बांग्लादेशः इस्लामी नेता पर युद्ध अपराध का आरोप

बांग्लादेश, जमात-ए-इस्लामी

बांग्लादेश के मुख्य इस्लामी दल के एक सदस्य पर युद्ध अदालत ने वर्ष 1971 में पाकिस्तान से हुए युद्ध के दौरान युद्ध अपराधों का आरोप तय किया है.

अब्दुस सुभान को पिछले साल सितंबर में गिरफ़्तार किया गया था और विशेष युद्ध अपराध अदालत ने अंतिम रूप से आरोप तय करने से पहले एक जाँच कराई थी.

वर्ष 1971 के दौरान किए गए युद्ध अपराधों की जाँच के लिए प्राधिकरण का गठन साल 2010 में हुआ था. लेकिन मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यह प्राधिकरण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है.

सुभान ने सभी आरोपों से इनकार किया है.

बांग्लादेश पाकिस्तान से 1971 के युद्ध के बाद अलग हुआ था. इस युद्ध में बड़े पैमाने पर हत्याएँ हुई थीं. इस युद्ध में करीब एक करोड़ लोग विस्थापित हुए थे. इस युद्ध में पड़ोसी देश भारत ने भी हस्तक्षेप किया था.

बांग्लादेश सरकार ने उन लोगों की जाँच के लिए विशेष अदालत बनाई थी जिन पर पूर्वी-पाकिस्तान (जो बांग्लादेश बना) को पाकिस्तान से अलग स्वायत्त देश बनने से रोकने के लिए पाकिस्तान सेना की मदद करने का आरोप है.

स्वागत और विरोध

बहुत से बांग्लादेशियों ने आईसीटी(अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध प्राधिकरण) के कार्यों को स्वागत किया है लेकिन जमात-ए-इस्लामी के समर्थकों का कहना है कि ये कार्रवाई उसके नेताओं का सफ़ाया करने के लिए राजनीति से प्रेरित है.

इस महीने की शुरुआत में बांग्लादेश ने वरिष्ठ इस्लामी नेता अब्दुल कादेर मुल्ला को युद्ध अपराधों के चलते फांसी दे दी थी.

जमात-ए-इस्लामी के चार अन्य नेताओं को भी आईसीटी ने दोषी करार देते हुए मौत की सजा दी है.

जमात-ए-इस्लामी पर पाँच जनवरी को होने वाले बांग्लादेश के आम चुनाव में भागीदारी पर पाबंदी है लेकिन बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के विरोध प्रदर्शन में जमात-ए-इस्लामी की महत्वपूर्ण भूमिका है.

पिछले ही हफ़्ते राजधानी ढाका में विरोधी पार्टी के समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच चुनाव के मद्देनज़र टकराव हुआ था. सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि आम चुनाव एक कार्यवाहक सरकार की देखरेख में हो लेकिन सरकार ने उनकी मांग को ख़ारिज कर दिया.

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