नन्हे बिनबिन को मिलीं कृत्रिम आंखें

Image caption गुओ बिन को कृत्रिम आंखे लगाई गई हैं.

एक हमले में अपनी दोनों आंखें गवाँ देने वाले चीन के एक छह साल के बच्चे को इलाज के बाद दक्षिणी शहर शेनझेन के एक अस्पताल से छुट्टी मिल गई है.

चीन के शांक्सी प्रांत के फेंग्ज़ी में यह घटना उस समय हुई जब बच्चा खेलने के लिए घर से बाहर गया था.

कई घंटों तक लापता रहने के बाद जब बच्चा माता पिता को मिला तो उसकी आंखें निकाली हुई थीं और वो खून से लथपथ था.

गुओ बिन नाम के इस लड़के की आंख लौटाने के लिए उसे कृत्रिम आंखें लगाई गई हैं. इस दौरान उसके कई ऑपरेशन करने पड़े.

'मां, ये आसमान हमेशा काला क्यों दिखता है'

इन ऑपरेशनों के बावजूद उसकी रोशनी वापस नहीं लौटी है, लेकिन डॉक्टरों को उम्मीद है कि वे आंखों में ऐसे सेंसर फ़िट कर सकेंगे जिसके ज़रिए बच्चा जाने-पहचानी जगहों पर खुद ही आ-जा सकेगा.

पुलिस को संदेह है कि उसकी दिवंगत चाची ने यह हमला किया था.

इस घटना के छह दिन बाद इस महिला ने एक दीवार से कूद कर कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी. हालांकि ये बात अभी तक साफ़ नहीं हो सकी है कि आखिर उसने बच्चे पर हमला क्यों किया.

बिनबिन की दुनिया

Image caption गुओ बिन ने बदलावों को अच्छी तरह अपना लिया है.

गुओ बिन को उसके घरवाले बिनबिन नाम से बुलाते हैं. हमारे संवाददाता ने बताया कि गुओ बिन का इलाज सी-एमईआर डेनिस लैम आई हॉस्पिटल में चल रहा था और उसने अस्पताल से छुट्टी मिलने के मौके पर आयोजित विदाई समारोह में संगीत पर डांस भी किया.

डॉक्टरों का कहना है कि कृत्रिम आंखें काफ़ी हद तक सामान्य आंखों की तरह ही दिखती हैं और उसी तरह घूम सकती हैं, लेकिन इनके ज़रिए आंखों की रोशनी को वापस नहीं पाया जा सकता है.

उम्मीद है कि अगली गर्मियों तक उसे नेविगेशन सेंसर मिल जाएंगे जिसके ज़रिए उसके लिए चलना फिरना अधिक आसान हो जाएगा.

बिनबिन की मां वांग वेनली ने स्थानीय मीडिया को बताया कि अब वो अपने कपड़े पहन सकता है, मंजन कर सकता है और अपने आप सीढ़ियों पर चढ़ सकता है.

उन्होंने अस्पताल के लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उसने बदलावों को अच्छी तरह अपना लिया है और वो काफ़ी स्मार्ट है.

इस हमले के बाद चीन के लोगों ने काफ़ी चिंता जताई थी और वहां बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा के विरोध में जोरदार प्रतिक्रिया देखने को मिली.

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