हर सुबह 6.15 बजे चीन के ताकतवर नेता रहे माओ की प्रशंसा वाले गीत हवा में घुलने लगते हैं. इसकी आवाज़ खाली सड़कों के किनारों के लैंप-पोस्टों पर लगे लाउडस्पीकर के ज़रिए हर ओर फैलती है.

नैंझिकुन ऐसी जगह है, जहां समय पहले की तरह खड़ा दिखता है. ये चीन में चुनिंदा तौर पर बचे माओवादी कम्यूनों में एक है, जो एक मिट चुके राज की कहानी कहता है.

यहां वो गाने बजते हैं, जिन्हें सुनकर बहुत से चीनी अपने और अपने अभिवावकों के बचपन की याद ताजा कर सकते हैं, "पूरब लाल है, सूर्य उग रहा है, चीन के पास माओत्से तुंग हैं, जो लोगों की खुशहाली लेकर आए हैं..वह देख रहे हैं आगे..बहुत आगे...''

पुराने दिनों की कहानी

60 साल पहले ऐसे कम्यून हर जगह थे, हर कस्बे और हर गांव में. लेकिन अब वो बस यहां है यानी मध्य चीन के हेनान प्रांत में.

गांव के लोग आगंतुकों का स्वागत करके खुश हैं. गांव के प्रचार प्रमुख मुझे चारों ओर घुमाते हैं.

यहाँ का अभिलेखागार पुराने दिनों की कहानी कहता नज़र आता है.

ऐतिहासिक तस्वीरों में जर्जर कॉटेज की तस्वीरें हैं. इसी में एक चित्र है कि किस तरह बैल की जगह दो पुरुष हल के सहारे खेत को जोत रहे हैं, तीसरा शख्स उनका मार्गदर्शन कर रहा है. ऐसी मेहनतकश जिंदगी अब शायद ही लोगों को याद हो.

1960 के दशक में देश में लागू नियम काफी कड़े थे. जब चीन के गांव माओवादीकम्यून के सिद्धांतों से 1980 के दशक में हटने लगे तो हर ओर स्थितियां बदलने लगीं.

बदलाव भी

नैंझिकुन की ग्रामीण झुग्गियों को रिहायशी इमारतों में बदल दिया गया और गांव के प्रवेश द्वार पर परंपरागत चीनी मेहराब वाला प्रवेश द्वार बनाया गया.

वहां माओ की विशाल प्रतिमा वाला बड़ा चौराहा है, जिसमें हर ओर अन्य कम्युनिस्ट नायकों, कार्ल मार्क्स, लेनिन, स्तालिन के पोस्टरों के साथ लहराते हैं ढेर सारे लाल रंग के बैनर.

इस गांव का अपना अख़बार और रेडियो स्टेशन है, जिस पर चेयरमैन माओ से जुड़े गानों को सुनकर हर सुबह नैंझिकुन के लोगों की नींद खुलती है. गांव के टीवी स्टेशन के पास बहुत सारे समारोहों के टेप हैं.

यहां 15 साल पहले जापानी निवेश से नूडल्स फैक्ट्री की स्थापना की गई. नूडल्स बनने के बाद आखिर में इसका स्वाद भी चखाया जाता है, जो शानदार होता है.

इसे पेश करने का काम उस युवा महिला का है, जिसकी हाल ही में इस गांव के एक लड़के से शादी हुई. ली जुएनजुन नाम की ये युवती भी अब कम्यून की सदस्य है.

वह कहती है कि थोड़ी दूर की भीड़भाड़ और आधुनिक शहरी चीन की नई जीवनशैली की तुलना में उन्हें ये शांत ज़िंदगी ज़्यादा अच्छी लगती है.

सादा जीवन

Image caption नैंझिकुन में पुराने चीन की जीवन शैली को संजो कर रखा गया है.

नैंझिकुन में कोई कार नहीं दिखती, बस कुछ इलेक्ट्रिक स्कूटर दिखते हैं, जिनके टू-स्ट्रोक इंजन को अभी बदला गया है. साथ ही दिखते हैं तीन पहियों वाले ट्रक.

ये जगह सपाट, साफ और कमर्शियल एडवरटाइज़िंग जैसे दिखावों से मुक्त है. हां, यहां ढेर सारे माओवादी बैनर और स्लोगन ज़रूर दिखते हैं.

यहां मूल वेतन कम है, महज 32 डॉलर यानी करीब दो हज़ार रुपए महीना. लेकिन कम्यून के सदस्यों को बग़ैर किसी किराए के अपार्टमेंट, सुविधाएं, खाने के सामान तो मुहैया कराए ही जाते हैं साथ ही उनके लिए शिक्षा भी मुफ़्त है.

आधुनिक चीन यहां से कुछ ही दूर है लेकिन परिवार का बंधन लोगों को वहां जाने नहीं देता.

चीन में अतीत की यादें संजोए ऐसी जगह को देखना वाकई दिल को छूने वाला है. खासकर उस चीन में जो तेज़ी से आधुनिकता और चमक-दमक की ओर बढ़ रहा है, जहां शहरीकरण की गति खासी तेज़ होती जा रही है.

चीन के निर्यात को सस्ते श्रम से गति मिलती रही है, पिछले 30 सालों में उसकी तरक्की की ये बड़ी वजह है. लेकिन अब आधिकारिक तौर पर लोगों को ज़्यादा संतुलित अर्थव्यवस्था के दायरे में लाया जा रहा है.

चीन के अधिकारियों का ध्यान अब ऐसे समाज पर है जिसमें लोग खुद अपने घर, कार और स्मार्टफोन के साथ 21वीं सदी की ज़रूरी चीज़ें खरीदें. ऐसे में नैंझिकुन बदल रहे चीन से काफी अलग लगता है.

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