एके-47 राइफ़ल के जनक कलाशनिकोफ़ का निधन

मिखाइल कलाशनिकोफ़
Image caption कलाशनिकोफ़ की डिज़ाइन की गई राइफ़ल पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला हथियार है.

कलाशनिकोफ़ राइफ़ल का आविष्कार करने वाले मिखाइल कलाशनिकोफ़ का निधन हो गया है. वे 94 साल के थे.

क्लाशनिकोलव ने जिस ऑटोमैटिक राइफ़ल को डिज़ाइन किया वो दुनिया का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला हथियार है.

दूसरी बंदूकों के मुकाबले बेहद साधारण होने की वजह से इसे बनाना काफ़ी आसान था और इसकी देखरेख भी आसान थी.

हालांकि कलाशनिकोफ़ को रूसी सरकार से सम्मान मिला था लेकिन उन्होंने इस हथियार से बहुत कम ही पैसा कमाया. एक बार उन्होंने कहा था कि उन्होंने घास काटने वाली कोई मशीन डिज़ाइन की होती तो उनके पास ज़्यादा पैसे होते.

मिखाइल कलाशनिकोफ़ को अंदरूनी रक्तस्त्राव की वजह से नवंबर में अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

कलाशनिकोफ़ का जन्म रूस के पश्चिमी साइबेरिया में 10 नवंबर 1919 को हुआ था.

जीवन

Image caption कलाशनिकोफ़ राइफ़ल का इस्तेमाल दुनिया की कई सेनाओं ने किया है.

1938 में वो रूसी सेना में भर्ती हो गए थे. अक्तूबर 1941 में द्वितीय विश्वयुद्ध में टैंक का गोला लगने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था.

जर्मनी के एसॉल्ट राइफ़ल बनाने में महारत हासिल करने से रूस की सेना को अकसर जर्मन हथियारों को झेलने में मुश्किल होती थी.

जब कलाशनिकोफ़ अस्पताल में थे उसी दौरान उनसे एक रूसी सैनिक से कहा कि रूसी सेना ऐसी बंदूक क्यों नहीं बना लेती जो जर्मन हथियारों का मुकाबला कर सके.

इसके बाद कलाशनिकोफ़ ने एक मशीन गन बनाई. उन्होंने कहा था, "इसे आवटोमैट कलाशनिकोवा कहा गया यानी कलाशनिकोफ़ का ऑटोमैटिक हथियार."

शुरुआती मॉडल में कई दिक्कतें थीं लेकिन साल 1947 में उन्होंने आवटोमैट कलाशनिकोवा मॉडल को पूरा कर लिया. बोलने में मुश्किल होने की वजह से इसे संक्षिप्त कर एके 47 कहा जाने लगा.

बाद में इस राइफ़ल का इस्तेमाल दुनिया भर की कई सेनाओं और लड़ाकू गुटों ने किया.

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