समुद्र में 20 फीट नीचे रात बिताएंगे?

पानी के भीतर होटल

जब लग्ज़री होटल रूम की बात होती है तो कई लोग कल्पनाओं की उड़ान भरने लगते हैं. एक ऐसी ही कल्पना अब साकार होने जा रही है.

ये कल्पना है समुद्र में पानी के बीच बने होटल, जहां आप आरामदायक ही नहीं, बल्कि लहरों के नीचे, रंगबिरंगी मछलियों और समुद्री जीवों के बीच अनोखा अनुभव प्राप्त कर सकते हैं.

आने वाले दिनों में पेंटहाउस सुइट के बजाय समुद्र की सतह से 20 फीट नीचे स्थित कमरा लोगों की पहली पसंद बनकर उभर सकता है.

लहरों के नीचे मछलियों के बीच सोने की कल्पना ख़तरनाक लग सकती है लेकिन पानी के अंदर कमरे बनाने के लिए ज़रूरी तकनीक अच्छी तरह स्थापित और जाँची परखी है.

पानी के अंदर 'वाटर डिस्कस' नाम से होटल बनाने की योजना बना रही पोलैंड की कंपनी 'डीप ओशन टैक्नोलॉजी' में प्रोजेक्ट मैनेजर रॉबर्ट बर्सीविक्ज़ तो ऐसा ही मानते हैं.

इस होटल को खींचकर किसी भी उपयुक्त जगह पर ले जाया जा सकेगा और स्थापित किया जा सकेगा.

इस होटल में पानी के भीतर 22 कमरे होंगे. पानी की सतह के ऊपर भी इसी तरह का हिस्सा है और दोनों हिस्सों को सीढ़ियों और लिफ्ट से जोड़ने की योजना है.

फिल्टर

बर्सीविक्ज़ ने कहा, "अब ऐसी पनडुब्बियां बनाना संभव है जो समुद्र में 500 मीटर गहराई तक जा सकती हैं, तो पानी के नीचे होटल बनाना मुश्किल नहीं है."

उनका कहना है कि उस तकनीक को अब नए तरीक़े से इस्तेमाल किया जा रहा है.

पनडुब्बी बनाने से होटल बनाना आसान है क्योंकि होटल को 15 मीटर की गहराई से नीचे नहीं रखा जा सकता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि पानी धूप के लिए फ़िल्टर का काम करता है और 15 मीटर से नीचे नीले रंग के अलावा बाक़ी रंग धुल जाते हैं.

इसका मतलब है कि समुद्र की रंगारंग दुनिया को क़रीब से देखने के लिए होटल के कमरों को छिछले पानी में होना चाहिए.

बर्सीविक्ज़ का कहना है, "हमारी योजना 10 मीटर की गहराई तक कमरे मुहैया कराने की है क्योंकि इसी क्षेत्र में समुद्र का सबसे ख़ूबसूरत नजारा दिखाई देता है."

लेकिन इसमें सबसे बड़ी चुनौती पानी के नीचे स्थित होटल से होने वाले शोर को क़ाबू में रखना है. शोरगुल से मछलियां और दूसरे समुद्री जीव दूर भाग सकते हैं जिससे पानी के नीचे होटल बनाने का मकसद ही ख़त्म हो जाएगा.

डिजाइन

बर्सीविक्ज़ ने कहा कि सावधानी से डिजाइन बनाकर इस समस्या का समाधान ढूंढ लिया गया है. इसके लिए शौचालय, पंप और वातानुकूलन से जुड़े उपकरणों को होटल के बीच वाले हिस्से में रखा जाएगा.

साथ ही यह भी अहम है कि यह होटल स्थानीय क़ानूनों और नियमों का पालन करे. लेकिन यह जटिल मामला हो सकता है क्योंकि इस तरह के निर्माण में कौन से नियम लागू होंगे.

बर्सीविक्ज़ ने कहा, "समुद्री नियमों को लेकर हर देश के अपने अपने क़ानून हैं. इस होटल को आप पनडुब्बी जैसा उपकरण भी मान सकते हैं, एक जहाज़ भी मान सकते हैं या फिर समुद्र से तेल निकालने के लिए बनाया गया ढांचा भी मान सकते हैं."

इस होटल को स्थापित करने के लिए समुद्र में जगह खोजना भी मुश्किल हो सकता है.

साउथम्पटन विश्वविद्यालय में समुद्री क़ानूनों के विशेषज्ञ डॉक्टर एलेक्ज़ेंद्रोस तोवास के मुताबिक़ ब्रिटेन के तट से 12 नॉटिकल मील के अंदर होटल स्थापित किया जा सकता है लेकिन इसके लिए सरकार से अनुमति लेनी पड़ेगी. साथ ही इसे समुद्री पर्यावरण के लिए बनाए गए अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का भी पालन करना पड़ेगा.

लेकिन फिलहाल ऐसे होटल को ब्रिटेन के जलक्षेत्र में बनाए जाने की कोई योजना नहीं है.

सर्फिंग और नौकायन

ब्रिटिश हॉस्पिटैलिटी एसोसिएशन के प्रवक्ता तबिता एल्डरिच स्मिथ का कहना है कि ऐसा होटल ब्रिटेन में शायद ही कभी बन पाए.

उन्होंने कहा, "ऐसा होटल शानदार होगा लेकिन हमारा ठंडा और ज्वार भाटा वाला समुद्री पानी भीतर ठहरने के बजाए सर्फिंग और नौकायन के लिए बेहतर हैं."

अमरीका के दक्षिण पूर्वी क्षेत्र में स्थित गरम पानी वाले समुद्र इसके लिए उपयुक्त हैं. फ्लोरिडा के तट पर स्थित दो बेडरूम वाला जूल्स अंडरसी लॉज साल 1986 से आंगतुकों को 31 फीट की गहराई पर ठहरा रहा है.

इस ढांचे को 1970 के दशक में प्यूर्तो रिको के तट पर समुद्री प्रयोगशाला के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था.

लेकिन जूल्स का तरीका डीप सी टेक्नोलॉजी के प्रस्तावित होटल से अलग है. इसका पूरा ढांचा पानी के नीचे है और केवल स्कूबा गियर पहनकर ही वहां जाया जा सकता है.

तंज़ानिया में पेम्बा द्वीप के तट पर मांटा रिज़ॉर्ट में पानी के नीचे कमरे बने हैं. यह वॉटर डिस्कस या जूल्स अंडरसी लॉज की तरह समुद्र की तलहटी से नहीं जुड़ा है.

यह समुद्र की सतह पर तैर रहे एक ढांचे से जुड़ा है. बहने से बचने के लिए इसने नाव की तरह लंगर डाला है. आंगतुक तैर रहे ढांचे से सीढ़ियों के ज़रिए होटल के कमरों में घुसते हैं.

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