अंटार्कटिक में फँसे जहाज़ का क्या हो रहा है ?

शोकलस्की

पूर्वी अंटार्कटिक सागर की मोटी बर्फ़ में फँसे रूस के जहाज़ को बचाने के लिए चीन का बर्फ़ तोड़ने वाला जहाज़ पहुँचने वाला है.

क्रिसमस के दिन मंगलवार को फँसा यह जहाज़ जल्दी ही बचा लिया जाएगा. रूस का जहाज़ एक वैज्ञानिक अभियान अंटार्कटिक सागर में गया था.

चीन का जहाज़ 'स्नो ड्रैगन' समुद्र की बर्फ़ काट कर रूस के 'शोकलस्की' के लिए रास्ता बनाने की कोशिश करेगा. शोकलस्की रूस का एक अकादमिक जहाज़ है जो अंटार्कटिक में शोध करने गया था.

बर्फ़ीले तूफ़ान का डर

रूस के जहाज़ में 74 वैज्ञानिक, कुछ पर्यटक और चालक दल के सदस्य हैं. चीनी जहाज़ अब तक रूसी जहाज़ की दृष्टि सीमा में पहुँच चुका है.

लेकिन इस बात का डर है कि बर्फ़ीले तूफ़ान से रूसी जहाज़ के बचाव कार्य पर असर पड़ सकता है.

बर्फ़ की मोटी चादर

स्नो ड्रैगन के अलावा बर्फ़ तोड़ने वाले दो अन्य जहाज़ भी 'शोकलस्की' की मदद के लिए आ रहे हैं. यह फ़्रांस और ऑस्ट्रेलिया के जहाज़ हैं.

'शोकलस्की' पर मौजूद वैज्ञानिक बीसवीं सदी में वैज्ञानिक अभियान पर गए जहाज़ डोगलस मॉसन द्वारा किए गए प्रयोगों को दोबारा से देखने गए थे.

ऑस्ट्रेलिया के राज्य तस्मानिया की राजधानी होबार्ट के दक्षिण में एक हज़ार 500 नॉटिकल माइल की दूरी पर तेज़ हवाओं की वजह से रूस का 'शोकलस्की' बर्फ़ की मोटी चादर में फँस गया था.

'कोई खतरा नहीं'

क्रिस टर्नी और क्रिस फोगविल के नेतृत्व वाली वैज्ञानिक टीम ने बताया कि 'शोकलस्की' में पर्याप्त मात्रा में खाना मौजूद है और कोई ख़तरा नहीं है.

इस वक्त फँसे होने के बाद भी वैज्ञानिक अपने परीक्षण कर रहे हैं. वह तापमान और आस-पास की बर्फ़ का तापमान माप रहे हैं.

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