बर्माः राजनीतिक कैदियों की रिहाई की तैयारी

Image caption 2010 में राष्ट्रपति बनने के बाद थेन सेन ने देश में व्यापाक राजनीतिक सुधारों की शुरुआत की है.

बर्मा सरकार की ओर से माफ़ी दिए जाने की घोषणा के बाद वहां राजनीतिक बंदियों की रिहाई की तैयारी चल रही है.

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितने राजनीतिक बंदी रिहा किए जाएंगे लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, देश में राजनीतिक बंदियों की संख्या 40 है.

मार्च 2010 में लोकतांत्रिक सुधार के शुरू होने के बाद से ही बर्मा (म्यांमार) में सैकड़ों राजनीतिक बंदियों को मुक्त किया जा चुका है.

राष्ट्रपति थेन सेन ने गत जुलाई में, "साल के अंत तक" सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा किए जाने का वादा किया था.

सोमवार को टेलीविज़न पर हुई सरकारी घोषणा के अनुसार, ''सभी बंदी जिन्हें सजा (संबंधित धाराओं के अंतर्गत) दी गई थी, उन्हें रिहा किया जाएगा.''

''न्यायालय में चल रहे सभी मुकदमे खत्म कर दिए जाएँगे और सभी अभियुक्तों को तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया जाएगा.''

समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, जिन लोगों को देशद्रोह, सरकारी कामकाज में व्यवधान और संवैधानिक कानूनों के उल्लंघन के आरोप में बंद किया गया था, उन सभी पर यह माफी लागू होगी.

लोकतंत्र की ओर बढ़े कदम

मानवाधिकार संगठनों ने बर्मा की पूर्व सैनिक सरकार पर ग़लत तरीके से तक़रीबन 2000 राजनीतिक विपक्षियों, पत्रकारों और विरोधियों को बंदी बनाने का आरोप लगाया था.

राष्ट्रपति थेन सेन ने नवंबर 2010 के चुनाव के बाद से बर्मा में प्रमुख राजनीतिक सुधारों की शुरुआत की है. बर्मा में लंबे अर्से तक सैन्य शासन रहा है.

राजनीतिक सुधारों के तहत देश में तमाम राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जा चुका है और मीडिया पर भी प्रतिबंध हटाए गए हैं.

विपक्ष भी इस राजनीतिक प्रक्रिया में पुनः शामिल हुआ है.

देश मे जारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जवाब में, बर्मा पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में ढील दी गई है.

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