25 किलो का क्रॉस, हजारों मील का सफ़र

लिंडसे हैमन, क्रॉस

तीर्थयात्रा आज भी लाखों लोगों की ज़िंदगी का अहम हिस्सा है लेकिन एक व्यक्ति ऐसा है जो तीर्थयात्रा की परंपरा को एक ख़ास तरीके से आगे बढ़ा रहा है.

61 साल के लिंडसे हैमन अपने कंधे पर 25 किलोग्राम वजन का क्रॉस रखकर चलते हैं.

लिंडसे हैमन पिछले 26 सालों के दौरान ब्रिटेन के अलावा बांग्लादेश, नेपाल, भारत और श्रीलंका जैसे दुनिया के दूरदराज़ के इलाकों में 5,000 मील की यात्रा कर चुके हैं.

इस यात्रा के दौरान उनका लकड़ी से बना क्रॉस हमेशा उनके साथ रहा. इस क्रॉस के निचले हिस्से पर पहिया लगा हुआ है.

पढ़ें: अभी डरना ज़रूरी है..!

कैसे हुई शुरुआत

हैमन बताते हैं, "मैंने एक छोटे रास्ते से शुरुआत की, लैंड्स एंड से प्लायमाउथ तक. कुछ महीनों बाद प्लायमाउथ से लंदन और फिर आयरलैंड... इसके बाद लंदन से बर्लिन, फिर बर्लिन से मॉस्को और बर्लिन से पेरिस, स्लोवाकिया और हंगरी."

हैमन के एक करीबी दोस्त का भगवान से भरोसा उठ गया था. ऐसे में एक ईसाई होने के नाते हैमन ने उस दोस्त को ईश्वर की राह पर वापस लाने के लिए उसके पास जाने का फैसला किया. इस यात्रा के दौरान प्रतीकात्मक चिन्ह के रूप में उन्होंने एक क्रॉस साथ ले जाने का फैसला किया.

हैमन बताते हैं, "पहले कस्बे में जहां-जहां से मैं गुजरा, वहां लोगों पर इसका अद्भुत असर हुआ. लोग अपनी कार रोक कर मेरे पास आते और बातें करते. लोग मुझे पब में आमंत्रित करते. पूरी तरह से अनजान लोग मुझसे कहते, "आप ऐसा क्यों कर रहे हैं. ये सब क्या है?""

उन्होंने क्रॉस के साथ अपनी पहली यात्रा 1987 में की थी.

पढ़ें: 'कीमा और दाल बना लेते हैं' बराक ओबामा!

तीसरा क्रॉस

वह कहते हैं कि हमारे समाज की सबसे बड़ी समस्या अकेलापन है. लोग अपने दुख साझा करने के लिए तैयार ही नहीं हैं.

इस समय वो जिस क्रॉस को लेकर चलते हैं वो उनका तीसरा क्रॉस है.

हैमन ने बताया, "पहला क्रॉस रीडिंग रॉक फेस्टिवल में चोरी हो गया और दूसरे को भारत के सीमा शुल्क विभाग ने कुछ साल पहले रोक लिया था."

इस क्रॉस के तीन हिस्से हैं, जिन्हें बोल्ट से जोड़ा गया है. इसके बावजूद इसे हवाई जहाज़ के ज़रिए ले जाना काफी चुनौतीपूर्ण है.

इस क्रॉस के निचले हिस्से में लगे पहिए को लेकर भी लोग सवाल करते रहते हैं क्योंकि ईसा मसीह के क्रॉस में तो पहिए लगे नहीं थे.

पढ़ें: अफगानिस्तान के सिल्क रोड की खोज

लोगों की प्रतिक्रियाएं

हैमन बताते हैं कि उनसे यह सवाल लाखों बार पूछा जा चुका है.

दूरदराज के हिस्सों में इस क्रॉस के साथ यात्रा करना काफी मुश्किल है और कई बार तो चोट लगने का डर भी बना रहता है. इसलिए उन्हें सफर के दौरान काफी सावधानी बरतनी होती है.

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में उन्हें मिलने वाली प्रतिक्रियाएं काफी नाटकीय होती हैं. हैमन के मुताबिक, "ज़्यादातर लोगों को आश्चर्य होता है, लेकिन अक्सर किसी गांव में जाने पर आप आसानी से तनाव देख सकते हैं."

वह बताते हैं कि कई बार हम रुक कर बात करना पसंद करते हैं और कई बार यूं ही आगे निकल जाते हैं.

पढ़ें: करिए 'सबसे डरावने हाइवे' की सैर

आगे का सफ़र

शहर की सड़कों पर उन्हें अच्छे-बुरे दोनों तरह के कमेंट मिलते हैं.

हैमन चीन, अफ्रीका और दक्षिण अमरीका की यात्रा करना चाहते हैं और अंतिम दम तक क्रॉस के साथ अपने सफर को जारी रखना चाहते हैं.

हैमन ने कहा, "मुझे केवल इस बात का दुख है कि मैंने इसे पहले क्यों नहीं शुरू किया. मैं इसके साथ उन इलाकों में जाना चाहता हूं जहां लोग आमतौर पर नहीं जाते हैं. मैं कजाखस्तान या उजबेकिस्तान जाना चाहूंगा."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार