हिंसा की आशंका के बीच बांग्लादेश में सेना तैनात

  • 26 दिसंबर 2013

बांग्लादेश में पांच जनवरी को होने वाले चुनाव से पहले हिंसा की आशंका को देखते हुए गुरुवार से सड़कों पर सेना की तैनाती शुरू कर दी गई.

चुनाव का बहिष्कार कर रही मुख्य विपक्षी पार्टी की नेता ख़ालिदा ज़िया ने अपने समर्थकों से राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन में हिस्सा लेने की अपील की है. इसको देखते हुए हिंसा की आशंका बढ़ गई है.

ज़िया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने 29 दिसंबर को राजधानी ढाका में जन मार्च का आह्वान किया है.

उनका कहना है कि यह चुनाव तमाशा है और विपक्ष इसमें तब तक भाग नहीं लेगा जब तक कि प्रधानमंत्री शेख हसीना पद से नहीं हटतीं और निष्पक्ष कार्यवाहक सरकार कामकाज नहीं संभालती.

निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता एस एम असादुजमन ने कहा कि देश के कुल 64 में 59 जिलों में सेना तैनात की जाएगी.

उन्होंने कहा, ''किसी भी तरह की हिंसा होने पर सेना कार्रवाई करेगी. यह अहम इलाकों, सड़कों और हाइवे पर ग़श्त लगाएगी.''

सेना के प्रवक्ता ने तैनात किए जाने वाले जवानों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है लेकिन स्थानीय मीडिया में करीब 50 हजार जवानों को तैनात करने की बात कही जा रही है.

राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी

Image caption शेख हसीना ने कार्यवाहक सरकार के गठन की मांग ख़ारिज़ कर दी है.

ख़ालिदा ज़िया और शेख़ हसीना पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं. बांग्लादेश के इतिहास में अधिकतर समय इन दोनों की ही सरकारें रही हैं.

वे दोनों एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करतीं और जब भी विपक्ष में रहती हैं तो सरकार के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व करती हैं.

प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने कार्यवाहक सरकार की मांग को ठुकरा दिया है.

बांग्लादेश में कार्यवाहक सरकारें चुनाव कराती रही हैं लेकिन प्रधानमंत्री हसीना ने साल 2011 में इस व्यवस्था को ख़त्म कर दिया था.

उन्होंने पिछले माह एक बहुदलीय गठबंधन बनाने और ख़ालिदा ज़िया को उनकी इच्छा के अनुसार पद देने का प्रस्ताव दिया था.

लेकिन ज़िया ने इसे ख़ारिज कर दिया. उनकी पार्टी को लगता है कि कार्यवाहक सरकार की जगह अगर आवामी लीग सत्ता में रहेगी, तो वह चुनाव में धांधली करवाएगी.

आलोचना

विपक्ष के चुनाव को तमाशा करार दे रहा है मगर इस बीच हसीना पांच जनवरी को मतदान कराने पर अड़ी हुई हैं. देश के कोने-कोने में सेना भेजी जा रही है.

Image caption खालिदा ज़िया के नेतृत्व में 18 पार्टियों ने चुनाव में भाग नहीं लेने घोषणा की है.

आशंका जताई जा रही है कि सेना की तैनाती से मुख्य विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और चिढ़ेगी.

बीएनपी और उसकी नेता खालिदा ज़िया ने सेना की तैनाती की आलोचना की है.

उन्होंने कहा कि यह लोगों के ख़िलाफ़ सुरक्षा बलों को खड़ा करना है.

बीएनपी उन 18 विपक्षी पार्टियों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही है जिन्होंने कार्यवाहक निष्पक्ष सरकार का गठन नहीं किए जाने के कारण चुनाव में भाग नहीं लेने की घोषणा की है.

रक्त रंजित इतिहास

सन 1971 में पाकिस्तान से अलग देश बने बांग्लादेश का इतिहास रक्त रंजित ही रहा है.

इस दौरान देश में करीब एक दर्जन बार सैन्य तख्तापलट किया गया. साल 2013 एक सबसे खूनी साल रहा.

चुनाव और 1971 के मुक्ति संग्राम में युद्ध अपराध के दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने को लेकर विरोध प्रदर्शनों में जनवरी से अब तक 268 लोगों की मौत हो चुकी है.

मंगलवार की रात में एक पेट्रोल बम हमले में एक जवान की मौत हो गई जबकि बुधवार को बुरी तरह से घायल दो अन्य लोगों ने दम तोड़ दिया.

देश में अधिकतर हिंसा के लिए जमात-ए-इस्लामी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया जाता है जिस पर पांच जनवरी के चुनाव में भाग लेने पर रोक लगी हुई है. यह देश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी है.

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