मंडेलाः 'जिसने खींचा दुनिया का ध्यान'

नेल्सन मंडेला श्रद्धांजलि

दक्षिण अफ़्रीका के नेता नेल्सन मंडेला को रविवार को उनके पैतृक गाँव कुनु में दफ़ना दिया गया है. परिवार के सदस्यों, मित्रों समेत इस मौके पर उपस्थित देश-विदेश के विभिन्न धार्मिक और राजनैतिक नेताओं ने मंडेला को श्रद्धांजलि दी.

मंडेला के करीबी मित्र अहमद कथराडा ने श्रद्धांजलि दे रहे लोगों से कहा, उन्होंने "एक बड़े भाई" को खो दिया है. कथराडा कई सालों तक रॉबेन द्वीप जेल में मंडेला के साथ जेल में रहे थे.

मंडेला के परिवार ने उनके पारंपरिक काउसा पद्धति से होने वाले अंतिम संस्कार में केवल कुछ सौ मेहमानों को शामिल होने के लिए कहा था.

मंडेला के ताबूत को सेना के जवानों के साथ ही परिवार के सदस्यों और मित्रों ने कांधा दिया.

मंडेला के पोते नदाबा मंडेला ने एक लिखित श्रद्धांजलि भाषण में कहा, "यह मंडेला ही थे जिनके माध्यम से दुनिया ने दक्षिण अफ़्रीका पर नज़र डाला और काले दक्षिण अफ़्रीकी लोगों के संगठित दमन पर ध्यान दिया."

नेल्सन मंडेला की मृत्यु पांच दिसंबर को 95 वर्ष की आयु में हुई.

हवाई सलामी

जब ताबूत को कब्र में रखा जा रहा था तब दक्षिण अफ्रीकी वायु सेना ने मंडेला को हवाई सलामी दी.

सैन्य वायुयान में मंडेला का शव वाटरलू हवाई अड्डे पहुंचा तो उनकी सबसे बड़ी बेटी मकाज़िवे मंडेला और मंडेला की पोती मडिलेका हवाई अड्डे पर मौजूद थीं.

दक्षिण अफ्रीकी के झंडे में लिपटे उनके शव को गार्ड ऑफ़ ऑनर के साथ 32 किलोमीटर की यात्रा के बाद कुनु पहुंचा. मदीबा अपने आख़िरी दिन यहीं बिताना चाहते थे.

नेल्सन मंडेला ने दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेदी सरकार की जगह एक लोकतांत्रिक बहुनस्लीय सरकार बनाने के लिए लंबा संघर्ष किया और इसके लिए वे 27 साल तक जेल में रहे. फ़रवरी 1990 में नेल्सन मंडेला को दक्षिण अफ़्रीका की सरकार ने जेल से रिहा कर दिया.

वर्ष 1994 में दक्षिण अफ्रीका के पहले काले राष्ट्रपति का पद संभालते हुए उन्होंने कई अन्य संघर्षों में भी शांति बहाल करवाने में अग्रणी भूमिका निभाई.

वर्ष 1918 में जन्मे नेल्सन मंडेला को वर्ष 1993 में संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार और वर्ष 1990 में भारत रत्न दिया गया था.

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