थाईलैंडः प्रदर्शनकारियों के लिए निर्णायक दिन

थाईलैंड, बैंकॉक प्रदर्शन

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में सरकारी इमारतों को सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों से बचाने के लिए दंगा पुलिस के साथ सेना को भी तैनात किया गया है.

गवर्नमेंट हाउस के बाहर बैरीकेड तोड़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख सरकारी इमारतों में घुसने की धमकी दी है, जिनमें प्रधानमंत्री यिंगलक चिनावाट का मुख्यालय भी शामिल है.

चिनावाट को हटाने के उद्देश्य से किए जा रहे प्रदर्शनों का रविवार को आठवां दिन है.

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नेताओं का कहना है कि यह निर्णायक दिन होगा. उन्होंने इसे "वी-डे" घोषित किया है और इसके लिए "जनता के तख़्तापलट" का आह्वान किया है.

लोकतंत्र के लिए सरकार विरोधी नागरिक आंदोलन ने सरकार पर चौतरफ़ा हमले का ऐलान किया है. इसका उद्देश्य सरकार को हटाकर "जनता की परिषद" लाना है.

लोगों का कहना है कि यिंगलक सरकार को दरअसल उनके निर्वासित भाई थाक्सिन चिनावाट चला रहे हैं.

दो की मौत

पुलिस के अनुसार क़रीब 30,000 सरकार-विरोधी प्रदर्शनकारी आठ स्थानों पर जुटे हुए हैं.

बैंकॉक में बीबीसी संवाददाता जोनाह फ़िशर का कहना है कि सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी कई टीवी स्टेशनों में घुस गए हैं और प्रोग्रामिंग पर नियंत्रण करने के लिए बात कर रहे हैं. उनके अनुसार स्थिति लगातार तख़्तापलट की कोशिशों जैसी होती जा रही है.

बैंकॉक पोस्ट के अनुसार सरकार-विरोधी प्रदर्शनकारियों ने थाईलैंड के पीबीएस टेलीविज़न स्टेशन पर क़ब्ज़ा कर लिया है. उन्होंने पीबीएस अधिकारियों को विरोध प्रदर्शन के नेताओं के भाषण प्रसारित करने को कहा है.

प्रदर्शनकारियों के एक अन्य गुट को पुलिस ने पुलिस हेडक्वार्टर पर रोका हुआ है.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार प्रदर्शनकारियों के पुलिस मुख्यालय या गवर्नमेंट हाउस से हटने की बहुत कम संभावना है.

अधिकारियों ने यिंगलक के देश छोड़कर जाने की अफ़वाहों का खंडन किया है लेकिन यह पता नहीं चल रहा कि वह हैं कहां.

इससे पहले यिंगलक ने कहा था कि सरकार प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कम से कम शक्ति का इस्तेमाल करेगी.

शनिवार को सरकार विरोधी और समर्थक गुटों के भिड़ जाने से दो लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हो गए थे.

अब तक सामान्यतः शांतिपूर्ण रहा प्रदर्शन तब हिंसक हो गया जब सरकार समर्थकों को बैंकॉक स्टेडियम ला रहे वाहनों पर छात्रों ने हमला कर दिया. गोलियां चलाई गईं लेकिन यह साफ़ नहीं है कि किसकी ओर से.

रविवार की सुबह सरकार समर्थक "लाल कमीज़" नेताओं ने कहा कि वे अपनी रैली को स्टेडियम में ख़त्म कर रहे हैं ताकि सुरक्षा बलों को विरोधी प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने का मौका मिल सके.

सबसे बड़ा प्रदर्शन

बैंकॉक में मौजूद बीबीसी के जॉनथन हेड कहते हैं कि सैन्य कमांडर इस संघर्ष में पड़ने से बच रहे हैं लेकिन वे सेना को तैनात करने पर तैयार हो गए हैं. इसकी शर्त यह है कि सेना अपने साथ हथियार नहीं रखेगी और दंगा पुलिस के पीछे प्रमुख सरकारी इमारतों का घेरा बनाकर रहेगी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगर बैंकॉक के बाहर भारी समर्थन वाली यिंगलक की पार्टी के समर्थक राजधानी की ओर आते हैं तो हिंसा होने की आशंका बहुत ज़्यादा है.

शुक्रवार को ही यिंगलक ने समयपूर्व चुनाव की संभावना से इनकार किया था. बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि देश में अभी इतनी शांति नहीं है कि चुनाव करवाए जा सकें.

उन्होंने इस संकट के हल के लिए फिर से वार्ता आह्वान किया था.

पिछले हफ़्ते प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों को घेर लिया था. वे जबरन सेना मुख्यालय के परिसर में घुस गए थे, पुलिस मुख्यालय की बिजली काट दी थी और थाईलैंड की अपराध से लड़ने वाली प्रमुख संस्था को बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया था.

पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे सुथेप थागसुबेन की गिरफ़्तारी के आदेश दिए हैं लेकिन अभी तक उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश नहीं की गई है.

साल 2010 के बाद थाईलैंड में यह सबसे बड़ा प्रदर्शन है. 2010 में थाक्सिन के लाल कमीज़ समर्थकों ने राजधानी के प्रमुख इलाक़ों पर कब्ज़ा कर लिया था. उस वक़्त दो महीने चले धरने के दौरान 90 लोग मारे गए थे जिनमें ज़्यादा नागरिक प्रदर्शनकारी थे.

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