पुतिन इतने लेट लतीफ़ क्यों हैं?

  • 1 दिसंबर 2013
व्लादिमीर पुतिन पोप फ्रांसिस के साथ

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की लेटलतीफ़ी एक बार फिर सुर्ख़ियों में तब आई जब वे हाल ही में वेटिकन के दौरे पर गए थे जहां उन्होंने पोप फ्रांसिस को लंबा इंतज़ार कराया.

दैनिक मोस्कोविस्की कोम्सोमोलेट्स की ख़बर के मुताबिक़, बीते सोमवार को दोनों की मुलाक़ात तय थी लेकिन रूसी राष्ट्रपति ने पोप को 50 मिनट इंतज़ार कराया. इस दौरान अधिकारी खुले आसमान के नीचे कंपकपाते रहे जो पुतिन के स्वागत के लिए खड़े थे.

बताया जाता है कि पुतिन को उनके होटल के बाहर महिला प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था जो दरअसल पूसी रॉइट बैंड की समर्थक थीं.

पोप और इटली के मीडिया को पुतिन से मानों यही उम्मीद थी, शायद तभी वे पुतिन की देरी को पचा गए. लेकिन दक्षिण कोरिया के मीडिया में ऐसा नहीं हुआ.

ये बात नवम्बर की ही है जब पुतिन ने राजधानी सोल की यात्रा के दौरान दक्षिण कोरिया की राष्ट्रपति पार्क ग्यून हाइ को आधे घंटे तक इंतज़ार कराया था और वजह ये थी कि पुतिन मार्शल आर्ट के बारे में कुछ चर्चा करने के लिए बीच रास्ते में रूक गए थे.

'मिस्टर पुतिन, बी ऑन टाइम नेक्स्ट टाइम'

इससे गुस्साए एक कोरियाई अख़बार ने तब सुर्खी लगाई थी- 'मिस्टर पुतिन, बी ऑन टाइम नेस्ट टाइम'

लेकिन अपेक्षाकृत उदार रूसी वेबसाइट स्लोन डॉट आरयू ने लिखा कि कोरिया के लोगों को निराश होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि सिर्फ़ आधा घंटा देरी से आने का मतलब है कि पुतिन आपको सम्मान दे रहे हैं.

पुतिन इससे पहले क्वीन एलिज़ाबेथ, जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल, अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी को भी मुलाक़ात के लिए इंतज़ार करा चुके हैं.

और तो और साल 2002 में एक हवाई हादसे में मारे गए बच्चों के माता-पिता को पुतिन ने पूरे दो घंटे इंतज़ार कराया था.

पुतिन की पहचान

पुतिन के नज़दीकी एक व्यक्ति ने मोस्कोविस्की कोम्सोमोलेट्स के मुख्य राजनीतिक स्तम्भकार मिखाइल रोस्तोवस्की को इसकी वजह बताई, ''अहम मुलाक़ातों से पहले पुतिन किसी भी सूचना की अक्सर दो बार पड़ताल करते हैं जिसकी वजह से उन्हें देर हो जाती है.''

इतना ही नहीं, पुतिन से विरक्त हो चुकीं उनकी पत्नी ल्यूडमिला कहती हैं कि जब वे दोनों डेटिंग कर रहे थे, तब भी पुतिन उन्हें इंतज़ार कराते थे.

पुतिन भी अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए कहते हैं, ''मेरे पास कपड़े पहनने का भी वक्त नहीं होता था और मैं बिना कोट पहने किसी बुलेट की तरह स्कूल की ओर उड़ता था.''

शायद इसी वजह से रोस्तोवस्की कहते हैं कि देर से आना पुतिन की पहचान बन चुकी है.

और इसी पहचान को विपक्षी ब्लॉगर एंड्री मैग्लिन इन शब्दों में व्यक्त करते हैं, ''इस बात की पूरी संभावना है कि वे ख़ुद अपने अंतिम संस्कार में भी देर से पहुंचे.''

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