सोने से हुआ मोहभंग, आखिर क्यों?

घाना में सोना

क्वाकू बोहम अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. सालों से क्वाकू और सोने की तलाश करने वाले उनके चार साथी दक्षिण पूर्व घाना में टर्कवा के क़रीब एक सड़क के किनारे सालों से अपनी ज़िंदगी बिता रहे हैं.

उष्ण कटिबंध इलाक़े की चिलचिलाती धूप और उमस में वे लाल मिट्टी और चट्टानों को खोदते हैं और उसे बेहद शोर करने वाले एक ग्राइंडर में डालते हैं. इस उम्मीद में कि इससे सोने के कण निकलेंगे जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण हो सकेगा.

लेकिन सोने के इन कणों की क़ीमतों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है. इसका निर्धारण तो न्यूयॉर्क और लंदन के बाज़ार तय करते हैं. पिछले एक साल से सोने की क़ीमत में गिरावट आ रही है.

बीते साल पहली जनवरी को सोने की क़ीमत 1687.22 डॉलर प्रति औंस थी जबकि इस महीने यह क़रीब 25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1240 डॉलर प्रति औंस पहुँच गई है.

साल 2014 का परिदृश्य भी उत्साहवर्द्धक नहीं है.

सोने की चमक फीकी पड़ने की वजह यह है कि दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं एक साल पहले की तुलना में आज ज़्यादा मज़बूत दिखाई दे रही हैं.

अर्थव्यवस्था

Image caption सोने की घटती क़ीमतों के कारण कई लोगों ने यह धंधा छोड़ दिया है.

अमरीकी अर्थव्यवस्था साल 2013 की अंतिम तिमाही में 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी जो कि 18 महीने में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. इसी तरह बेरोज़गारी की दर भी पिछले महीने सात प्रतिशत रही जो पाँच सालों में सबसे कम है.

ब्याज की दरें ऐतिहासिक निम्न स्तर पर बनी हुई हैं जबकि महंगाई पर भी काफ़ी हद तक काबू पाया जा चुका है. फ़ेडरल रिज़र्व की भविष्य की योजनाओं से अगले साल महंगाई बढ़ने की आशंकाओं पर विराम लग गया है.

इन सभी क़दमों से सोने की क़ीमतों में गिरावट आ रही है और इसके अभी और नीचे जाने की संभावना है.

दुनिया भर में सोने का खनन करने वाली कंपनियां मुनाफ़ा कम होने का रोना रो रही हैं. ये कंपनियां तो सोने की गिरती क़ीमतों को झेलने में सक्षम हैं लेकिन क्वाकू बोहम और उनके साथियों के पास कोई विकल्प नहीं है.

क्वाकू कहते हैं, "इन दिनों सभी क़ीमतें गिर रही हैं. अब यह काम अच्छा नहीं रह गया है. अब इसमें वो बात नहीं रह गई है."

झोपड़ियां

सोने के खनन के लिए मशहूर ओबुआसी और टर्कवा शहरों को जोड़ने वाली सड़क के किनारे मिट्टी को साफ करने के लिए झोंपड़ियां बनी हुई हैं.

Image caption सोने का खनन करने वाली कंपनियां मुनाफ़ा कम होने का रोना रो रही हैं.

इन्हीं में से एक झोंपड़ी में क्वाकू और उनके साथी खोदी हुई मिट्टी को प्रोसेसिंग के लिए लाते हैं.

कोफी ओसेई ऐसी ही एक सफाई झोंपड़ी का संचालन करते हैं और इसमें मिट्टी को साफ करने का सदियों से एक ही तरीक़ा चला आ रहा है. वह मिट्टी को पानी के साथ छानते हैं जिससे सोने के भारी कण छन्नी की तलहटी में चले जाते हैं.

इसके बाद वह सोने के कणों को आपस में जोड़ने के लिए पारे का इस्तेमाल करते हैं और फिर इसे एक कपड़े से निचोड़ते हैं.

