स्तन कैंसर के लिए कोलेस्ट्रॉल भी ज़िम्मेदार

कोलेस्ट्रॉल स्तन कैंसर के विस्तार के लिए ज़िम्मेदार है. वैज्ञानिकों का कहना है कि शोध से इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली स्टेटिंस जैसी दवाइयां कैंसर रोक सकती हैं.

जर्नल साइंस में प्रकाशित इस रिपोर्ट से यह जानने में मदद मिलती है कि मोटापा कैंसर की एक प्रमुख वजह है.

हालांकि कैंसर के लिए काम करने वाली संस्थानों ने चेताते हुए कहा कि महिलाओं को स्टेटिंस लेने की सलाह देना अभी जल्दबाज़ी होगी.

अभी तक मोटापे को कई तरह के कैंसर के साथ जोड़ कर देखा जाता रहा है, जिसमें स्तन, आंतें और गर्भाशय का कैंसर शामिल है.

ज्यादा वज़न वाले लोगों में वसा ओएस्ट्रोजेन जैसे हार्मोन को बढ़ाने में सहायक है, जो कैंसर के लिए ज़िम्मेदार माने जाते हैं.

24एचसी ज़िम्मेदार

अमरीका स्थित ड्यूक यूनीवर्सिटी मेडिकल सेंटर के एक दल के अनुसार कोलेस्ट्रॉल के भी इसी तरह के प्रभाव देखे गए हैं. कोलेस्ट्रॉल शरीर में 27एचसी के रूप ले लेता है, जो ओएस्ट्रोजेन में तब्दील हो जाता है और हार्मोन की तरह ही प्रभाव छोड़ता है.

चूहों पर किए गए प्रयोगों से पता चलता है कि वसा की अधिक ख़ुराक रक्त में 24एचसी के स्तर को बढ़ा देती है, जो कैंसर की वजह होती है. यह ट्यूमर सामान्य ख़ुराक वाले चूहों को होन वाले ट्यूमर से 30 फ़ीसदी बड़े होते हैं.

इन ट्यूमर के फैलने की संभावना भी रहती है. प्रयोगशाला में पाया गया है कि 27एचसी की मात्रा बढ़ाने पर मानवीय स्तन कैंसर के टिशू ज्यादा तेज़ी से बढ़ते हैं.

इस दल के एक शोधकर्ता प्रोफ़ेसर डोनाल्ड मैकडोनाल्ड ने कहा कि "बहुत से अध्ययनों में मोटापे और कैंसर के बीच संबंध पाया गया है. विशेषकर बड़े हुए कोलेस्ट्रॉल का स्तन कैंसर से संबंध पाया गया है, हालांकि इसके पीछे की वजह का अभी तक पता नहीं चला है."

उन्होंने कहा कि "अभी तक हमें एक अणु के बारे में पता चला है, जिसके लिए कोलेस्ट्रॉल को ज़िम्मेदार नहीं कह सकते हैं. लेकिन कोलेस्ट्रॉल के एक घने मेटाबोलाइट-27एचसी का ज़रूर पता चला है जो ओएस्ट्रोजेन हार्मोन की तरह काम करता है और स्वतंत्र रूप से स्तन कैंसर के लिए उत्तरदायी सिद्ध हो सकता है."

शोधकर्ताओं का कहना है कि "उनकी शोध से इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि कम कोलेस्ट्रॉल से स्तन कैंसर विकसित होने का जोखिम कम रहता है."

दिल की बीमारियों का जोखिम कम करने के लिए लाखों लोग पहले ही स्टेटिंस दवा का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि इससे पहले के अध्ययनों से पता चल है कि स्टेटिंस स्तन कैंसर के जोखिम को कम करता है.

स्वस्थ खुराक

स्वस्थ ख़ुराक एक और तरीक़ा है, जिससे रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम किया जा सकता है.

ब्रेकथ्रो ब्रेस्ट केंसर संस्थान की डॉ. हन्ना ब्रिजेज़ ने कहा कि "अब तक की शोध में कोलेस्ट्रॉल के स्तर, स्टेंटिंस के इस्तेमाल और स्तन कैंसर के बीच कोई पुख़्ता संबंध नहीं कहा जा सकता है.

हालांकि इस शुरूआती अध्ययन के नतीजे सराहनीय हैं और आगे की शोध से इनकी पुष्टि हो जाती है, तो हम समझ पाएंगें की स्तन कैंसर के विकसित होने के क्या कारण होते हैं."

कैंसर रिसर्च यूके की डॉ. एम्मा स्मिथ ने कहा कि "यह अध्ययन उत्सुकता पैदा करने वाला है क्यों कि इसमें पहली बार चूहे में केलोस्ट्रॉल और स्तन कैंसर के बीच सीधा संबंध पता चला है.

लेकिन भविष्य में स्तन कैंसर से निपटने में यह कितनी मददगार होगी यह कहना जल्दबाज़ी होगी."

उन्होंने कहा कि जब तक की हमें कैंसर पर स्टेटिंस के प्रभाव के बारे में और कोई जानकारी मिल पाती है, स्तन कैंसर को रोकने का सबसे अच्छा तरीक़ा है वज़न नियंत्रित रखा जाए, अल्कोहल में कमी की जाए और तंदुरुस्त रहे.

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