हिटलर का नामो-निशाँ मिटाने की कवायद

हिटलर
Image caption वर्ष 1945 के बाद कई शहरों ने तत्काल हिटलर से नागरिकता वापस ले ली है.

दक्षिणी जर्मनी के एक क़स्बे डीएट्रामज़ेल ने एडोल्फ हिटलर को दी गई मानद नागरिकता वापस ले ली है. इससे पहले भी जर्मनी के कई शहर ऐसा कर चुके हैं.

पिछले हफ्ते इस कस्बे के काउंसलरों के बीच हुए मतदान में इस बात को लेकर मतभेद गया था कि हिटलर की नागरिकता वापस ली जाए या नहीं.

उस समय काउंसलर ट्राउदी फ्रोस्ट ने कहा था, "यह इतिहास को विकृत करना है. यह पूरी बहस ही हास्यापस्द है."

लेकिन बुधवार को काउंसलरों ने माफ़ी मांगते हुए इस प्रस्ताव को एकमत से पारित कर दिया.

परिषद ने हिटलर को यह मानद नागरिकता देने वाले जर्मनी के तत्कालीन राष्ट्रपति पॉल वॉन हिंडबर्ग की भी नागरिकता वापस ले ली है.

बदली राय

एक नगर अधिकारी ने कहा कि होलोकॉस्ट के दौरान अपना परिवार खोने वाली एक महिला के बयान ने इस प्रस्ताव का विरोध करने वाले लोगों की राय को बदल दिया.

जर्मनी के 4,000 से ज्यादा शहरों, कस्बों और समुदायों ने हिटलर को उनके शासन काल के दौरान मानद नागरिकता दी थी. इनमें से ज़्यादातर वर्ष 1933 में हिटलर के 44वें जन्मदिन पर दी गई थीं.

Image caption नाज़ियों से हार के बाद जर्मनी के कई शहरों ने हिटलर से मानद नागरिकता वापस ले ली थी.

कुछ कस्बों ने पॉल वॉन हिंडनबर्ग को भी मानद नागरिकता दी थी.

साल 1945 में नाज़ियों की हार के बाद बहुत से शहरों और कस्बों ने तत्काल अपनी मानद नागरिकताएँ वापस ले ली थीं. हालाँकि बहुत ने वापस नहीं भी लीं.

नागरिकता पर बहस

पिछले कुछ सालों में बेहतर शोध तकनीकों के चलते इतिहासकारों और अभिलेख संरक्षण करने वालों को उन स्थानों के बारे में पता चला जहाँ हिटलर अब भी मानद नागरिक है.

द टाइम्स अख़बार के मुताबिक हर महीने औसतन पांच नगरपालिकाओं को यह पता चलता है कि हिटलर उनके मानद नागरिक हैं और वे उनसे यह सम्मान वापस लेने के लिए मतदान करती हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि जो नगर पूर्वी जर्मनी का हिस्सा बन गए उन्हें हिटलर की मानद नागरिकता से ज़्यादा दिक्कत नहीं है. उनका कहना है कि वे एक नई शुरुआत कर चुके हैं. पुरानी घटनाओं के बोझ से उनके वर्तमान का कोई संबंध नहीं.

जर्मनी की पत्रिका डर स्पीगल ने जर्मन डेमोक्रेटिक रिपब्लिक (जीडीआर) में आने वाले शहर बाड डोबर्न और एशरस्लेबन का उदारहण दिया है.

इन शहरों ने हिटलर की मानद नागरिकता वर्ष 2006 में तब ली जब उनके पड़ोसी नगर बिटरफेड की आधिकारिक वेबसाइट पर हिटलर का नाम मानद सदस्यों की सूची में दिखाई देने के बाद बखेड़ा खड़ा हो गया.

कुछ लोगों के अनुसार हिटलर का नाम हटाने में हिचकिचाना ऐतिहासिक ग़लतियों को सुधारने की इच्छाशक्ति की कमी दिखाता है.

जर्मनी के नए वाइस चांसलर सिग्मर गैब्रियल ने अगस्त में कहा था कि उन्हें लगता है कि नागरिकों की सूची से हिटलर का नाम हटाना "तकरीबन ग़लत है. यह एक ऐसी चीज़ को मिटाने की कोशिश है, जिसे मिटाया नहीं जा सकता."

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