इसराइल ने 26 फलस्तीनी क़ैदी रिहा किए

इसरायल द्वारा रिहा फलस्तीनी क़ैदी

इसराइल ने 26 फलस्तीनी क़ैदियों को रिहा कर दिया है. ये कदम इसराइल ने फलस्तीनियों के साथ सीधी बातचीत के हुए अमरीका समर्थित समझौते के तहत उठाया है.

पश्चिम तट और गज़ा पर क़ैदियों की वापसी पर लोगों ने ज़ोर-शोर से उनका स्वागत किया.

हालांकि इसराइल ने इन क़ैदियों की रिहाई को शनिवार को ही मंज़ूरी दे दी थी लेकिन पीड़ितों के परिवारों को रिहाई के खिलाफ़ अपील करने के लिए समय देने की वजह से उन्हें छोड़ने में देर हुई.

इन क़ैदियों ने 1993 के ओस्लो समझौते से पहले या तो हत्याएं की थीं या फिर हत्या की कोशिश की थी और वे 19 से 28 साल तक की जेल सज़ा काट रहे थे.

इसराइल द्वारा फलस्तीनी क़ैदियों को छोड़े जाने का ये तीसरा मौका था. दोंनो पक्षों के बीच हुए समझौते के तहत कुल 104 क़ैदियों को रिहा किया जाना है.

रिहा किए गए क़ैदियों में से आठ को देर रात गज़ा और पूर्व येरुशलम में नाकों पर ले जाया गया. बाकी 18 क़ैदी पश्चिम तट पर रमल्लाह जा रहे थे.

रिहाई का विरोध

जिन क़ैदियों को छोड़ा गया, उनके हाथों मारे गए इसराइली लोगों के परिवारों ने कई दिनों तक इनकी रिहाई के खिलाफ़ प्रदर्शन किया था और सुप्रीम कोर्ट से रिहाई रोकने की अपील की थी.

इससे पहले, अदालत ने इस तरह की रिहाई को मंज़ूरी दी है.

इसराइली पीड़ितों की संस्था, अल्मागोर, के मायर इंडोर ने येरुशलम पोस्ट को बताया, "जब हमने इन लोगों को पकड़ा था तब हम जानते थे कि इन्हें ज़्यादा से ज़्यादा समय तक जेल में रखने की ज़रूरत है. ये लोग टाइम-बम हैं. ये जहां भी जाते हैं, हत्या करते हैं क्योंकि यही इनके जीवन का लक्ष्य है."

इसराइली सरकार ने ज़ोर देकर कहा है कि अगर छोड़ा गया कोई भी क़ैदी ''फिर से हिंसा अपनाएगा'' तो उन्हें अपनी सज़ा की बाकी अवधि जेल में काटनी होगी.

Image caption राजनैतिक हिंसा का शिकार हुए कई इसरायली पीड़ितों के परिवार फलस्तीनी क़ैदियों की रिहाई का विरोध कर रहे हैं.

इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने सोमवार को अपनी लिकुड पार्टी की एक बैठक में इस फैसले का बचाव किया.

उन्होंने कहा, "नेतृत्व की पहचान फैसलों को अमल करने की काबिलियत से होती है, चाहे वो कितने भी मुश्किल क्यों न हों. हम आसान फैसले लेने के लिए नहीं चुने गए हैं."

उधर इसराइली लोगों की शिकायतों को खारिज करते हुए क़ैदी मामलों के फलस्तीनी मंत्री ईसा क़राक़ाई ने कहा, "इसराइल एक क़ातिल देश है और ये क़ैदी स्वतंत्रता सेनानी हैं."

और बनेंगी यहूदी बस्तियां

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि पिछली दो रिहाई के बाद इसराइली सरकार ने पश्चिम तट पर यहूदी बस्तियां बनाने की योजना की घोषणा की थी.

इसराइली मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक नेतन्याहू 1400 अतिरिक्त मकानों के निर्माण की योजना के बारे में घोषणा कर सकते हैं. इनमें से 600 मकान पूर्व येरुश्लम के रमत श्लोमो में बनाए जाएंगे.

साल 1967 में इसराइल के पश्चिम तट और पूर्व येरुशलम पर क़ब्ज़े के बाद से उसके द्वारा बसाई गई सौ से ज़्यादा बस्तियों में लगभग पांच लाख यहूदी रहते हैं. अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत ये बस्तियां अवैध हैं लेकिन इसराइल इसे खारिज करता रहा है.

फलस्तीनियों का कहना है कि इसराइल के बस्तियां बनाना जारी रखने से सीधी बातचीत को कमज़ोर करता है. तीन साल बाद जुलाई 2013 में फिर से शुरू हुई सीधी बातचीत में बहुत प्रगति नहीं हुई है.

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