पारे को हटाने के लिए इसे फिर पकाया जाता है. यह एक ख़तरनाक प्रक्रिया है क्योंकि पारे का धुंआ बेहद जहरीला होता है. इस तरह कच्चा सोना बनता है.

लेकिन सोने की घटती क़ीमतों के कारण कई लोगों ने यह धंधा छोड़ दिया है. साथ ही सोने के अवैध खनन के ख़िलाफ़ सरकार की मुहिम से भी कोफी का धंधा प्रभावित हुआ है.

कोफी को मिट्टी की हर बोरी के लिए एक तय रकम मिलती है लेकिन इनकी संख्या घटने का मतलब है कि अब उनका मुनाफ़ा घट रहा है.

कार्रवाई

उन्होंने कहा, "जो गिरोह झाड़ियों से मिट्टी के बोरे लाते थे वे अब ऐसा नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि सरकार ने उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की है. अब हमें जो सोने की मात्रा मिल रही है वो पर्याप्त नहीं है."

Image caption दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं एक साल पहले की तुलना में ज़्यादा मज़बूत दिखाई दे रही हैं इसलिए भी सोने के दाम गिरे हैं.

कोफी ने कहा, "हमारा भविष्य अनिश्चित है. हम केवल यही उम्मीद कर सकते हैं कि चीजें बेहतर होंगी. हम स्कूल नहीं गए, इसलिए यही हमारे जीवन-यापन का सहारा है."

क्वाकू फिर इस तरह तैयार सोने को लेकर कोजो ओवूसू जैसे ख़रीदार के पास पहुंचते हैं. ओवूसू डुंकवा शहर के दक्षिण में रहते हैं.

नोटों की गड्डियां और सोने की दो छोटी ईंटें दिखाते हुए कहते हैं कि अगले साल उनकी आर्थिक स्थिति दूसरे कई लोगों से ज़्यादा सुरक्षित रहेगी. लेकिन वह खनिकों और अपने उपभोक्ताओं के भविष्य को लेकर चिंतित हैं.

उन्होंने कहा, "लोग इस धंधे में नहीं आना चाहते हैं. सोने की क़ीमतें घटने से कई लोगों ने यह धंधा छोड़ दिया है. वे इसमें कोई निवेश नहीं कर रहे हैं."

वह बरामदे में एक मेज पर सहारा लेकर बैठे हैं और सड़क की दूसरी तरफ खड़ी खोदने वाली मशीन की ओर इशारा करते हैं.

मशीन पर कब्जा

उन्होंने कहा, "इस मशीन के मालिक ने बैंक से ऋण लिया था लेकिन उसे चुका नहीं पाया. बैंक ने मशीन को अपने कब्जे में ले लिया है."

जैसे ही सड़क से एक ट्रक गुजरता है, कोजो आने वाले साल को लेकर चिंता में डूब जाते हैं.

वह कहते हैं, "इस साल की शुरुआत में सब कुछ ठीक-ठाक था लेकिन पिछले दो महीने बहुत खराब रहे हैं."

उधर टर्कवा में क्वाकू बोहम भी भविष्य को लेकर चिंतित हैं. वह इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि सोने की खुदाई का धंधा अब उनके और उनके साथियों के लिए विकल्प नहीं रह गया है.

अभी कुछ ही साल पहले उन्होंने अच्छा पैसा बनाया था लेकिन क़ीमतों में गिरावट से उनके पास अपनी कड़ी मेहनत का फल दिखाने के लिए एक पुराने क्रशर और एक जेनेरेटर के अलावा कुछ भी नहीं है.

क्वाकू कहते हैं, "सोने की क़ीमतें गिर रही हैं और अब हमारी योजना कुछ और करने की है."

उनकी एक योजना सौंदर्य प्रसाधन का सामान बेचने की है. लेकिन भविष्य की तरह यह योजना भी अनिश्चित है.

(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार